प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात 16 हजार से अधिक अस्थायी शिक्षकों को नियमित करने में पेच फंस गया है।
अस्थायी शिक्षकों को नियमित करने के लिए विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक लाने की तैयारियों में जुटे शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर महाधिवक्ता ने सवाल उठा दिए हैं। महाधिवक्ता ने पूछा है कि अगर अस्थायी शिक्षकों को सरकार नियमित शिक्षकों के बराबर वेतन दे रही है तो इन्हें नियमित करने में कोई दिक्कत नहीं है।
अगर निर्धारित नियमों के तहत भर्तियां नहीं हुई हैं तो सरकार किस आधार पर ग्रांट इन एड जारी कर रही है। महाधिवक्ता की इस आपत्ति के बाद शिक्षा विभाग की मुहिम को बड़ा झटका लगा है। इस घटनाक्रम के बाद पैट, पैरा, पीटीए और एसएमसी शिक्षकों को नियमितीकरण का इंतजार और अधिक बढ़ गया है।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 6500 पीटीए, 2200 पैरा, 3400 पैट, 1500 ग्रामीण विद्या उपासक और 2600 एसएमसी शिक्षक नियुक्त हैं। इन सभी शिक्षकों को अस्थायी तौर पर नियुक्ति दी गई है। पैट, पैरा और पीटीए शिक्षकों को नियमित करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। साल 2013 में अस्थायी शिक्षकों को नियमित करने की प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
2014 में हाईकोर्ट ने अस्थायी शिक्षकों के हक में फैसला दिया। इसके बाद हजारों पीटीए शिक्षकों को सरकार ने नियमित भी किया। इसी बीच कुछ लोगों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उधर, भाजपा ने अपने चुनावी दृष्टिपत्र में अस्थायी शिक्षकों को नियमित करने की घोषणा की है।