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तस्वीरें: बाग में बच्चों संग रह रही महिला, मकसद गांव बचाना, दिल्ली से अयोध्या आए और खेत में हो गए क्वारंटीन

Sun, 24 May 2020 10:45 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 24 May 2020 10:45 AM IST
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Woman living with children in garden in Ayodhya see photos
अयोध्या में गांव के बाहर बाग में रहती महिला - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या के इनायतनगर थाना क्षेत्र के ग्राम घुरेहटा में कोरोना के कहर में अपने पति को गंवा चुकी महिला अब अपने गांव को बचाने के लिए खुद को बाग में नन्हे-मुन्ने तीन बच्चों के साथ वनवासी की तरह क्वारंटीन किए हुए हैं। पति की मृत्यु के शोक में डूबी महिला का कहना है कि पति तो इस दुनिया से चले गए, लेकिन मेरा गांव और घर तो बचना चाहिए। 

 
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- फोटो : अमर उजाला
इनायतनगर थाना क्षेत्र के ग्राम घुरेहटा निवासी दलित कालीदीन का अकेला पुत्र राजकुमार (30) अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली में रह कर जीवनयापन करता था, लेकिन कोरोना ने उस हंसते खेलते परिवार पर कहर ढा दिया। शुक्रवार की सुबह युवक राजकुमार की मौत हो गई। बताते हैं कि दिल्ली में राजकुमार करीब एक पखवाड़े तक कोरोना से जंग लड़ रहा था। 
 
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migrant people - फोटो : अमर उजाला।
इसके बाद महिला खुद ही बाग में शिफ्ट हो गई। उसने कहा कि जब तक मेरी जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक मैं अपने गांव में नहीं घुसूंगी। बाग में चारपाई पर आशा कुमारी (27) अपने तीन छोटे-छोटे बच्चों पुत्र रितेश कुमार (9), पुत्री रितिका (6), पुत्र ऋषभ डेढ़ वर्ष के साथ जिंदगी गुजारने का फैसला कर लिया है। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ, डीएन द्विवेदी ने बताया कि महिला आशा देवी व उनके तीन बच्चों का सैंपल अभी लिया जाना है।
 
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कानपुर - फोटो : अमर उजाला
वहीं, दिल्ली से आये खंडासा क्षेत्र के इछोई गांव निवासी दो युवकों ने खुद को खेत में क्वारंटीन कर रखा है। स्थानीय लोग इनके संयम की काफी प्रशंसा कर रहे हैं। इछोई गांव निवासी अमरदीप शुक्ला व गणेश दुबे लॉकडाउन में दिल्ली में फंसे थे। 17 मई की रात लगभग एक बजे दोनों जगदीशपुर पहुंचे। जहां से पुलिस ने इनको मिल्कीपुर तक के लिए ट्रक में बैठा दिया। गांव के समीप पहुंचकर उन्होंने अपने परिवार वालों को सूचना दी। 
 
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migrant people - फोटो : अमर उजाला।
उनके परिवार वालों ने इनके लिए पास में ही स्थित बगीचे में सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध करवा दी। दिन भर तो ये लोग उस बगीचे में रहते हैं और शाम होते ही अपने मक्के के खेत के पास चले जाते हैं। छह दिन से यह लोग ऐसे ही रह रहे हैं। इनका कहना है कि क्वारंटीन के 14 दिन पूर्ण हो जाने पर ही ये अपने घर जाएंगे और तभी अपने घर के सदस्यों से मुलाकात करेंगे। 
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