इंग्लैंड के डॉ. जेसन ने राहुल की मौत को बताया हत्या, मां की गुजारिश के बाद निःशुल्क किया था परीक्षण
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उन्होंने यह भी कहा कि कांस्टेंशिया स्मारक की 60 फीट ऊंचाई से अगर कोई 14 साल का बच्चा गिरता है तो उसे अलग तरह की चोटें आनी चाहिए थीं जबकि राहुल के शरीर पर ऐसी कोई चोट परिलक्षित नहीं हो रही है। इतनी ऊंचाई से गिरने पर सबसे ज्यादा चोट गले, सीने के नीचे (पेट से ऊपर) तक आती हैं जबकि राहुल के शरीर के इस हिस्से में बहुत ही कम चोटें थीं। जो भी वह भी जानलेवा नहीं थीं। हाथ-पैर और पसलियां जगह-जगह से टूट जाती हैं। राहुल के सिर के तीन तरफ चोटें थीं जबकि गिरने वाले व्यक्ति के किसी एक तरफ ही चोट आती है। उसके दोनों पैरों के सामने की तरफ तीन सेंटीमीटर के घाव थे। कोई फ्रैक्चर था न ही कोई पसली टूटी थी। पेट में भी चोटें नहीं हैं जो आश्चर्यजनक है। उन्होंने घटनास्थल के फोटो देखकर जमीन पर खून के पैटर्न पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि घटनास्थल पर खून का न मिलना संदिग्ध है। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में राहुल को किसी भारी या ठोस हथियार से मारने की आशंका जताई थी।
हैदराबाद की निजी कंपनी की लैब के विशेषज्ञों का कहना था कि मृतक अगर सुसाइड करता तो सीधे अपने दोनों पैरों के बल जमीन पर गिरता। इससे उसके दोनों पैरों का निचला हिस्सा कई जगह से फ्रैक्चर होना चाहिए जो नहीं हुआ। जमीन पर पैर छूने के साथ ही मृतक का शरीर आगे की तरफ गिरता जिससे अगले हिस्से में चोटें, रगड़ और घिसने जैसे निशान आते जबकि शरीर के अगले हिस्से में ऐसा कोई भी लक्षण नहीं था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के एक चोट सिर के पिछले, एक चोट माथे और तीन चोटें चेहरे के बायें हिस्से पर हैं। तीनों ही चोटें सिर्फ ऊंचाई से गिरने मात्र से नहीं आ सकती हैं। यह चोटें झगड़े की हो सकती हैं। मृतक के बायें पैर के सामने वाले हिस्से पर घुटने से आठ सेंटीमीटर नीचे की तरफ व दायें पैर में घुटने से नौ इंच नीचे एक चोट थी। दोनों चोटें एक ही बार में लगी हैं। यह चोटें किसी छड़ी या लोहे की रॉड से वार करने से लगी हो सकती हैं। अगर मृतक खुद बिल्डिंग से कूदा और बीच में छज्जे या किसी अन्य वस्तु से टकराए बगैर सीधे नीचे गिरा तो उसकी छाती, पेट पर चोटें या रगड़ होनी चाहिए थीं जबकि उसे कहीं भी ऐसी चोटें नहीं लगी। इतनी ऊपर से गिरने के बाद ऐसा संभव नहीं है।
डेथ नोट गेम और फेसबुक के लैरी कॉनर्स पर नहीं हुआ काम
राहुल श्रीधरन के माता-पिता का कहना है कि पुलिस ने डेथ नोट गेम खेलने या लड़की के चक्कर में खुदकुशी की बात कहकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन इससे जुड़े कोई भी तथ्य नहीं जुटाए। अनम्मा का आरोप है कि राहुल की मौत के मामले में प्रथम आरोपी उसके फेसबुक फ्रेंड लैरी कॉनर्स का नाम भी पुलिस ने जानबूझकर छिपाया। उसकी फेसबुक आईडी को ट्रेस करने की कोशिश नहीं की, जबकि राहुल की मौत के ठीक पहले तक उसका फेसबुक पर लैरी कॉनर्स नाम के व्यक्ति से संपर्क बना हुआ था। उनका कहना है कि लैरी कॉनर्स नाम से किसी व्यक्ति ने फर्जी आईडी बनाकर उनके बेटे की अबोध मानसिक अवस्था का शोषण किया था। उसने राहुल के मन में खुद को भगवान होने का भ्रम पैदा कर दिया था। उन्होंने लैरी कॉनर्स के डेथ नोट गेम से भी जुड़े होने की आशंका जताई थी।