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यूपी: प्रदेश में बिजली की भारी किल्लत की वजह आई सामने, कोयले के भीगने से बढ़ा संकट;10 उत्पादन इकाइयां बंद

Tue, 15 Sep 2026 06:50 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 15 Sep 2026 06:50 AM IST
सार

Power crisis in UP: प्रदेश में सप्ताहभर से बिजली को लेकर हाहाकार मचा है। गांवों में आठ घंटे से अधिक बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐसे में लघु एवं कुटीर उद्योग के सामने संकट खड़ा हो गया है।

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UP: The reason behind the severe power shortage in the state has come to light, with the crisis worsening due
यूपी में बिजली कटौती। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 प्रदेश में भीगा कोयला ही नहीं बल्कि प्रबंधकीय चूक की वजह से भी बिजली की किल्लत हो गई है। अभी भी 10 उत्पादन इकाइयां बंद है, जिसकी वजह से करीब 5340 मेगावाट उत्पादन कम हो रहा है। इस वर्ष अभी अधिकतम मांग करीब 25 हजार मेगावाट है, जबकि पिछले वर्षों में यह करीब 30 हजार मेगावाट रही है। इससे साफ है कि सितंबर माह की खपत के आधार पर पहले से रणनीति नहीं बनाई गई।

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प्रदेश में सप्ताहभर से बिजली को लेकर हाहाकार मचा है। गांवों में आठ घंटे से अधिक बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐसे में लघु एवं कुटीर उद्योग के सामने संकट खड़ा हो गया है। उपकेंद्र से जुड़े अलग- अलग फीडरों की बिजली शाम होते ही काट दी जाती है। ऊर्जा प्रबंधन ने भी उच्च स्तरीय बैठक में स्वीकार किया कि रात में करीब 1500 से 2000 मेगावाट की कटौती की जा रही है, दूसरी तरफ यूपीएसएलडीसी ने 14 सितंबर की रिपोर्ट में दावा किया कि ग्रामीण इलाके को 18.03 घंटे और शहर को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है।

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बंद हैं 10 उत्पादन इकाइयां

प्रदेश में तकनीकी कारणों से 10 उत्पादन इकाइयां बंद हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की अनपरा यूनिट सात, घाटमपुर यूनिट एक और दो, हरदुआगंज विस्तार यूनिट एक, जवाहरपुर यूनिट दो बंद है। इसी तरह रोजा, मेगा, हरदुआगंज ओबरा की अलग- अलग यूनिटों सहित कुल 10 उत्पादन इकाइयां बंद हैं। इससे करीब 5340 मेगावाट कम उत्पादन हो रहा है। इसमें चार इकाइयां 17 सितंबर से पहले शुरू होने की संभावना है, जबकि छह 30 सितंबर तक शुरू होंगी।

कहीं 12 तो कहीं 20 दिन का कोयला

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथारटी फ्यूल मैनेजमेंट की दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक अनपरा और एनटीपीसी की सिंगरौली में 10 दिन का कोयला बचा है। हरदुआगंज, जवाहरपुर, ओबरा, पनकी, पारीछा, घाटमपुर, खुर्जा सहित अन्य इकाइयों में 20 दिन का कोयला मौजूद है। नियमों के यहां जिन इकाइयों में पिट हेड (अंतिम स्थल ) तक कोयला पहुंचता है तो वहां न्यूनतम 10 दिन और जहां नॉट पिट हेड है वहां 20 दिन का कोयला रखा जाता है। जाहिर है कि यूनिटों में कोयला मौजूद है। विभागीय जानकारों का कहना है कि यदि यूनिट में कोयला भीगा है तो यह प्रबंधकीय चूक है।

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अन्य वर्षों से कम है मांग, फिर भी फजीहत

प्रदेश में सितंबर माह के अन्य वर्षों की बिजली अधिकतम मांग देखी जाए तो अभी आंकड़ा काफी कम है। इसके बाद भी प्रदेश में बिजली को लेकर हाहाकार मची है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा इसे प्रबंधकीय लापरवाही बताते हैं। उनका तर्क है कि पिछले साल सितंबर माह में अधिकतम मांग को ध्यान में रखकर इस वर्ष भी रणनीति बनानी चाहिए थी, जो नहीं की गई। पिछले वर्ष की अपेक्षा करीब पांच हजार मेगावाट कम मांग है। फिर भी उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल पा रही है।

आपूर्ति बहाली की रणनीति बनाने में जुटा ऊर्जा प्रबंधन

प्रदेश में कोयला भीगने की वजह से प्रभावित हो रहे बिजली उत्पादन से निपटने के लिए ऊर्जा प्रबंधन जुट गया है। सोमवार को ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. आशीष कुमार गोयल की अध्यक्षता में समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि कोयला खदान क्षेत्रों में भारी बारिश हुई है। पानी भरने और कोयला भीगने की वजह से प्रदेश को भरपूर कोयला नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई विद्युत संयंत्रों को कम क्षमता पर चलाना पड़ रहा है अथवा कुछ इकाइयों को बंद करना पड़ा है। फिर भी इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से 10 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीद कर उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है। एनसीएल क्षेत्र की जयंत कोल माइंस में कोल साइलो गिरने से भी कोयला आपूर्ति बाधित हुई है। 

विभागीय अधिकारियों ने दावा किया कि सितंबर 2025 में देश में अधिकतम विद्युत मांग लगभग 240 गीगावाट थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर करीब 269 गीगावाट हो गई है। कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। नेपाल से पहले एक्सचेंज के माध्यम से विद्युत उपलब्ध होती थी। हालांकि अब वहां स्थिति सामान्य हो रही है। रात में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। अगले दो से तीन दिन में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर इकाई के शुरू होने से करीब 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। 

अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने और बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात में करीब 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बहाल की जाए। बैठक में उत्पादन निगम एवं पारेषण निगम के प्रबंध निदेशक मयूर महेश्वरी, पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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