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Hanuman Janmotsav: मध्य प्रदेश में मौजूद हैं बजरंगबली के अद्भुत और चमत्कारिक धाम
Sat, 16 Apr 2022 06:56 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sat, 16 Apr 2022 06:56 AM IST
सार
हनुमान जयंती: मध्य प्रदेश में मौजूद हैं बजरंगबली के अद्भुत और चमत्कारिक धाम
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हनुमान जयंती
- फोटो : सोशल मीडिया
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मध्य प्रदेश में राम भक्त हनुमान के कई मंदिर मौजूद हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर हम आपको बजरंगबली के चमत्कारी और दिव्य हनुमान मंदिरों के दर्शन कराने जा रहे हैं।
जामसांवली में शयनमुद्रा में स्थित हनुमान प्रतिमा।
- फोटो : सोशल मीडिया
हड्डी जोड़ने वाले हनुमान
कटनी जिले से करीब 35 किमी दूर मोहास गांव में हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर हैं। इस मंदिर को हड्डी जोड़ने वाले हनुमान धाम के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के इस चमत्कार के कई लोग साक्षी हैं। यहां मरीज टूटी हड्डी लेकर आते हैं और स्वस्थ होकर घर जाते हैं। मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन यहां बाकी दिनों से ज्यादा भीड़ होती है। मंदिर में मौजूद साधु हड्डी टूटने से पीड़ित लोगों को एक जड़ी खिलाते हैं जड़ी के प्रभाव से टूटी हड्डियां कुछ ही समय में जुड़ जाती हैं। भक्तों को ये जड़ी नि:शुल्क खिलाई जाती है।
कटनी जिले से करीब 35 किमी दूर मोहास गांव में हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर हैं। इस मंदिर को हड्डी जोड़ने वाले हनुमान धाम के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के इस चमत्कार के कई लोग साक्षी हैं। यहां मरीज टूटी हड्डी लेकर आते हैं और स्वस्थ होकर घर जाते हैं। मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन मंगलवार और शनिवार के दिन यहां बाकी दिनों से ज्यादा भीड़ होती है। मंदिर में मौजूद साधु हड्डी टूटने से पीड़ित लोगों को एक जड़ी खिलाते हैं जड़ी के प्रभाव से टूटी हड्डियां कुछ ही समय में जुड़ जाती हैं। भक्तों को ये जड़ी नि:शुल्क खिलाई जाती है।
कटनी के मोहास में स्थित हड्डी जोड़ने वाले हनुमान जी।
- फोटो : सोशल मीडिया
सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान
शाजापुर जिले के बोलाई गांव में सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान मंदिर मौजूद है। करीब 600 साल पुराना यह मंदिर अपने चमत्कारी किस्सों के लिए जाना जाता है। खेड़ापति हनुमान मंदिर रतलाम-भोपाल रेलवे ट्रेक के बीच बोलाई स्टेशन से करीब 1 किमी की दूरी पर मौजूद है। इस मंदिर में हनुमान जी भगवान गणेश के साथ एक ही प्रतिमा में विराजमान हैं, जिसके चलते यहां मंगलवार, बुधवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां हनुमान जी भविष्य बताते हैं। इस मंदिर में आने वाले लोगों को अपने साथ होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से ही जानकारी लग जाती है। सालों पहले मंदिर के पास दो मालगाड़ियों में टक्कर हो गई थी, हादसे के बाद मालगाड़ियों के पायलट ने बताया कि उन्हें एक्सीडेंट के बारे में पहले ही पूर्वाभास हो गया था। उन्हें ऐसा लगा कि कोई उन्हें ट्रेन की रफ्तार कम करने के लिए कह रहा है, लेकिन रफ्तार कम न करने के कारण दोनों ट्रेने आपस में टकरा गईं। उस हादसे के बाद से अब मंदिर के पास से गुजरने वाली हर ट्रेन धीमी रफ्तार में यहां से गुजरती है। हनुमान जी के भविष्य बताने के चलते यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर को बेहद सिद्ध और चमत्कारी माना जाता है।
शाजापुर जिले के बोलाई गांव में सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान मंदिर मौजूद है। करीब 600 साल पुराना यह मंदिर अपने चमत्कारी किस्सों के लिए जाना जाता है। खेड़ापति हनुमान मंदिर रतलाम-भोपाल रेलवे ट्रेक के बीच बोलाई स्टेशन से करीब 1 किमी की दूरी पर मौजूद है। इस मंदिर में हनुमान जी भगवान गणेश के साथ एक ही प्रतिमा में विराजमान हैं, जिसके चलते यहां मंगलवार, बुधवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
सिद्धवीर खेड़ापति हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां हनुमान जी भविष्य बताते हैं। इस मंदिर में आने वाले लोगों को अपने साथ होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से ही जानकारी लग जाती है। सालों पहले मंदिर के पास दो मालगाड़ियों में टक्कर हो गई थी, हादसे के बाद मालगाड़ियों के पायलट ने बताया कि उन्हें एक्सीडेंट के बारे में पहले ही पूर्वाभास हो गया था। उन्हें ऐसा लगा कि कोई उन्हें ट्रेन की रफ्तार कम करने के लिए कह रहा है, लेकिन रफ्तार कम न करने के कारण दोनों ट्रेने आपस में टकरा गईं। उस हादसे के बाद से अब मंदिर के पास से गुजरने वाली हर ट्रेन धीमी रफ्तार में यहां से गुजरती है। हनुमान जी के भविष्य बताने के चलते यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर को बेहद सिद्ध और चमत्कारी माना जाता है।
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शाजापुर के बोलाई में स्थित सिद्धवीर हनुमान मंदिर।
- फोटो : सोशल मीडिया
उल्टे हनुमान
इंदौर शहर से करीब 30 किमी दूर सांवेर गांव में हनुमान जी की बेहद विलक्षण प्रतिमा स्थापित है। प्राय: देश के हर मंदिर में हनुमान जी की सीधी प्रतिमा स्थापित है, लेकिन सांवेर गांव में हनुमान जी की उल्टी प्रतिमा स्थापित है। दुनिया भर में उल्टे हनुमान वाली ये इकलौती प्रतिमा है। मंदिर में बजरंगबली की इस दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
मंदिर में स्थापित हनुमान जी की उल्टी प्रतिमा के संबंध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान राम और रावण के युद्ध के दौरान अहिरावण ने रूप बदलकर राम जी की सेना में प्रवेश कर लिया था। रात के वक्त जब सभी लोग सो रहे थे। को अहिरावण राम और लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया पाताल लोक ले गया था। इस घटना के बारे में पता चलने के बाद हनुमान जी पाताल लोक में भगवान की खोज करने गए थे। कहा जाता है कि हनुमान जी ने सांवेर से ही पाताल लोक में प्रवेश किया था इसलिए यहां उनके पैर ऊपर और सिर धरती की ओर है। मंदिर में हनुमान जी की उल्टी प्रतिमा की पूजा की जाती है।
इंदौर शहर से करीब 30 किमी दूर सांवेर गांव में हनुमान जी की बेहद विलक्षण प्रतिमा स्थापित है। प्राय: देश के हर मंदिर में हनुमान जी की सीधी प्रतिमा स्थापित है, लेकिन सांवेर गांव में हनुमान जी की उल्टी प्रतिमा स्थापित है। दुनिया भर में उल्टे हनुमान वाली ये इकलौती प्रतिमा है। मंदिर में बजरंगबली की इस दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
मंदिर में स्थापित हनुमान जी की उल्टी प्रतिमा के संबंध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान राम और रावण के युद्ध के दौरान अहिरावण ने रूप बदलकर राम जी की सेना में प्रवेश कर लिया था। रात के वक्त जब सभी लोग सो रहे थे। को अहिरावण राम और लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया पाताल लोक ले गया था। इस घटना के बारे में पता चलने के बाद हनुमान जी पाताल लोक में भगवान की खोज करने गए थे। कहा जाता है कि हनुमान जी ने सांवेर से ही पाताल लोक में प्रवेश किया था इसलिए यहां उनके पैर ऊपर और सिर धरती की ओर है। मंदिर में हनुमान जी की उल्टी प्रतिमा की पूजा की जाती है।
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सांवेर में स्थित उल्टे हनुमान।
- फोटो : सोशल मीडिया
छींद वाले हनुमान
रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम छींद में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है। यहां हनुमान जी छींद वाले हनुमान के नाम से जाना जाता है। करीब 200 साल पुराने मंदिर में हनुमान जी एक पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान हैं। मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण मुखी है। छींद वाले हनुमान जी को रोगों से बचाने वाले हनुमान भी कहा जाता है। मंदिर की प्रसिद्धि के चलते ही यहां प्रदेशभर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। राजधानी भोपाल से मंदिर की दूरी 40 किमी है।
मंदिर में स्थापित प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है। कहा जाता है कि गांव के एक किसान को खेत में हनुमान जी की प्रतिमा मिली थी, जिसे उसने उसी जगह एक छोटी सी मढ़िया बनवाकर स्थापित कर दिया था। आज मंदिर ने विशाल रूप ले लिया है, जिसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम छींद में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है। यहां हनुमान जी छींद वाले हनुमान के नाम से जाना जाता है। करीब 200 साल पुराने मंदिर में हनुमान जी एक पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान हैं। मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण मुखी है। छींद वाले हनुमान जी को रोगों से बचाने वाले हनुमान भी कहा जाता है। मंदिर की प्रसिद्धि के चलते ही यहां प्रदेशभर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। राजधानी भोपाल से मंदिर की दूरी 40 किमी है।
मंदिर में स्थापित प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है। कहा जाता है कि गांव के एक किसान को खेत में हनुमान जी की प्रतिमा मिली थी, जिसे उसने उसी जगह एक छोटी सी मढ़िया बनवाकर स्थापित कर दिया था। आज मंदिर ने विशाल रूप ले लिया है, जिसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हैं। हनुमान जयंती के अवसर पर यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
