कई बार लोग नहीं चाहते कि आप आवाज उठाएं। आपकी आवाज हर प्लेटफॉर्म पर दबाई जाती है। सोशल मीडिया पर आपको बहुत कुछ सुनने पढ़ने को मिलने लगता है, लोग आपकी बातों से कंट्रोवर्सी खड़ी करने में जुट जाते हैं। मकसद सिर्फ एक कि आपकी आवाज दबाई जाए।
अगर आपको लगता है कि बच्चों, महिलाओं से हिंसा और उनका शोषण देखकर आवाज उठानी चाहिए तो बेशक उठानी होगी। हम कलाकार हैं, एक बड़े वर्ग तक कलाकार की कला की पहुंच होती है, तो वो वर्ग आपकी भी हर आवाज हर उस मुद्दे पर सुनना चाहता है, जिससे वो जुड़ा हो।
लखनऊ में एक निजी समारोह में पहुंचीं अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने उनको लेकर खड़े होने वाले विवादों पर पूछे गए एक सवाल पर ये जवाब दिया। सोशल मीडिया पर तस्वीरों और अपना पक्ष रखने पर अक्सर विवादों में घिरने वाली अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें जब भी लगता है कि किसी मुद्दे पर आवाज उठाकर, लिखकर या तस्वीरों से वो कुछ संदेश दे सकती हैं तो वो पीछे नहीं हटतीं। बिहार से भी जुड़ाव रखने वाली ऋचा ने कहा कि इन दिनों देखिए कि बिहार में मासूमों की जान जा रही है और सिस्टम ऐसा है कि बस देख रहा है।
देशवासियों के टैक्स पर रहने वाले अधिकारी मंत्री उन मासूमों के लिये कुछ नहीं कर रहे। खुद को कोई दिक्कत होगी, बच्चों को पढ़ाई करनी होगी तो लोग विदेश चले जाते हैं। न सरकारी स्कूलों में जाएंगे न ही सरकारी अस्पतालों में, लेकिन यहां का सिस्टम ऐसा बना दिया है कि उसके भरोसे नहीं रहते। वेब सीरीज के ईजाद को बढ़िया बताने वाली ऋचा का कहना है कि वेब सीरीज दर्शकों के बीच उभरे एक खाली स्थान को पूरा करती है।
अदब और तहजीब तो लखनऊ में ही..
कुछ समय पूर्व लखनऊ में मूवी की शूटिंग कर चुकीं ऋचा ने बताया कि अदब और तहजीब तो लखनऊ में ही दिखती है। लखनऊ का एक किस्सा याद करते हुए बताया कि लखनऊ में ही लोग उन्हें पिछले दौरे पर कई जगह कहते मिल गए कि ‘अगर आपको बुरा न लगे तो क्या मैं आपके साथ एक सेल्फी क्लिक कर सकता हूं।’ इतनी तहजीब से सेल्फी के लिए सिर्फ लखनऊ ही कह सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का डर नहीं रहता है कि उनके किसी मूव या बयान से उनके कॅरिअर को नुकसान होगा। कॅरिअर भगवान बनाते हैं, भगवान के बनाए इंसान नहीं।