अपने स्वार्थ में एक मां इस कदर अंधी हो गई कि जिगर के टुकड़े को 60 हजार रुपये में बेच दिया। उसके इस काम में मददगार बना उसका पड़ोसी। भाई की याद में उसकी पांच साल की बच्ची घुट-घुट कर मर गई। बेटी की मौत के बाद उसका जमीर जागा और उसने बेटे को बेचे जाने की बात स्वीकार की। उसे पड़ोसी संग गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बच्चे को बिकवाने में मददगार बनी एक अन्य महिला को पुलिस तलाश रही है।
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मां की गोद में ओम
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इंस्पेक्टर सुजीत कुमार दुबे ने बताया कि बाजारखाला के मोहल्ला पुराना हैदरगंज में अनिल उर्फ अजय गुप्ता अपनी दूसरी पत्नी पायल, बेटी मेघा (5) और सात माह के बेटे ओम के साथ रहता था। वह एक निजी बैंक में चपरासी था,लेकिन बीमारी के चलते उसकी नौकरी छूट गई। इसके बाद अजय घर पर बच्चों की देखभाल व छोटे-मोटे काम करता और पायल आसपास के घरों में काम करके घर का खर्च चलाती थी।
वह दुधमुंहे ओम को अक्सर राजाजीपुरम में अपनी मां के पास छोड़ आती थी और काम से लौटते वक्त लेती आती थी। 18 मार्च को वह खाली हाथ घर लौटी। इसके बाद तीन दिन तक बेटे को न लाने पर अजय ने पूछताछ की। पायल ने झगड़ने के साथ उस पर बेटे को गायब करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
अनिल का कहना है कि पांच साल की मेघा अपने छोटे भाई की देखभाल करती थी। ओम से बिछड़ने पर वह रोती रहती थी। इसके चलते बीमार पड़ गई। बच्ची की हालत देखकर अनिल ने पायल पर बच्चे को गायब करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने दोनों के आरोपों की जांच के लिए छानबीन शुरू की तब पायल का सच सामने आया।
भाई को याद करते-करते मासूम मेघा को बृहस्पतिवार को तेज बुखार चढ़ा। तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां शुक्रवार रात उसकी मौत हो गई। नातिन की मौत की खबर मिली तो पायल की मां गीता अपनी एक दूसरी बेटी के साथ आई। ओम के बारे में पूछा, कोई जवाब न मिलने पर पायल को फटकारा, चांटा जड़ा, तब उसने बेचे जाने की बात बताई। कुबूल किया कि पड़ोसी आशुतोष उर्फ अंशु गुप्ता और उसकी बहन रुचि की मदद से दुधमुंहे बेटे को फतेहपुर के किशन बाबू को 60 हजार रुपये में बेचा था।