मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आज अपना 84वां बर्थडे मना रहे हैं। जन्मदिन पर उनके निजी निवास स्थान हालीलॉज में जश्न का माहौल है। सीएम वीरभद्र से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो आज भी लोग नहीं जानते हैं। आइए हम बताते हैं नेहरू की बात मानने से लेकर छह बार सीएम बनने तक की पूरी कहानी-
वीरभद्र सिंह के नाम हिमाचल में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है। वह 1983 से 1990, 1993 से 1998 और 2003 से 2007 तक सीएम पद पर रहे। अब 2012 में उन्होंने रिकॉर्ड छठी बार हिमाचल के सीएम की शपथ ली थी। वीरभद्र सिंह हिमाचल के सबसे लोकप्रिय नेता भी है। मगर राजनीति का ये सफर उनके लिए इतना आसान नहीं था।
महज 28 साल की उम्र में ही वीरभद्र सिंह ने लोकसभा का चुनाव जीत लिया था। कहते हैं पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू ने 1962 में तीसरी लोकसभा चुनाव के लिए खुद वीरभद्र सिंह को चुनाव लड़ने के लिए कहा था। वीरभद्र ने उनकी बात मान ली। पहले ही चुनाव में वे विजयी हुए थे। वीरभद्र सिंह का डंका ऐसे बजा कि वे अगले दो लोकसभा चुनाव भी आसानी से जीत गए।
1962 से लेकर अब तक वीरभद्र सिंह लोकसभा में पांच बार चुने जा चुके हैँ। वह 1962, 1967, 1972, 1980 और 2009 में लोकसभा में हिमाचल का नेतृत्व कर चुके हैं। यूपीए सरकार में वह केंद्रीय मंत्री भी बने थे।
वीरभद्र सिंह का जन्म 23 जून 1934 को शिमला के सराहन में हुआ था। पिता पदम सिंह राजा थे। वीरभद्र सिंह ने शिमला के जाने माने बिशप कॉटन स्कूल से स्कूली शिक्षा हासिल की और इसके बाद दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद से वे राजनीति में जुड़ गए।