शीत मरुस्थल लाहौल-स्पीति में बर्फबारी में फंसे लोगों को जहां वायुसेना के जांबाजों ने हवाई मार्ग से निकाला, वहीं करीब 350 लोगों की कबायली देवदूतों ने जमीनी स्तर पर जान बचाई। करीब दो बार मौत को पास से देखने वाले सैकड़ों सैलानी ग्राउंड रेस्क्यू अभियान के जांबाज कबायलीयों को ताउम्र नहीं भूल पाएंगे।
कबायली युवाओं ने बारालाचा दर्रे पर शून्य से नीचे 20 डिग्री तापमान में फंसे देश-विदेश सैलानियों को मौत के मुंह से सुरक्षित निकाला। करीब सोलह हजार फीट की ऊंचाई पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने वाले इन जांबाजों ने ‘अमर उजाला’ से अपने अनुभव साझा किए। बड़ी बात यह है कि इस ग्राउंड रेस्क्यू अभियान में 68 साल के एक स्कीयर ने भी अहम भूमिका निभाई है।
कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री रामलाल मारकंडा ने बताया कि देश में सबसे ऊंचाई पर चले इस बचाव अभियान के ग्राउंड रेस्क्यू के जांबाजों के नामों की सूची राज्य पुरस्कार के लिए सरकार को भेजी जाएगी। सेवानिवृत्त सैनिक नोरबू पांस उम्र 68 साल गांव यूरनाथ। रेस्क्यू अभियान में अच्छी पकड़ रखने वाले पांस 26 सितंबर को सेना के हेलीकाप्टर के जरिये पटसेउ में उतरे। उन्होंने वहां फंसे सेना के कुछ जवानों को लीड करते हुए ग्राउंड रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
हिमाचल पुलिस में कार्यरत 41 वर्षीय राजेश कटोच नोरबू पांस के साथ पटसेउ में लैंड करने वाले दूसरे शख्स थे। वह वहां से सेटेलाइट फोन से पल-पल की सूचना कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा और जिला पुलिस को दे रहे थे। इसी आधार पर हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन का खाका खींचा गया। इन्होंने 29 सितंबर को करीब 35 सैलानियों को सूरजताल से सड़क मार्ग के जरिये केलांग पहुंचाया।
केलांग निवासी सोनम जंगपो और सुनील बौद्ध ने 26 सितंबर को सरचू से ग्राउंड रेस्क्यू अभियान शुरू किया। यहां से 20 किमी दूर भरतपुर पहुंचकर इन दोनों ने 120 सैलानी सरचू पहुंचाए। नमची के सोनम वांग्याल और पस्पराग के रिगजिन नोरबू ने बातल, चंद्रताल और छतडू क्षेत्र में 45 लोगों को सुरक्षित निकाला।