पहले नोटबंदी और फिर आटाबंदी के फैसले से जनता अभी उबरी भी नहीं थी कि एक और बड़ा संकट पैदा हो गया है। इससे अब सरकार भी परेशान हैं। आइए जानते हैं पूरी रिपोर्ट-
8 नवंबर को केंद्र सरकार ने देशभर में 1000 और 500 की पुरानी करंसी बंद करने का ऐलान किया था। इसके चंद दिन बाद ही चुपचाप आटाबंदी की भी घोषणा कर दी गई। दोनों फैसले से जनता अभी बेहाल ही थी कि एक और संकट खड़ा हो गया।
हिमाचल सरकार ने इस संकट का आकलन कर केंद्र सरकार को पत्र लिख दिया है। दरअसल सूखे की मार के चलते राज्य में इस बार गेंहूं की कम पैदावार हुई है। किसान ही नहीं बल्कि सरकार भी सूखे से परेशान हैं। कम पैदावार और गोदामों, स्टोर आदि में रखे गेंहू के कम स्टॉक के चलते केंद्र से गेंहूं की सप्लाई करने को कहा गया है।
राज्य में अगस्त माह के बाद से बारिश नहीं हुई है। इससे सब्जियों की पैदावार भी कम हुई है जिसके चलते बाहर से सब्जियां मंगानी पड़ रही है। वहीं आटाबंदी और गेंहू की कम पैदावार ने मुश्किल और बढ़ा दी है। सरकार के पास इतना गेंहू नहीं है कि अपने स्तर पर एपीएल और बीपीएल परिवारों को गेंहू मुहैया करवाया जा सके।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हिमाचल को मिलने वाले गेहूं में कट लगाने के मामले में प्रदेश सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा है। इसमें केंद्र से 12 लाख एपीएल उपभोक्ताओं के लिए गेहूं उपलब्ध करवाने की बात कही गई है। सरकार ने पत्र में स्पष्ट किया है कि हिमाचल में फसल की कम पैदावार हुई है। सूखे के चलते हिमाचल को गेहूं देना अति आवश्यक है।