किन्नौर के बाद शुक्रवार सुबह कुल्लू की मणिकर्ण घाटी के कटागला गांव में बादल फटने से भारी तबाही हुई। सुबह करीब पांच बजे जैसे ही बादल फटने से नाले में बाढ़ आई तो लोगों में अफरातफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए साथ लगती पहाड़ी पर जा पहुंचे। छह घंटे बाद सुबह 11 बजे नाले का प्रवाह कम हुआ तो लोगों ने चैन की सांस ली।
बादल फटने से दो पुल और सैकड़ों बीघा कृषि भूमि बह गई। घरों व सेब बगीचों में मलबा घुस गया है। पेयजल पाइप लाइन बहने से गांव में जलसंकट हो गया है। बता दें कि बीते साल 12 अगस्त को भी इसी गांव में बादल फटा था। बीते दिन किन्नौर के पूह खंड के कानम गांव में बादल फटने से बागवानों को करोड़ों नुकसान हुआ है।
सतलुज का जलस्तर बढ़ने से नाथपा-झाकड़ी और सिल्ट होने से एशिया की सबसे बड़ी भूमिगत 15 मेगावाट विद्युत परियोजना, 412 रामपुर परियोजना 18 घंटे बंद रही। प्रदेश में वीरवार रात और शुक्रवार सुबह भारी बारिश से चंडीगढ़-मनाली, जालंधर-धर्मपुर और हिंदुस्तान-तिब्बत एनएच समेत 255 से अधिक सड़कों पर यातायात ठप रहा।
कुल्लू में दिल्ली-चंडीगढ़ के लिए हवाई उड़ानें नहीं हो पाईं। गगल एयरपोर्ट पर आने वाली चार उड़ानों में से एयर इंडिया की सुबह की उड़ान नहीं हुई। राजधानी शिमला के विक्ट्री टनल समेत जगह-जगह भूस्खलन में वाहन दब गए। बिलासपुर व अन्य जिलों में कई मकान-गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। मक्की और अन्य फसलों को क्षति पहुंची है।
चंबा जिल के बनीखेत-खैरी मार्ग पर छौ नाला के पास भूस्खलन से एचआरटीसी की बस जद में आने से बाल-बाल बच गई। पहाड़ी से गिर रहे मलबे को देख चालक ने सूझबूझ से ऐन मौके पर बस को पीछे कर लिया और 30 सवारियों की जान बच गई। जिले में भारी बारिश से कई मार्गों पर यातायात बाधित रहा।