बाबा भूतनाथ के स्वयंभू शिवलिंग पर सोमवार को गाय माता का स्वरूप उकेरा जाएगा। यह वही गाय माता है, जिन्होंने ग्वाले को यहां पर शिवलिंग के दर्शन करवाए थे औैर यहां पर राजा अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ का भव्य मंदिर बनवाया था।
इस स्वरूप को शिवलिंग पर उकेरने के महत्व को लेकर एक कहानी प्रचलित है। मान्यता है कि प्राचीन काल में स्वयंभू शिवलिंग पर एक गाय हर रोज दूध दिया करती थी, लेकिन इसकी किसी को जानकारी नहीं थी। एक दिन जब गाय ने दूध नहीं दिया तो मालिक को शक पड़ गया कि कोई गाय का दूध निकाल लेता है।
इस पर गाय का मालिक पुरानी मंडी से ब्यास लांघकर गाय के पीछे-पीछे आया। इस दौरान उसने देखा कि गाय एक स्थान पर खड़ी होकर दूध की धार बहा रही है। उसने देखा कि जिस स्थान पर वह दूध की धारा बहा रही थी, वहां पर एक प्राचीन शिवलिंग था। उसने इस बात की जानकारी राजा अजबर सेन को दी।
गाय माता की इस आस्था और शिवलिंग की महता को जानने के बाद राजा अजबर सेन ने इस स्थान पर 1527 ईस्वी में बाबा भूतनाथ के मंदिर का निर्माण करवाया। उस समय इस मंदिर में राजघराने के लोगों द्वारा ही पूजा-अर्चना की जाती थी।
उसी समय से शिवलिंग पर मुहूर्त के अनुसार शिवरात्रि से एक माह पूर्व मक्खन चढ़ाने की भी परंपरा शुरू हुई है और आज भी कायम है। उधर, मंदिर महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि सोमवार को स्वयंभू शिवलिंग पर मक्खन से गोमाता का स्वरूप उकेरा जाएगा।