पैदल...। ट्रकों में...। बसों में...। और जुगाड़ के वाहनों पर भी। वो चले जा रहे हैं। पैरों में छाले हैं। खाने के लाले हैं। दिल में दर्द है। आहें हैं तो कदम भी भारी हैं। फिर भी एक ही सपना है। एक ही मंजिल है। अपने घर पहुंच जाएं। क्यों? पूछने पर हर चेहरे से एक ही जवाब ...। एक ही शिकायत-जिन दरख्तों को अपने पसीने से सींचा। अपनी जान लगा दी। मुश्किल हालात में वे दरख्त बेगाने हो गए। ऐसी बेरुखी! टीस तो होगी ही। पर, रो भी नहीं सकते। कोई अपना दर्द समझने वाला भी तो हो। हम घर जा रहे हैं। क्योंकि वहां मां होगी। अपने होंगे। बस उन्हीं के कांधे पर सिर रखकर रो लेंगे। अपनी मिट्टी की खुशबू हर जख्म को भर देगी। इसलिए मुझे घर जाना है... चलते जाना है...
राजधानी की सड़कों पर प्रवासियों की भीड़ उमड़ने का सिलसिला जारी है। ऐसे में राजधानी पुलिस लॉकडाउन की व्यवस्था भूलकर बाहर से आने वाले मजदूरों में उलझ गई है। अधिकारियों ने दूर-दराज से पैदल, साइकिल या अन्य साधनों से आ रहे मजदूरों को राजधानी में प्रवेश कराए बगैर आगे भेजने में पूरी ताकत झोंक दी है। रविवार को सुबह से शाम तक कानपुर रोड पर बंथरा बार्डर और काकोरी के एक्सप्रेस वे स्थित टोल प्लाजा पर पुलिस की टीम मजदूरों को ट्रकों-टैंकर व अन्य साधनों से गंतव्य स्थल तक भेजने में व्यस्त रही। पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने बताया कि रविवार को बाहर से पैदल, साइकिल अथवा अन्य साधनों से हजारों मजदूरों के राजधानी पहुंचने का सिलसिला जारी था। अधिकतर मजदूर कानपुर और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे से राजधानी की तरफ आ रहे हैं।
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पैदल ही चल पड़े अपनी मंजिल की ओर।
- फोटो : amar ujala
हजारों की संख्या में आने वाले इन मजदूरों में संक्रमण की आशंका के चलते इन्हें राजधानी के बाहर के रास्तों से ही आगे भेजने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि बंथरा बार्डर और काकोरी टोल प्लाजा पर पुलिस अधिकारियों की टीमें मजदूरों के लिए व्यवस्था सुनिश्चित करा रही हैं। मजदूर भूखे-प्यासे हैं इसलिए उनके खाने-पीने का भी इंतजाम कराया जा रहा है। रविवार रात पुलिस आयुक्त और उनकी पत्नी ने काकोरी टोल प्लाजा पर अपनी तरफ से 200 मजदूरों के लिए खाना बनवाकर वितरित कराया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि मजदूरों को एक्सप्रेस वे से आने वाले ट्रकों-टैंकर्स सहित दूसरे भारी वाहनों में बैठाकर गृह जनपद भेजा जा रहा है।
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उन्हें जो भी वाहन मिला वो उससे चले जा रहे हैं।
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उधर, शहर में लॉकडाउन की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। अभी तक वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग भी अब कहीं नजर नहीं आ रही। पुलिस आयुक्त का कहना है कि कई निजी व सरकारी कार्यालय और औद्योगिक इकाइयों के खुलने से लोगों की आवाजाही बढ़ी है। इस आवाजाही को रोका नहीं जा सकता, लेकिन नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने अपना पूरा ध्यान हॉटस्पॉट और बाहर से आने वाले मजदूरों को घर तक पहुंचाने में केंद्रित कर रखा है।
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बिहार की ओर निकल पड़े।
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बाइक से ठेलिया का जुगाड़ बनाकर मुंबई से आए मजदूर अयोध्या राजमार्ग से होकर बिहार की ओर निकले।