जयराम सरकार ने गरीब तय करने के मापदंडों में बदलाव कर दिया है। बीपीएल सूची से अपात्र लोगों को हटाने और चयन प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक बीपीएल परिवार के मुखिया को अब आय एवं संपत्ति को लेकर शपथपत्र देना होगा। ग्राम पंचायत को शपथपत्र देकर यह बताना होगा कि उनके परिवार के पास दो हेक्टेयर से ज्यादा असिंचित या एक हेक्टेयर से ज्यादा सिंचित भूमि नहीं है।
उसका परिवार आयकर नहीं देता है। परिवार की वेतन, पेंशन, मानदेय, मजदूरी और व्यवसाय से 2500 रुपये से अधिक मासिक आय नहीं है। परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी, गैर सरकारी नौकरी में नियमित या अनुबंध पर कार्यरत नहीं है। यदि कोई इस शर्त को पूरा नहीं कर पाता है तो ग्रामसभा ऐसे परिवार का नाम बीपीएल सूची से हटा देगी।
इस के अलावा बीपीएल परिवार के एक सदस्य की मनरेगा में साल में 20 दिन की दिहाड़ी जरूरी कर दी है। जिस परिवार का सदस्य दिव्यांग या 70 वर्ष की आयु से अधिक का है उसे इसमें छूट दी गई है। बीपीएल परिवार के कम से कम एक पात्र सदस्य को दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना या राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में स्थानीय स्तर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। विभाग प्रदेश में हर वर्ष अप्रैल माह में होने वाली ग्रामसभा की प्रथम बैठक में ग्राम पंचायत की बीपीएल सूची की समीक्षा की जाएगी।
अलग होने वाला परिवार तीन साल तक नहीं होगा सूची में शामिल- यदि बीपीएल परिवार का कोई सदस्य अलग परिवार के रूप में अपना नाम दर्ज करवाता है तो आगामी तीन वर्षों तक सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। अविवाहित लोगों का परिवार बीपीएल के लिए अलग परिवार नहीं माना जाएगा।
जहां बीपीएल नहीं, उनका बजट दूसरी जगह होगा खर्च- जिन पंचायतों में एक भी परिवार बीपीएल नहीं है, उन परिवारों के लक्ष्यों को संबंधित उपायुक्तों की ओर से उसी विकास खंड की अन्य ग्राम पंचायतों में पूर्व आवंटित लक्ष्य के समानुपात बांटा जाएगा। विकास खंड और जिले का बीपीएल लक्ष्य पूर्ववत ही रहेगा। बीपीएल मुक्त ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन के लिए विभाग की ओर से विशेष अनुदान योजना का प्रावधान किया जाएगा।