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रेलवे: 29 साल पहले हेराफेरी में धरा गया था सरगना, तीन बार जा चुका है जेल

Thu, 25 Apr 2019 03:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 25 Apr 2019 03:19 PM IST
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story behind fraud on the name of jobs in railway
गिरोह से जब्त फर्जी नियुक्ति पत्र और टीसी का नकली बैज - फोटो : amar ujala

रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा दे लाखों रुपये ऐंठने के बाद जाली नियुक्ति पत्र थमाने वाले गिरोह का सरगना गोरखपुर के बसंतपुर निवासी सुशील कुमार शर्मा उर्फ बीके सिंह तीन बार जेल जा चुका है। 1990 में हेराफेरी के मामले में पकड़ा गया था। वह रेलवे डीजल लोको शेड गोंडा में खलासी था। आरपीएफ ने उसे डीजल-मोबिल की हेराफेरी में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसी मामले में उसे बर्खास्त किया गया था। इसके बाद उसने फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया। वहीं यूपी पुलिस ने भी उसे 2012 और 2017 में गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसके खिलाफ गोरखपुर के कैंट थाने और लखनऊ के विकासनगर में केस दर्ज है।

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गिरोह से जब्त काला कोट और लाल टाई - फोटो : amar ujala

अपर पुलिस अधीक्षक ट्रांसगोमती के मुताबिक अमित कुमार के मुताबिक सुशील बर्खास्तगी के बाद 17 साल तक छोटे-छोटे फर्जीवाड़ा करता रहा। 2007 में उसने नौकरी के नाम पर ठगने वाला गिरोह बनाया। इसमें गोरखपुर से कानपुर और मध्यप्रदेश के भोपाल व भिंड तक के लोगों को शामिल किया। गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैल गया और सैकड़ों बेरोजगारों से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए। जालसाजी की शिकार ममता यादव और एक अन्य युवक ने पुलिस से संपर्क किया। ममता की तहरीर पर पुलिस ने विकासनगर थाने में केस दर्ज कर आरोपियों को दबोचा। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी होने पर छह से अधिक ठगी के शिकार युवकों ने पुलिस से संपर्क किया है। 

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गिरोह से जब्त नेम प्लेट - फोटो : amar ujala

कई किस्तों में लेते थे रकम
विकासनगर के अतिरिक्त निरीक्षक अपराध धनंजय कुमार पांडेय के मुताबिक गिरोह कई किस्तों में रकम वसूलता था। पहली किस्त आवेदन पत्र भरवाने के साथ ली जाती थी। इसके बाद परीक्षा, साक्षात्कार के दौरान और फिर चिकित्सकीय परीक्षण के नाम पर रकम वसूली जाती थी।
छह से ज्यादा राज्यों में नेटवर्कः गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली, पं. बंगाल, महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में है। गिरोह में सक्रिय एजेंट रेलवे में टीसी, क्लर्क, गैंगमैन सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगते।

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गिरोह से जब्त सामान - फोटो : amar ujala

ये सामान हुआ बरामद
पुलिस ने जालसाजों से दो कूट रचित नियुक्ति पत्र, दो कूट रचित ऑफर लेट, दो टीई के सफेद धातु से बने बैज, दो नेम प्लेट, दो काले कोट, दो लाल टाई, एक लाख रुपये, लग्जरी कार, 12 मोबाइल व सिमकार्ड और एक डायरी बरामद की। डायरी में बेरोजगारों के नाम के सामने पोस्ट और रकम लिखी है। किससे कितने की वसूली हो चुकी है, कितनी करनी है, यह सब डायरी में था।
गिरफ्तार करने वाली टीम
प्रभारी निरीक्षक विकासनगर रामकुमार यादव, अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक धनंजय कुमार पांडेय, एसएसआई अरविंद कुमार पांडेय, उपनिरीक्षक मंगल सिंह, योगेंद्र सिंह, अख्तर सईद उस्मानी, हरिनाथ यादव, भानूप्रताप सिंह, मुख्य आरक्षी सरोज कुमार दीक्षित, आरक्षी अभिषेक यादव, अजय सरोज, सुनील कुमार, सुधीर कुमार सिंह, महिला आरक्षी आरती कश्यप।

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गिरोह से जब्त काला कोट - फोटो : amar ujala
नियुक्ति पत्र के साथ देते थे वर्दी
क्षेत्राधिकारी महानगर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक जालसाज बेरोजगारों को अंतिम समय तक झांसे में रखते थे। मेडिकल के बाद युवक-युवतियों को लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, वाराणसी, भोपाल सहित कई बडे़ रेलवे स्टेशनों पर बुलाया जाता था। वहीं, उन्हें नियुक्ति पत्र और वर्दी सुपुर्द की जाती थी, ताकि पूरा भरोसा हो जाए कि नियुक्ति सही है। इसके बाद उन्हें दूसरे स्टेशन पर जॉइन करने भेजा जाता था।
साथी को बना देते थे बड़ा अधिकारी
पुलिस के मुताबिक जालसाज बेरोजगारों को भरोसा दिलाने के लिए रेलवे के फर्जी अधिकारियों से मुलाकात कराते। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मुंबई, नई दिल्ली, भोपाल व कोलकाता स्टेशन पर बेरोजगार व उनके परिवारीजनों को लेकर जाते थे। वहां गिरोह के ही दूसरे जालसाज को स्टेशन का सबसे बड़ा अधिकारी बताकर मुलाकात कराते। अधिकारी बना जालसाज भी वर्दी में रहता, ताकि शक न हो। इसके बाद वह स्टेशन पर बने किसी अधिकारी के कार्यालय की तरफ चला जाता। डारमेट्री, रेस्टोरेंट या एसी वेटिंग हॉल में ही मुलाकात कराते थे।
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