हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की गई ऐसी पंचायतें हैं, जहां डेढ़ साल में कोरोना संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इस कारण पंचायतों की ओर से लगाई गई सख्त पाबंदियां हैं। ग्रामीण भी इनका पालन कर रहे हैं। वहीं, पंचायतों के लोग इसे ईष्ट देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी मान रहे हैं।
कुल्लू जिले की करशैईगाड़, लगौटी तथा फनौटी पंचायतों में 15 महीने से कोरोना संक्रमण का एक भी केस सामने नहीं आया है। इन पंचायतों में अप्रैल महीने से बाहरी लोगों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक है। पंचायतों के भीतर भी लोगों के एक-दूसरे गांव में आने-जाने पर प्रतिबंध है। आपस में सटी तीनों पंचायतों की आबादी करीब छह हजार है। इनमें करशाला, बालू, बनाला, फनौटी, निचली फनौटी, जुहड़, कोट, बलेहड़, कोलथा, कुआ, सुहल, छलाच सहित 40 गांव हैं। इन गांवों में न तो कोरोना संक्रमण की पहली लहर में कोई केस आया था और न ही दूसरी लहर लोगों को छू पाई है।
ग्राम पंचायत लगौटी के प्रधान मोहन ठाकुर ने कहा कि बस सेवा बंद होने से भी लोगों का आवागमन पूरी तरह है। कोरोना को लेकर ग्रामीण सतर्क हैं। लोग खेत-खलिहानों में व्यस्त हैं। करशैईगाड़ पंचायत की प्रधान शारदा राणा ने कहा कि ग्रामीण अपने बाग-बगीचों में व्यस्त हैं।
पंचायत ग्रामीणों को लगातार जागरूक कर रही है। पंचायत और गांव में बाहरी लोग प्रवेश नहीं कर सकते। इस पर पंचायत प्रतिनिधि नजर रख रहे हैं। फनौटी पंचायत के वार्ड सदस्य सोहन लाल नेगी, राजेश, किशोरी लाल का कहना है कि कोरोना संक्रमण को लेकर ग्रामीणों ने खुद को घरों में कैद कर लिया है।
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लिग्गा पंचायत, चंबा।
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खेतीबाड़ी को छोड़कर लोगों ने बाहर जाना भी बंद कर दिया है। सरकार व प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। पंचायत में मास्क वितरण तथा सैनिटाइजेशन को प्राथमिकता दी जा रही है।