पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकार जहां करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं सूबे में ऐसे पर्यावरण प्रेमी भी हैं, जिन्होंने अपने दम पर जंगल तैयार कर दिए। सिरमौर जिले में नौहराधार की देवना पंचायत के फागनी गांव के बुजुर्ग मीन सिंह इन्हीं में से एक हैं।
दावा है कि मीन सिंह ने देवदार समेत कई अन्य प्रजातियों के लगभग एक लाख पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। इसी साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में प्रशासन ने उन्हें पर्यावरणविद की संज्ञा देते हुए विशेष तौर पर सम्मानित भी किया।
प्रशासन ने वन क्षेत्र में लगे पेड़ों की स्थिति जानने के लिए सर्वे करवाया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच पेड़ों की गिनती की तो यह हजारों में पाई गई। मीन सिंह 14-15 वर्ष के थे, जबसे वह पौधे लगा रहे हैं और अब 90 की उम्र में भी यह सिलसिला जारी है। इलाके की बंजर भूमि पर वह देवदार, बान, चीड़, कायल और रुबीना के पौधे रोप चुके हैं। उन्होंने अपनी कई बीघा भूमि पर सेब का बगीचा भी तैयार किया है।
मीन सिंह के भतीजे सुरेंद्र सिंह के अनुसार मौसम चक्र के तहत जब पेड़ों का बीज गिरता है तो वह उन्हें रोपकर पौधे तैयार करते हैं। खुद पानी देकर उन्हें सींचते हैं। बरसों बरस इसी तरह से उन्होंने हरा-भरा जंगल तैयार कर दिया है। वह कहते हैं कि वनों में मजदूरी करते-करते मीन सिंह ने पौधे लगाने शुरू किए थे। हाल ही में उन्होंने 250 प्रजातियों के नए पौधे तैयार किए हैं।
नाहन की विल्ला राउंड सैर गांव में लगे पौधों को सींचने में पर्यावरण प्रेमियों ने हाथ बढ़ाए हैं। स्कूली छात्रा नंदनी हर रोज सुबह सैर करने के साथ वहां लगे पेड़ों को पानी दे रही है। यह उसकी दिनचर्या बन गई है। इसी तरह से सेवानिवृत्त शिक्षक राजेंद्र शर्मा, प्रवक्ता राजकुमार और प्यार चंद भी इस कार्य को बखूबी निभा रहे हैं।