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Shimla News: मरीजों व तीमारदारों को बताई नेत्रदान की प्रक्रिया
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नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर आईजीएमसी में दिया नेत्रदान का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में नेत्र रोग विभाग और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) ने नेत्रदान की प्रक्रिया के बारे में लोगों को जानकारी दी। विभाग की ओर से मंगलवार को नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर अस्पताल में लोगों को जागरूक किया गया। इस दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में भी बताया गया। नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामलाल शर्मा ने ओपीडी के बाहर मरीजों एवं तीमारदारों को नेत्रदान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। बताया कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद किया गया नेत्रदान दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बन सकता है। इसलिए लोगों को नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, कॉर्निया प्रत्यारोपण तथा नेत्रदान से संबंधित भ्रांतियों के बारे में भी बताया। कहा कि जागरूकता की कमी व अन्य कारणों के चलते कई लोग नेत्रदान के लिए आगे नहीं आ पाते हैं। ऐसे में सही एवं वैज्ञानिक जानकारी लोगों तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। नेत्रदान एक ऐसा मानवीय कार्य है, जिसके माध्यम से मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला किया जा सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में नेत्र रोग विभाग और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) ने नेत्रदान की प्रक्रिया के बारे में लोगों को जानकारी दी। विभाग की ओर से मंगलवार को नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर अस्पताल में लोगों को जागरूक किया गया। इस दौरान लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में भी बताया गया। नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामलाल शर्मा ने ओपीडी के बाहर मरीजों एवं तीमारदारों को नेत्रदान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। बताया कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद किया गया नेत्रदान दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बन सकता है। इसलिए लोगों को नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, कॉर्निया प्रत्यारोपण तथा नेत्रदान से संबंधित भ्रांतियों के बारे में भी बताया। कहा कि जागरूकता की कमी व अन्य कारणों के चलते कई लोग नेत्रदान के लिए आगे नहीं आ पाते हैं। ऐसे में सही एवं वैज्ञानिक जानकारी लोगों तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। नेत्रदान एक ऐसा मानवीय कार्य है, जिसके माध्यम से मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला किया जा सकता है।