हिमाचल के 17 युवा भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से पासआउट होकर सेना में अफसर बने हैं। इनमें कुछ ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए यहां तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं होता है। इन्होंने विपरीत परिस्थितियों में कड़ी मेहनत से खुद को तराशकर सफलता पाई। बतौर लेफ्टिनेंट बने इन युवा अफसरों के कंधों पर उनके माता-पिता और परिजनों ने सितारे सजाए। देश की माटी को चूम युवा अब देश सेवा के लिए तैयार हैं। अपने लाडलों के कंधों पर सितारे सजाते माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। जिला चंबा के सिहुंता के अर्श ने तो सैन्य अफसर बनने का सपना पूरा करने के लिए पुलिस और एयरफोर्स की नौकरी तक छोड़ दी।
IMA POP 2023: लाडलों के कंधों पर सितारे सजाते माता-पिता की आंखों से छलके खुशी के आंसू, 17 युवा बने अफसर
जयसिंहपुर के आस्तिक ठाकुर बने सेना में लेफ्टिनेंट
आस्तिक सिंह ठाकुर (21) सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। वह जयसिंहपुर क्षेत्र के निवासी हैं। वर्तमान में पालमपुर में रह रहे हैं। आस्तिक की एलकेजी से जमा दो तक शिक्षा डीएवी स्कूल पालमपुर से हुई है। 10वीं और 12वीं कक्षा में टॉपर्स में जगह बनाई है। इसके बाद पहले ही प्रयास में एनआईटी हमीरपुर, एनडीए, बीटेक, सेना और नौसेना की सभी परीक्षाएं पास कीं। उन्होंने सेना में जाने का मन बनाया। अब 10 जून को ओटीए गया से पासआउट हुए हैं। वह 113 मुंबई इंजीनियर में टेक्नो वारियर्स के रूप में सेवाएं देंगे। इनके दादा प्रताप सिंह ठाकुर भी सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत हुए हैं। आस्तिक के पिता अविनाश ठाकुर राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिद्धपुर सरकारी पालमपुर में प्रवक्ता हैं। माता निशा ठाकुर सेंट पॉल सीनियर सेकेंडरी स्कूल पालमपुर में शिक्षिका हैं। आस्तिक ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, दादा-दादी, गुरुजनों और कड़ी मेहनत को दिया है।
पुलिस-एयरफोर्स की नौकरी छोड़ सैन्य अफसर बने अर्श
सिहुंता के अर्श कुमार भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी बने हैं। माता-पिता ने बेटे के कंधों पर स्टार लगाए। अर्श ने अपना सपना पूरा करने के लिए पुलिस और एयरफोर्स की नौकरी छोड़कर कमीशन पास किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में कठिन प्रशिक्षण लिया। बेटे की कामयाबी पर माता-पिता खुश हैं। अर्श के सेना में अधिकारी बनने से घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। अर्श ने बताया कि उनके पिता अजय कुमार वन विभाग में रेंज ऑफिसर हैं। माता शुभलता गृहिणी हैं। बड़े भाई अंशुल जिला रोजगार कार्यालय शिमला में जिला रोजगार अधिकारी हैं। उन्होंने प्रदेश पुलिस विभाग के ट्रेनिंग सेंटर डरोह में नौ माह तक प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उनका चयन एयरफोर्स में बतौर एयरमैन हुआ। यहां साल तक सेवाएं दीं। इस दौरान उनका चयन एनडीआरए के लिए हुआ। उन्होंने सफलता का श्रेय माता-पिता, भाई और अपने गुरुजनों को दिया है।
माता-पिता ने लगाए शुभनीत के कंधों पर सितारे
विकास खंड नगरोटा सूरियां की धंगढ़ पंचायत के गांव ठंबा (ललूड़ी) के शुभनीत चावला सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं। शनिवार को पासआउट होने के बाद शुभनीत के माता-पिता बेटे के कंधों पर स्टार लगाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। शुभनीत क्रिकेट खिलाड़ी भी रहे हैं। उन्होंने दसवीं लुधियाना और बारहवीं आर्मी स्कूल उधमपुर जम्मू से की है। इसके बाद चंडीगढ़ से बीटेक करने के बाद सेना के सर्विस सेलेक्शन बोर्ड परीक्षा पास कर सेना में अधिकारी रैंक पर भर्ती हो गए। शनिवार को शुभनीत के पासआउट होकर लेफ्टिनेंट की सूचना मिलते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। शुभनीत के पिता कैप्टन कमल सिंह भी सेना से 2022 में सेवानिवृत्त हुए हैं। माता सुमन चावला शिक्षिका हैं। एक बहन स्वीटी चावला जालंधर से बीएससी कर रही हैं। एचएएस की भी तैयारी कर रही हैं। दादा दिवंगत ज्ञान सिंह चावला भी सेना में ही थे। दादी उर्मिला देवी गृहिणी हैं। शुभनीत 14 जून को घर पहुंचेंगे। वह लेह-लद्दाख में सेवाएं देंगे।
कुनेरन के तुषार सिख रेजिमेंट में सेवाएं देंगे
ऊना क्षेत्र के दो युवा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। आईएमए देहरादून में शनिवार को पासिंग आउट परेड के बाद ये युवा भारतीय सेना में शामिल हुए। दौलतपुर चौक क्षेत्र के कुनेरन गांव के तुषार ठाकुर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। इस मौके तुषार के पिता सतीश परमार, माता अनुराधा परमार और ताया सुखदेव सिंह परमार उपस्थित रहे। लेफ्टिनेंट तुषार ठाकुर आठ सिख रेजिमेंट में सेवाएं देंगे। तुषार के पिता सतीश परमार सेवानिवृत प्रधानाचार्य हैं। माता अनुराधा परमार राजकीय माध्यमिक पाठशाला शिवपुर में शिक्षिका हैं। बड़े भाई दीपांश प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियर हैं। तुषार की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी स्कूल अंबोटा में हुई। उन्होंने नौवीं से जमा दो की शिक्षा सैनिक स्कूल सुजानपुर टिहरा से हासिल की। वर्ष 2019 में एनडीए की परीक्षा पास की। राष्ट्रीय सैन्य अकादमी खडकवासला पुणे में तीन साल का प्रशिक्षण हासिल किया। एक साल आईएमए देहरादून में प्रशिक्षण लिया। तुषार ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, दादा-दादी और गुरुओं को दिया है। संवाद