लॉकडाउन की अनदेखी कर रहे लखनऊ वालों पर प्रधानमंत्री मोदी जी की अपील का व्यापक असर पड़ा। यही वजह रही कि बुधवार दिनभर लोगों ने खुद को घरों में कैद रखा। सुबह कुछ देर के लिए दूध, सब्जी और दवाएं लेने के लिए निकले, लेकिन कहीं भी आपाधापी नहीं दिखी। खरीददारी कर लोग घर को लौट गए। इक्का-दुक्का लोगों के अलावा पूरा दिन सड़कें सूनी रहीं और मुहल्लों में शांति छाई रही। पार्कों में भी बच्चों का शोर नहीं गूंजा। हालांकि, अकारण बाहर निकलने वालों पर पुलिस ने हल्का बलप्रयोग किया।
सूनी रहीं सड़कें, बाहर निकले तो पुलिस ने किया बल प्रयोग, एफआईआर-चालान का भी रहा डर, तस्वीरें
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कोरोना वायरस से निपटने के लिए मंगलवार रात प्रधानमंत्री की 21 दिन के लॉकडाउन की अपील बुधवार को लखनऊ में काफी कारगर साबित हुई। लोगों ने खुले दिल से लॉकडाउन का समर्थन किया और घरों में ही रहे। इस दौरान बाजार पूरी तरह से बंद रहे। गलियों में परचून की दुकानें और पान, सिगरेट, गुटखा की गुमटियां तक नहीं खुलीं। सब्जी मंडियां भी बंद थीं। सिर्फ गलियों में सब्जियों और फलों के कुछ ठेले दिखे जहां ग्राहकों को डेढ़ से दो गुना कीमत में सामग्री बेची जा रही थी।
नवरात्र के पहले दिन के चलते सुबह सात से नौ बजे तक जरूर कुछ लोग घरों से निकले और दूध, सब्जी, फल, पूजा का सामान, दवाएं व अन्य जरूरी सामान की खरीददारी की। इसके बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर गया।
पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भ्रमण कर शहर के हालात की जानकारी लेते रहे। हजरतगंज, गोमतीनगर, महानगर, निरालानगर, अलीगंज, विभूतिखंड जैसे वीआईपी और पॉश इलाकों में लोगों ने कोरोना वायरस से लड़ने में पूरी जिम्मेदारी से साथ दिया और घर पर ही रहे।
अमीनाबाद, वजीरगंज, कैसरबाग, चौक, सआदतगंज और नाका जैसे पुराने और घने बसे इलाकों में भी बीते दिन की तुलना में लोगों की काफी कम आवाजाही रही।
रंग लाई पुलिस की तैयारी
लॉकडाउन के दौरान लोगों की आवाजाही रोकने के लिए पुलिस की तैयारियां बुधवार को रंग लाईं। शहर के हर प्रमुख मार्गों और चौराहों पर बैरीकेडिंग पर पुलिसकर्मी तैनात थे और सीतापुर, हरदोई, रायबरेली, उन्नाव समेत अन्य बार्डर पूरी तरह से सील थे। इससे दिनभर आवागमन ठप रहा।
बीते दो दिन के दौरान बेवजह घूमने वालों पर एफआईआर, चालान और वाहन सीज करने की कार्रवाई का भी लोगों में खौफ था। इसलिए बुधवार को ज्यादातर लोग बाहर नहीं निकले।