लखनवी तहजीब, ऐतिहासिक धरोहरें और अवधी जुबां की कहानी है ‘जॉली एलएलबी-2’। शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म की कहानी भले ही दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल होती नजर न आ रही हो पर, फिल्म में लखनऊ अवधी डायलॉग और पान की मिठास दर्शकों का दिल खुश कर देती है। सुभाष कपूर निर्देशित फिल्म की अधिकांश शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई है। इसलिए फिल्म रिलीज होने के बाद लखनऊ में लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
मल्टीप्लेक्स से लेकर सिंगल स्क्रीन थिएटर तक पर पहले दिन भीड़ रही। दरअसल, फिल्म में नवाबों के आशियाने ‘छतर मंजिल’ को न्यायालय में ढाला गया है। यहीं से फिल्म शुरू होती है। यह वही ऐतिहासिक भवन है, जहां तहखानों में नावें चलती थीं। मुख्य किरदार जगदीश्वर मिश्र जॉली(अक्षय कुमार) मूलरूप से कानपुर निवासी है, लेकिन लखनऊ में रहते हैं। इसलिए जुबां में अवधी व कनपुरिया अंदाज दिखता है। वहीं दूसरे किरदार जस्टिस सुंदरलाल त्रिपाठी(सौरभ शुक्ला), एडवोकेट माथुर(अन्नू कपूर), पुष्पा पांडेय(हुमा कुरैशी) के डॉयलाग में अवधी का टच दर्शकों को पसंद आता है। ठेठ देसी स्टाइल के संवादों पर थिएटर में तालियां भी बजती हैं।
फिल्म में लखनवी तहजीब के साथ-साथ रहनसहन व खानपान, विशेष रूप से लखनवी पान किरदारों की जुबां पर चढ़ा रहता है। नवाबियत के दौर में इस्तेमाल होने वाले पानदानों का इस्तेमाल किया गया है। अक्षय कुमार से लेकर एडवोकेट माथुर व अन्य किरदारों के होठ लखनवी पान से रंगीन नजर आते हैं।
फिल्म में अक्षय कुमार को गोली मारी जाने वाले सीन पर मासूम प्रिंस अनायास कह उठा कि ‘मम्मी, ये तो हमारा नॉवेल्टी चौराहा है’। सीन नॉवेल्टी चौराहे पर फिल्मा गया। ऐसे ही फिल्म में छतर मंजिल, लोहिया पथ, इंदिरा डैम, रेजीडेंसी, जहांगीराबाद पैलेस, कलेक्ट्रेट, नॉवेल्टी चौराहे आदि जगहों पर शूटिंग हुई है।
अन्नू कपूर का अक्षय कुमार से यह कहना कि ‘मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं...’ दर्शकों को काफी पसंद आया। ऐसे ही जब अन्नू कपूर कहते हैं कि ‘यह लखनऊ है, यहां तू-तड़ाक नहीं चलती’ व ‘लखनऊ में चिकन खाया भी जाता है और पहना भी। लेकिन खाने वाला चिकन पहना तो इज्जत खराब होती है और पहनने वाला चिकन खाया तो पेट...’ पर खूब तालियां बजती हैं।