कोरोना के संकटकाल में नर्सिंगकर्मी मरीजों की सेवा का व्रत पूरा करने में पूरी शिद्दत से जुटे हैं। कोई वार्ड में जिम्मेदारी निभा रहा है तो कोई व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटा है। विश्व नर्सेज दिवस पर अमर उजाला ने इनसे बात की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश:
मरीजों की सेवा का व्रत पूरा करने में जुटे नर्सिंगकर्मी, बोले- शपथ पूरी करने का मौका मिला
...ताकि सेवा का भाव बना रहे
केजीएमयू की सहायक नर्सिंग अधीक्षक विलियम विनीता वायलेट कहती हैं कि कोरोना का कार्यकाल ताउम्र याद रहेगा क्योंकि इस वक्त नर्सेज की ड्यूटी लगाना, उपस्थिति बनाना, रोस्टर तैयार करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि टीम बिखरे नहीं। टीम के हर सदस्य राजी खुशी वार्ड में ड्यूटी निभाते रहें। उनमें किसी तरह का नकारात्मक भाव उत्पन्न न हो। अब तक का प्रयास सार्थक रहा है।
घर व अस्पताल के बीच संतुलन जरूरी
केजीएमयू नर्सेज संघ की अध्यक्ष यदु नंदिनी सिंह कहती हैं कि घर और अस्पताल के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है लेकिन वे इस चुनौती को स्वीकार करती हैं और अभी तक कामयाब हैं। उनके पति डॉक्टर हैं। ऐसे में पति-पत्नी दोनों मरीजों की सेवा में जुटे हैं। घर की चिंता रहती है, लेकिन यह चिंता मरीजों की सेवा में आड़े नहीं आ रही है। ज्यादा से ज्यादा मरीज ठीक होकर घर जाएं यही हमारी कामयाबी होगी।
असावधानी हो सकती है जानलेवा
केजीएमयू के वार्ड मास्टर दीपक सिंह की जिम्मेदारी इन दिनों स्क्रीनिंग और होल्डिंग एरिया में है। यहां आने वाले मरीज के बारे में यह नहीं पता होता है कि वह पॉजिटिव है या निगेटिव। ऐसे में जरा सी असावधानी संकट में डाल सकती है। लेकिन वह पूरी तत्परता से ड्यूटी निभा रहे हैं। उनका कहना है कि इस ड्यूटी के बहाने पढ़ाई के दौरान ली गई शपथ पूरी करने का मौका मिला है।
नर्सिंग सेवा और समर्पण दिला रहा पहचान
रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर सत्येन्द्र कुमार का कहना है कि कोरोना के दौर में किए गए कार्य से बनी पहचान ताउम्र काम आएगी। इसी को सूत्र मानकर पति पत्नी दोनों मरीजों की सेवा में जुटे हैं। विभाग में मरीजों की देखरेख के साथ ऑक्सीजन सप्लाई, बिजली, पानी व साफ-सफाई आदि सुनिश्चित कराना भी उनकी जिम्मेदारी है। केजीएमयू में ही उनकी पत्नी भी सिस्टर पद पर कार्यरत हैं। दोनों की ड्यूटी जब एक ही समय पर होती तो बच्चों को लेकर काफी परेशानी होती है, लेकिन कोई न कोई रास्ता निकाल लेते हैं।