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बापू का इस शहर से रहा गहरा नाता, पढ़िए रोचक जानकारी और देखिए कुछ दुर्लभ तस्वीरें

Wed, 03 Oct 2018 09:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 03 Oct 2018 09:55 AM IST
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Father of the Nation Mahatma Gandhi  close connection with shimla
आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। राजधानी शिमला से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का गहरा नाता रहा है। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के दौरान महात्मा गांधी ने कई बार शिमला की यात्राएं की। अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने के कारण महात्मा गांधी को वार्ता के लिए कई बार शिमला का रुख करना पड़ा।
Father of the Nation Mahatma Gandhi  close connection with shimla
इतिहास के गर्भ में छिपे कई महत्वपूर्ण फैसले राजधानी शिमला में ही हुए। महात्मा गांधी पहली बार शिमला मदन मोहन मालवीय और लाला लाजपत राय के साथ 12 मई 1921 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रीडिंग से मिलने आए थे। वह यहां जाखू इलाके में स्थित लाला मोहनलाल के बंगले पर भी रुके थे। 1931 में वायसराय लार्ड वेलिंग्टन से मिलने भी आए थे।
Father of the Nation Mahatma Gandhi  close connection with shimla
इस भवन में अब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज चल रहा है। इसके बाद इमरसन से मिलने इसी साल बापू बल्लभ भाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू के साथ पहुंचे थे। यह बिल्डिंग एक आगजनी में ढह गई थी लेकिन इसका बाद में फिर से निर्माण किया जा चुका है। इसके बाद 1940 से 1946 के बीच बापू तीन बार शिमला आए। 
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शिमला सम्मेलन 25 जून 1945 ई. को हुआ था। शिमला में होने वाला यह एक सर्वदलीय सम्मेलन था। इसमें कुल 22 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। हालांकि महात्मा गांधी इस सम्मेलन का हिस्सा नहीं थे लेकिन वायसराय और कांग्रेस कार्यकारी समिति ने इस पर उनसे राय ली थी। सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख नेता जवाहरलाल नेहरू, मुहम्मद अली जिन्ना, इस्माइल खां, सरदार वल्लभ भाई पटेल, अबुल कलाम आज़ाद, खान अब्दुल गफ्फार खां और तारा सिंह थे। मुस्लिम लीग की जिद के कारण यह सम्मेलन असफल हो गया था।

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मुस्लिम लीग ने शर्त रखी थी कि वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में नियुक्त होने वाले सभी मुस्लिम सदस्यों का चयन वह स्वयं करेंगे। मुस्लिम लीग का यही अड़ियल रुख 25 जून से 14 जुलाई तक चलने वाले शिमला सम्मेलन की असफलता का प्रमुख कारण बना था।
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