आपने रॉबिनहुड का नाम तो सुना होगा। अंग्रेजी लोककथाओं का वो हीरो जो अमीरों का पैसा लूटकर गरीबों में बांट देता था। उसी के नाम पर शुरू की गई एक स्वयंसेवी संस्था है रॉबिनहुड आर्मी। ये देश ही नहीं विदेशों में भी लाखों गरीबों का पेट भर रही है वो भी बिना एक भी पैसा खर्च किए। ऐसा कैसे हो रहा है, जानें आगे की स्लाइड्स में...
रॉबिनहुड आर्मी 2014 में दिल्ली के रहने वाले नील घोष और आनंद सिन्हा ने शुरू की थी। ये री-फूड प्रोग्राम पर आधारित है जिसमें बचे हुए खाने को उन जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाता है जो भूखे पेट ही सोने को मजबूर हैं। नील और आनंद की पहली फूड ड्राइव छह लोगों के साथ शुरू हुई जिसमें दिल्ली के 150 जरूरतमंदों को खाना दिया गया। आज रॉबिनहुड आर्मी 11 देशों और 40 शहरों में करोड़ों जरूरतमंदों का पेट भर रही है। रॉबिनहुड आर्मी एक साथ दो अच्छे काम कर रही है। एक तरफ खाने की बर्बादी नहीं हो रही दूसरी ओर ये खाना जरूरतमंदों को मिल रहा है।
कैसे काम करती है रॉबिनहुड आर्मी: रॉबिनहुड आर्मी से जुड़े युवा आपके और हमारे बीच के ही यूथ्स हैं, इन्हें रॉबिन्स कहा जाता है। ये रॉबिन्स शहर के बड़े होटल और रेस्टोरेंट से बचा हुआ खाना लेते हैं और ये खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं।
रॉबिन्स की फूड ड्राइव ज्यादातर संडे को रखी जाती है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंच सकें। लखनऊ में ये इनीशिएटिव मई 2017 में शुरू किया गया है। यहां अब तक कुल 1, 07,463 लोगों को खाना खिलाया जा चुका है। लखनऊ में अब तक 116 लोग इस आर्मी से जुड़ चुके हैं।
लखनऊ में हर संडे करीब 250 लोगों को खाना दिया जाता है और हर रात रेस्टोरेंट्स से एक्स्ट्रा खाना लेकर भी गरीबों को दिया जाता है। इस तरह से रॉबिनहुड आर्मी हर हफ्ते औसतन 1500 जरूतमंदों को खाना खिलाती है।