हजारों लोगों ने ऐसा दर्दनाक मंजर पहली बार देखा। एक ही गांव के पांच युवाओं की चिताएं एक साथ जल रही थी। गांव चीख पुकारों से गूंज उठा। हर कोई ये मंजर देख अपने आंसू नहीं थाम पाया। हिमाचल के चंबा के जोत के पास सड़क हादसे में मारे गए कांगड़ा के बासा पंचायत के पांचों युवाओं का नगरोटा सूरियां के श्मशानघाट में शनिवार को एक-साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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पांचों के शव जब एक साथ गांव से श्मशानघाट के लिए निकले तो गांव चीख पुकार से गूंज उठा। एक दिन पहले तक जो हंसी खुशी घर से मणिमहेश यात्रा पर निकले थे अब कांधों पर शमशान के लिए ले जाए जा रहे थे।
- फोटो : अमर उजाला
पांचों के शव जब एक साथ गांव से श्मशानघाट के लिए निकले तो गांव चीख पुकार से गूंज उठा। एक दिन पहले तक जो हंसी खुशी घर से मणिमहेश यात्रा पर निकले थे अब कांधों पर शमशान के लिए ले जाए जा रहे थे।
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अंतिम संस्कार में आसपास की करीब 25 पंचायतों के हजारों की संख्या में लोग सुबह ही श्मशामघाट पहुंच गए थे। श्मशानघाट में जब पांच अलग-अलग चिताओं पर पांचों मृतक युवकों को लिटाया गया तो सभी की आंखें नम हो गईं।
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अंतिम संस्कार में आसपास की करीब 25 पंचायतों के हजारों की संख्या में लोग सुबह ही श्मशामघाट पहुंच गए थे। श्मशानघाट में जब पांच अलग-अलग चिताओं पर पांचों मृतक युवकों को लिटाया गया तो सभी की आंखें नम हो गईं।
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सभी के मुख से एक ही आवाज निकल रही थी कि एक साथ इतनी चिताएं जलती जिदंगी में पहली बार देखी। बासा गांव के 15 युवक दो अलग-अलग गाड़ियों में 2 सितंबर को नगरोटा सूरियां से मणिमहेश के लिए निकले थे।
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सभी के मुख से एक ही आवाज निकल रही थी कि एक साथ इतनी चिताएं जलती जिदंगी में पहली बार देखी। बासा गांव के 15 युवक दो अलग-अलग गाड़ियों में 2 सितंबर को नगरोटा सूरियां से मणिमहेश के लिए निकले थे।
यात्रा पर जाते समय चंबा से पीछे ही जोत के पास एक गाड़ी (टाटा सूमो) बस को पास देते समय पलट गईं। सूमो में सवार दस युवकों में से छह की मौत हो गई। इनमें पांच बासा गांव के एक ही मोहल्ले के थे, जबकि एक नगरोटा सूरियां से 10 किमी दूर पनाल्थ गांव का था।