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डरें नहीं लड़ें...इसी मंत्र को हथियार बनाया और 19 साल की बिटिया से लेकर 70 पार के दद्दू तक ने कोरोना को हराया
Sun, 12 Apr 2020 09:19 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 12 Apr 2020 09:19 AM IST
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corona virus lockdown
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना की दहशत के बीच अपने हिम्मत...आत्मबल और डाक्टरों के आदेश का कड़ाई से पालन करते हुए ऐसे तमाम लोग हैं जिन्होंने इस खतरनाक वायरस को मात दी है। इनमें 19 साल की मारीषा से लेकर 70 साल के विजय नारायण राव भी हैं। जिस बीमारी का नाम सुनते ही कंपकंपी छूट रही हो...ज्यादातर मरीजों का मनोबल गिर रहा हो, ऐसे में इन लोगों ने किस तरह हालात से मुकाबला किया, एक-एक दिन किस तरह बीमारी को हारने पर मजबूर किया। हम साझा कर रहे हैं ऐसे ही कुछ योद्धाओं के अनुभव और सुझाव...।
विजय नारायण
- फोटो : अमर उजाला
सजगता से परिवार को बचाया आत्मबल से खुद हुए स्वस्थ
उम्र सत्रह हो या सत्तर की, बीमारी कोरोना हो या कोई और...मानसिक रूप से मजबूत हैं तो मुसीबतों को नहीं मिलना कोई ठौर। 70 की उम्र में कोरोना को धूल चटाने वाले एनआरआई सिटी के डायमंड टॉवर निवासी विजय नारायण राव ऐसे ही विचारों से भरे हैं। वह कहते हैं कि कोरोना से निपटने के लिए साफ-सफाई और सामाजिक दूरी के सिद्धांत का पालन करें। अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लेते रहें। मानसिक रूप से मजबूत रहें। यही करके उन्होंने इस उम्र में कोरोना को मात दी। छह अप्रैल को उर्सला अस्पताल से घर पहुंचने के बाद 14 दिन के क्वारंटीन पर हैं। बताया कि 14 मार्च को वह और उनकी पत्नी अमेरिका में बेटे के घर से लौटे थे। यहां पहुंचने पर दंपती अलग-अलग कमरे में क्वारंटीन हो गए थे। अगले दिन बुखार होने पर उन्होंने खुद स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी और संक्रामक रोग चिकित्सालय जांच कराने पहुंच गए, लेकिन उस दिन सैंपल नहीं दे पाए। 18 मार्च को सैंपल देने के बाद 21 को उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई। इस दौरान अपने बेटे, बहू और दो पोतों से भी नहीं मिलते थे। सामाजिक दूरी बनाए रखने का नतीजा यह निकला कि पूरा परिवार संक्रमण से बच गया। विजय नारायण बताते हैं कि 21 मार्च को कोरोना की पुष्टि होने पर उन्हें उर्सला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। उन्हें खांसी, तेज बुखार के साथ ही शरीर में दर्द था। थोड़ा घबराए जरूर, लेकिन एकदम से चिंता में भी नहीं डूब गए कि ये क्या हो गया। आत्मविश्वास बनाए रखा और डॉक्टरों के गाइडेंस को लगातार फॉलो करते रहे। दवाएं और गुनगुना पानी पीते रहे। फोन पर परिजनों से बातचीत के साथ धार्मिक पुस्तकें पढ़ते रहे, पौष्टिक भोजन करते रहे। उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि विजय नारायण के फेफड़े ठीक काम कर रहे थे। चेस्ट क्लियर था। उम्र के हिसाब से हार्ट, किडनी ठीक थे। उन्होंने हिम्मत दिखाई जिससे मदद मिली।
विजय नारायण, कानपुर
उम्र सत्रह हो या सत्तर की, बीमारी कोरोना हो या कोई और...मानसिक रूप से मजबूत हैं तो मुसीबतों को नहीं मिलना कोई ठौर। 70 की उम्र में कोरोना को धूल चटाने वाले एनआरआई सिटी के डायमंड टॉवर निवासी विजय नारायण राव ऐसे ही विचारों से भरे हैं। वह कहते हैं कि कोरोना से निपटने के लिए साफ-सफाई और सामाजिक दूरी के सिद्धांत का पालन करें। अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लेते रहें। मानसिक रूप से मजबूत रहें। यही करके उन्होंने इस उम्र में कोरोना को मात दी। छह अप्रैल को उर्सला अस्पताल से घर पहुंचने के बाद 14 दिन के क्वारंटीन पर हैं। बताया कि 14 मार्च को वह और उनकी पत्नी अमेरिका में बेटे के घर से लौटे थे। यहां पहुंचने पर दंपती अलग-अलग कमरे में क्वारंटीन हो गए थे। अगले दिन बुखार होने पर उन्होंने खुद स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी और संक्रामक रोग चिकित्सालय जांच कराने पहुंच गए, लेकिन उस दिन सैंपल नहीं दे पाए। 18 मार्च को सैंपल देने के बाद 21 को उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई। इस दौरान अपने बेटे, बहू और दो पोतों से भी नहीं मिलते थे। सामाजिक दूरी बनाए रखने का नतीजा यह निकला कि पूरा परिवार संक्रमण से बच गया। विजय नारायण बताते हैं कि 21 मार्च को कोरोना की पुष्टि होने पर उन्हें उर्सला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। उन्हें खांसी, तेज बुखार के साथ ही शरीर में दर्द था। थोड़ा घबराए जरूर, लेकिन एकदम से चिंता में भी नहीं डूब गए कि ये क्या हो गया। आत्मविश्वास बनाए रखा और डॉक्टरों के गाइडेंस को लगातार फॉलो करते रहे। दवाएं और गुनगुना पानी पीते रहे। फोन पर परिजनों से बातचीत के साथ धार्मिक पुस्तकें पढ़ते रहे, पौष्टिक भोजन करते रहे। उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि विजय नारायण के फेफड़े ठीक काम कर रहे थे। चेस्ट क्लियर था। उम्र के हिसाब से हार्ट, किडनी ठीक थे। उन्होंने हिम्मत दिखाई जिससे मदद मिली।
विजय नारायण, कानपुर
शाहनवाज
- फोटो : अमर उजाला
खुदा की इबादत, मजबूत मन से जीती कोरोना से जंग
शाहनवाज दुबई से लौटे थे । 24 मार्च को उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई। स्वास्थ विभाग ने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उपचार किया और 15 दिन बाद भी ठीक होकर घर चले गए। शाहनवाज ने बताया कि जब उसे पॉजिटिव होने का पता चला तो शुरू में वह थोड़ा घबराया लेकिन बाद में मन को तसल्ली दी। इस दौरान मोबाइल भी उसका हमसफर बना। परिजनों दोस्तों से मोबाइल पर खूब बातें होती थीं खूब जमकर चैटिंग हुई। सभी ने उसका हौसला बढ़ाया। पत्नी और बच्चों से वीडियो कॉलिंग पर बातें करता था जिससे उसका मन मजबूत हुआ।
शाहनवाज, शामली
शाहनवाज दुबई से लौटे थे । 24 मार्च को उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई। स्वास्थ विभाग ने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर उपचार किया और 15 दिन बाद भी ठीक होकर घर चले गए। शाहनवाज ने बताया कि जब उसे पॉजिटिव होने का पता चला तो शुरू में वह थोड़ा घबराया लेकिन बाद में मन को तसल्ली दी। इस दौरान मोबाइल भी उसका हमसफर बना। परिजनों दोस्तों से मोबाइल पर खूब बातें होती थीं खूब जमकर चैटिंग हुई। सभी ने उसका हौसला बढ़ाया। पत्नी और बच्चों से वीडियो कॉलिंग पर बातें करता था जिससे उसका मन मजबूत हुआ।
शाहनवाज, शामली
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मारीषा
- फोटो : अमर उजाला
एक घंटे योग और अध्यात्म से सब कुछ हुआ आसान
इच्छाशक्ति प्रबल हो तो मौत को भी मात दे सकते हैं, इसको साबित कर दिखाया है जिले की पहली कोरोना संक्रमित मारीषा ने। वह शुक्रवार को स्वस्थ होकर अपने घर पहुंच गईं। कोरोना से जंग जीतने वाली मारीषा ने आइसोलेशन वार्ड में 23 दिन बिताए। उसने बताया कि आइसोलेशनल वार्ड में शुरुआती दो दिन परेशानी जरूरी हुई, लेकिन उसने खुद को ढाल लिया। फ्रांस में पढ़ रही 19 साल की मारीषा उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की रिश्तेदार हैं। मुरादाबाद पहुंचने पर उसे कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। 19 मार्च को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसने हौसला नहीं हारा। दृढ़ इच्छा शक्ति पर डॉक्टर भी हैरान थे। मारीषा ने बताया कि उसने रोजाना एक घंटे योग और आध्यात्म के साथ कोरोना से लड़ाई लड़ी। किताबों से दोस्ती कर ली। फ्रेंच सीखी। दिनभर इंटरनेट में व्यस्त रहीं। दुनियाभर के कोरोना मामलों से अपडेट रहीं। भरपूर नींद ली।
टिप्स- मानसिक रूप से खुद को मजबूत रखें, चिकित्सकों की हर सलाह को स्वीकार करें, अपनी रुचि की किताबें पढ़ें, योगा और व्यायाम करें।
मारीषा, मुरादाबाद
इच्छाशक्ति प्रबल हो तो मौत को भी मात दे सकते हैं, इसको साबित कर दिखाया है जिले की पहली कोरोना संक्रमित मारीषा ने। वह शुक्रवार को स्वस्थ होकर अपने घर पहुंच गईं। कोरोना से जंग जीतने वाली मारीषा ने आइसोलेशन वार्ड में 23 दिन बिताए। उसने बताया कि आइसोलेशनल वार्ड में शुरुआती दो दिन परेशानी जरूरी हुई, लेकिन उसने खुद को ढाल लिया। फ्रांस में पढ़ रही 19 साल की मारीषा उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की रिश्तेदार हैं। मुरादाबाद पहुंचने पर उसे कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। 19 मार्च को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसने हौसला नहीं हारा। दृढ़ इच्छा शक्ति पर डॉक्टर भी हैरान थे। मारीषा ने बताया कि उसने रोजाना एक घंटे योग और आध्यात्म के साथ कोरोना से लड़ाई लड़ी। किताबों से दोस्ती कर ली। फ्रेंच सीखी। दिनभर इंटरनेट में व्यस्त रहीं। दुनियाभर के कोरोना मामलों से अपडेट रहीं। भरपूर नींद ली।
टिप्स- मानसिक रूप से खुद को मजबूत रखें, चिकित्सकों की हर सलाह को स्वीकार करें, अपनी रुचि की किताबें पढ़ें, योगा और व्यायाम करें।
मारीषा, मुरादाबाद
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राजकुमार
- फोटो : अमर उजाला
सामाजिक दूरी और सावधानी से दूसरों को नहीं हुआ संक्रमण
फूलपुर के चितौरा गांव निवासी राजकुमार ने बताया कि 17 मार्च को दुबई से दिल्ली पहुंचे, तभी से तबीयत बिगड़ गई थी। घर आने के बाद अपने परिवार से दूर ही रहा। यहां तक कि खाने के बर्तन भी अलग कर लिए थे। मैं शुरू से ही सावधानी बरत रहा था। 21 जनवरी को रात्रि करीब 10 बजे पुलिस प्रशासन और डॉक्टरों की टीम मेरे घर पहुंची और रिपोर्ट पॉजिटिव होने की जानकारी दी। राजकुमार ने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशानिर्देश का पालन करने की अपील की है। कहा कि लॉकडाउन का सही से पालन करके ही कोरोना को हराया जा सकता है।
राजकुमार, वाराणसी
फूलपुर के चितौरा गांव निवासी राजकुमार ने बताया कि 17 मार्च को दुबई से दिल्ली पहुंचे, तभी से तबीयत बिगड़ गई थी। घर आने के बाद अपने परिवार से दूर ही रहा। यहां तक कि खाने के बर्तन भी अलग कर लिए थे। मैं शुरू से ही सावधानी बरत रहा था। 21 जनवरी को रात्रि करीब 10 बजे पुलिस प्रशासन और डॉक्टरों की टीम मेरे घर पहुंची और रिपोर्ट पॉजिटिव होने की जानकारी दी। राजकुमार ने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशानिर्देश का पालन करने की अपील की है। कहा कि लॉकडाउन का सही से पालन करके ही कोरोना को हराया जा सकता है।
राजकुमार, वाराणसी