उत्तर प्रदेश के युवा पढ़ाई छोड़कर पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत सदस्य पद के लिए ताल ठोंक रहे हैं। वे मतदाताओं को भविष्य की हाईटेक तस्वीर दिखा रहे हैं। यही नहीं, गांव को हाईटेक सुविधाओं से सुसज्जित करने का दावा कर रहे हैं। सड़क, नाली जैसी आधारभूत सुविधाओं के साथ ई पंचायत का सपना साकार करना चाहते हैं।
पंचायत चुनाव में उतरने वाले युवा घर-घर जनसंपर्क करने के साथ ही व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिए प्रचार कर रहे हैं। बैनर-पोस्टर नाममात्र का दिख रहा है। वे ऑडियो-वीडियो का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके लिए वोटरों का समूह बनाया गया है। चुने जाने के बाद पंचायत अथवा अपने क्षेत्र के विभिन्न गांवों में किए जाने वाले बदलाव के संबंध में लोगों को जानकारी दे रहे हैं। वे यह भी बताते हैं कि उन्हें मौका मिला तो अगले पांच साल में ग्राम पंचायत में कौन-सी सुविधाएं होंगी और उसका किसे फायदा मिलेगा।
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बृजेंद्र प्रताप सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सुल्तानपुर के मझवारा गांव निवासी बृजेंद्र प्रताप सिंह महाराष्ट्र के पुणे से एलएलबी कर रहे हैं। लेकिन पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने पर गांव लौट आए। वह ग्राम प्रधान पद के उम्मीदवार हैं। वहीं, प्रधान रह चुकीं उनकी मां जिला पंचायत सदस्य पद की दावेदार हैं। वर्ष 2010 में जब बृजेंद्र की मां चुनाव लड़ रही थीं, उसी दौरान पिता की हत्या कर दी गई थी। बृजेंद्र सियासत के जरिए गांव की तस्वीर बदलना चाहते हैं।
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शुभम सिंह चौहान
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कानपुर देहात के ज्यूनियां गांव निवासी शुभम सिंह चौहान एमएससी की पढ़ाई में छोड़कर चुनाव में उतरे हैं। वह जिला पंचायत क्षेत्र तिलौंची से भाग्य आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि युवा सोच ही देश व समाज का विकास कर सकता है। वह अपने इलाके में शैक्षिक विकास को गति देने के लिए जनता के बीच में है। अगर उसे मौका मिला तो वह अपने क्षेत्र में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देंगे।
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निधि यादव
- फोटो : अमर उजाला
बांदा के बाबा का तालाब चिल्ला रोड निवासी निधि यादव एमए कर रही हैं। पहले वहां की सीट सामान्य थी और उनके पति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। बाद में उनका वार्ड संख्या 15 महिला के लिए आरक्षित हो गया। इस पर पति ने निधि को चुनाव मैदान में उतार दिया। निधि क्षेत्र में पेयजल, शिक्षा और तकनीक विकास कराने का दावा करते हुए मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रही हैं।