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UP: 'रैली के लिए भाड़े पर लोगों को नहीं बुलाया, ये खुद आये हैं...' भारी भीड़ से उत्साहित जमकर गरजीं मायावती
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 09 Oct 2025 01:24 PM IST
सार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ के कांशीराम स्थल पर आयोजित रैली में समर्थकों की भारी भीड़ देखकर उत्साहित नजर आईं। इस दौरान उन्होंने सपा-कांग्रेस व भाजपा पर जमकर निशाना साधा।
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बसपा की रैली में मायावती।
- फोटो : amar ujala
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर बृहस्पतिवार को महारैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सपा-कांग्रेस और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस रैली ने पहले हुई सभी रैलियों को पीछे छोड़ दिया। रैली में आए लोगों को भाड़े पर नहीं लाया गया है। ये लोग अपने आप आए हैं। अपने खून-पसीने की कमाई खर्च करके आए हैं।
इस दौरान उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आपको मालूम है कि कांशीराम जी के सम्मान में बने इस स्थल के कुछ हिस्सों की मरम्मत ना होने से लोग अपने पुष्प कांशीराम जी को अर्पित नहीं कर पा रहे थे। आज आपने भीड़ के मामले अपना खुद का सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए कांशीराम जी को श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे जिसकी पार्टी आभारी है। हम राज्य सरकार के आभारी हैं क्योंकि यहां आए लोगों के टिकट का पैसा पूर्व की सपा सरकार की तरह दबा के रखने की जगह बसपा पार्टी के कहने पर यहां मरम्मत के लिए खर्च किया है।
उन्होंने कहा कि ये हमने व्यवस्था की थी के यहां आए लोगों के टिकट से मिला पैसा यहां रख रखाव पर खर्च किया जाएगा। सपा ने ये पूरा पैसा दबा के रखा, बाकी स्थलों, पार्कों की हालत खराब हो गई थी, तब मैंने यूपी के सीएम को लिखा, चिट्ठी लिखी कि भले ही दूसरी मद का पैसा यहां ना लगाओ लेकिन टिकट का जो पैसा जमा है उससे मरम्मत करवाओ। फिर भाजपा सरकार ने मुझे वादा किया के हम टिकट का पैसा मरम्मत में लगवाएंगे। सपा ने यहां का पैसा दबाया, मरम्मत नहीं कराई और कांशीराम जी के सम्मान में संगोष्ठी की बात कर रहे लेकिन जब वो सरकार में रहते हैं तो ना पीडीए याद आता है, ना कांशीराम जी।
सपा मुखिया अखिलेश यादव जी से पूछना चाहती हूं के कांशीराम जी का इतना सम्मान था तो उनके नाम पर रखे कासगंज का जिले का नाम उन्होंने क्यों बदल दिया? उनके नाम पर चल रही सारी योजना बंद करना इनका दोगला चरित्र है या क्या है। सत्ता में रहते इन्हें पीडीए याद नहीं आता ऐसे दोगले लोगों से आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है।
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रैलीस्थल पर जुटे समर्थक।
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि कांशीराम जी ने बाबा साहब के अधूरे कारवां को पूरा करने में अपना जीवन लगा दिया। बाबा साहब ने कहा था के सत्ता की मास्टर चाभी हमें अपने हाथ में लेनी है। कांशीराम जी के देहांत से पहले उनकी दिली तमन्ना थी के दलितों की संख्या के हिसाब से यहां उन्हें एकजुट होकर अपनी खुद की सरकार बनानी चाहिए। दुख की बात है के उनके जीते जी ये सपना पूरा नहीं हो सका था। मेरे और मेरे परिवार को जानबूझकर फर्जी केस में फंसा कर छवि धूमिल करने का प्रयास किया था। हमारी इकलौती सरकार बनाना सपा, भाजपा, कांग्रेस किसी को अच्छा नहीं लगा। हमारी पार्टी की रही सरकार ने दलितों और उपेक्षितों का ध्यान रखा, आरक्षण का लाभ दिया।
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- फोटो : amar ujala
मायावती ने कहा कि हमारी सरकार ने जाति और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कानून व्यवस्था के लिए काम किया। अन्याय, अपराध और भयमुक्त वातावरण हमने बनाया था। केंद्र की सरकार की तरह हमने इन्हीं के टैक्स के पैसे से इन्हें थोड़ा मुफ्त का राशन देकर अपना गुलाम नहीं बनाया है। समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक स्वार्थ में जबरन पीडीए करके इन्हें गुमराह करने में लगी है। हमारे महापुरुषों के सम्मान में बनी योजना सपा सरकार ने बंद कर दी थी। इमरजेंसी के वक्त कांग्रेस ने बाबा साहब के बनाए संविधान को प्रभावहीन बनाने वाली पार्टी के लोग संविधान हाथ में लेकर किस्म किस्म की नौटंकी करते हैं। इन्होंने कभी बाबा साहब को भारत रत्न नहीं दिया। ना कांशीराम जी के देहांत पर राष्ट्रीय शोक घोषित किया। मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं हुई थी।
अपने समर्थकों का आह्वान करते हुए मायावती ने कहा कि अब पार्टी की केंद्र और राज्य में सरकार लाना जरूरी है। यूपी में अपनी पार्टी बीएसपी की अकेले पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना है। बीएसपी के 2007 में अकेले सरकार में आने पर सभी जातिवादी पार्टियों को डर था के हम केंद्र तक पहुंच सकते हैं और उसी कारण उसके बाद हुए सभी चुनाव में कांग्रेस, बीजेपी और सपा सभी ने अंदर अंदर एकजुट होकर इन्होंने बीएसपी को जीतने नहीं दिया। रही सही कमी ईवीएम में की गई धांधली से इन्होंने पूरी कर दी जो कभी भी खत्म हो सकता है बैलेट वाला सिस्टम लागू हो सकता है।
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रैली में समर्थकों का अभिवादन करतीं मायावती।
- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि बीएसपी को कमजोर करने के लिए विरोधी पार्टियों ने दलित समाज से स्वार्थी और बिकाऊ किस्म के लोगों को इस्तेमाल कर पार्टी और संगठन बना दिए हैं। ऐसे लोगों के चक्कर में पढ़कर अपना एक भी वोट खराब नहीं करना है। पार्टी के लोगों को सचेत करने के लिए कहना चाहूंगी के दुनिया के कई देश किसी हिंसा में फंसे हैं, ऐसा माहौल देश में बनने से पहले केंद्र और राज्य सरकार ने उसे नियंत्रित किया है। एक दूसरे के देवी देवता और खुदा पर निकलने वाले नए नए मुद्दों की आड़ में बवाल करने की कोशिश ओर देश का माहौल खराब करना देश हित में नहीं है। सबको एक दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए, आई लव आदि की राजनीति भी नहीं होनी चाहिए। पहलगाम की घटना रोकी जा सकती थी अगर वहां सुरक्षा का उचित प्रबंध होता। हमारी विदेश नीति में जनहित होना चाहिए। देश को आत्म निर्भर बनाने की बात हवा हवाई ना हो तो हम भी इसका स्वागत करेंगे।
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