श्मशान घाटों पर शवों की संख्या कम नहीं हो रही है। रविवार को यह आंकड़ा बढ़कर 210 पहुंच गया। माना जा रहा है कि आधे से अधिक शव कोरोना संक्रमित लोगों के हैं। शवों के बढ़ते आंकड़े उन लोगों को भी थकाने और डराने लगे हैं जो अंतिम संस्कार के काम में लगे हैं। वहीं, कब्र खोदने वाले भी कम पड़ गए हैं। खोदाई का रेट भी तिगुना हो गया है।
लखनऊ: श्मशान पर कम नहीं हो रही शवों की संख्या, कब्र खोदने वाले पड़ गए कम, तिगुना हुआ खोदाई का रेट
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शवों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है, जिसकी गवाही श्मशान घाटों पर बढ़ रहे अंतिम संस्कार स्थल भी दे रहे हैं। रविवार को बैकुंठधाम और गुलाला घाट पर रात सात बजे तक 210 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। उनमें सबसे अधिक 110 संक्रमित शव माने जा रहे हैं। वहीं शनिवार को अंतिम संस्कार के लिए शहर के दो श्मशान घाटों पर रात आठ बजे तक 206 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे थे।
सामान्य शव भी चार गुना अधिक
सामान्य दिनों में जहां दोनों घाटों पर रोज 25 से 30 शव ही आते थे, वहीं कोरोना संक्रमण के बाद सामान्य शवों की संख्या चार गुना तक बढ़ गई है। ऐसे में संक्रमण बढ़ने के साथ ही अचानक बढ़ी सामान्य शवों की संख्या को लेकर भी कई तरह के सवाल अंतिम संस्कार का काम करने वालों के मन में हैं।
कई मानते हैं कि जो सामान्य शव आ रहे हैं, उनमें आधे संक्रमित वाले ही होंगे, क्योंकि जांच और इलाज पर जो संकट है, उससे संक्रमित होने की बात साफ नहीं हो पा रही है।
टिकठी बनाने का काम भी शुरू
बैकुंठधाम पर अंतिम संस्कार के लिए अब कई लोग बाहर सड़क पर टिकठी बनाने का काम भी करने लगे हैं। अभी तक यह डालीगंज या निशातगंज में ही बनती थी। बाहर से आने वाले शवों को देखते हुए अब अंतिम संस्कार का काम करने वाले बैकुंठधाम के बाहर भी टिकठी बना रहे हैं।
गमजदा परिवार के लोग खुद साथ लेकर आ रहे कब्र खोदने वाले मजदूर
यह विडंबना ही है कि एक तरफ बैकुंठधाम, गुलाला घाट पर शवों का दाह संस्कार चुनौती बन गया है, वहीं शहर के कब्रिस्तान में कब्र खोदने वाले कम पड़ रहे हैं। ऐशबाग, सुप्पा, निशातगंज, सर्वोदय नगर, गंजे शहीदां उजरियांव (गोमतीनगर) कब्रिस्तान का संचालन करने वाली कमेटी अंजुमन इस्लाहुल मुसलमिन के पदाधिकारियों का कहना है कि महामारी के दौर में शवों की बढ़ती संख्या के कारण बाहर से मजदूर किराए पर लाने पड़ रहे हैं और हालात ऐसे भी हैं कि गमजदा परिवार को खुद मजदूर लाने पड़ रहे हैं। खोदाई का रेट भी तिगुना देना पड़ा रहा है। इसके अलावा कब्रिस्तानों की सफाई व सैनिटाइजेशन की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, इसके लिए समिति ने नगर निगम से मदद मांगी है।
समिति के संयुक्त सचिव मुशर्रफ हुसैन का कहना है कि सामान्य दिनों में ऐशबाग कब्रिस्तान में 5 से 6 मय्यत आती थीं, अप्रैल में प्रतिदिन आने वाली मय्यतों का औसत 30-35 है। इसमें से 4-5 कोरोना संक्रमित होते हैं। इसी तरह सुप्पा कब्रिस्तान बुलाकी अड्डा में सामान्य दिनों में एक या दो मय्यत दफन होने आती थीं, लेकिन मौजूदा वक्त में ये संख्या 12-15 हो गई है। यही स्थिति क्रमश: अन्य कब्रिस्तान की है। पहले एक कब्र खोदने के लिए 500 रुपये देने पड़ते थे, अब 1200 से 1500 रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है।