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Lucknow News: 84 साल के नाना को दुल्हन की तलाश
Mon, 14 Sep 2026 02:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 14 Sep 2026 02:49 AM IST
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लखनऊ। करोड़ों की संपत्ति और दो मंजिला मकान होने के बावजूद 84 वर्षीय नाना को जिंदगी में एक साथी की कमी खल रही थी। कोविड के दौरान पत्नी का साथ छूटा तो बेटों ने भी किनारा कर लिया। मध्य प्रदेश के विदिशा से नाना अपने नाती के साथ लखनऊ पहुंचे। मकसद था उम्र की दूसरी पारी के लिए हमसफर तलाशना। मौका था अनुबंध संस्था की ओर से पारा के एक बरातघर में आयोजित वरिष्ठ नागरिक जीवनसाथी परिचय सम्मेलन का।
सम्मेलन में 50 से 80 वर्ष की उम्र के 90 बुजुर्ग पहुंचे। इनमें 75 पुरुष और सिर्फ 15 महिलाएं थीं। तलाकशुदा, अविवाहित और जीवनसाथी खो चुके बुजुर्गों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किए।
30 साल अकेले काटे, अब चाहिए साथ
दिल्ली की 55 वर्षीय महिला पति की मौत के बाद करीब 30 साल से अकेली रह रही हैं। बेटे बड़े हुए तो अलग रहने लगे। अब जिंदगी की ढलती शाम में किसी ऐसे साथी की तलाश है, जिसके साथ बैठकर दो बातें की जा सकें। वह दोस्त के साथ सम्मेलन में पहुंचीं और कई लोगों से मुलाकात की। बताया कि पास बैठकर कोई बात सुनने वाला हो तो जिंदगी आसान हो जाती है।
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मां-बाप की सेवा में बीती उम्र
प्रयागराज से आई महिला ने बताया कि बूढ़े मां-बाप की सेवा में उम्र बीत गई। पिता ने कुछ संपत्ति उनके नाम की तो भाइयों ने दूरी बना ली। कुछ माह पहले गंभीर बीमारी हुई लेकिन हाल पूछने वाला कोई नहीं था। अस्पताल में अकेलेपन ने उन्हें साथी की जरूरत का एहसास कराया। बताया कि दूसरे प्रदेशों में हुए सम्मेलन में जा चुकी हैं पर तलाश पूरी नहीं हुई।
बर्दाश्त नहीं होती अपनों की अनदेखी
उन्नाव के 67 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी को 42 हजार रुपये पेंशन मिलती है। बेटियों की शादी हो चुकी है। घर-जमीन और लखनऊ में मकान भी है लेकिन परिवार की उपेक्षा से अकेलापन भारी पड़ रहा है।
समाज की बंदिशें रोक रहीं महिलाओं का रास्ता
महिलाओं की कम संख्या पर संस्था पदाधिकारियों ने कहा कि सामाजिक सोच और बंदिशें उन्हें इस उम्र में दोबारा रिश्ता बनाने से रोकती हैं। अध्यक्ष नटूभाई पटेल, सचिव किन्नारी लखानी और अरिहंत राय जैन ने बताया कि लखनऊ में संस्था का यह पहला सम्मेलन था। इसके साथ ही संस्था के आयोजनों की संख्या 100 हो गई।
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सम्मेलन में 50 से 80 वर्ष की उम्र के 90 बुजुर्ग पहुंचे। इनमें 75 पुरुष और सिर्फ 15 महिलाएं थीं। तलाकशुदा, अविवाहित और जीवनसाथी खो चुके बुजुर्गों ने एक-दूसरे से मुलाकात की और अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किए।
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30 साल अकेले काटे, अब चाहिए साथ
दिल्ली की 55 वर्षीय महिला पति की मौत के बाद करीब 30 साल से अकेली रह रही हैं। बेटे बड़े हुए तो अलग रहने लगे। अब जिंदगी की ढलती शाम में किसी ऐसे साथी की तलाश है, जिसके साथ बैठकर दो बातें की जा सकें। वह दोस्त के साथ सम्मेलन में पहुंचीं और कई लोगों से मुलाकात की। बताया कि पास बैठकर कोई बात सुनने वाला हो तो जिंदगी आसान हो जाती है।
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मां-बाप की सेवा में बीती उम्र
प्रयागराज से आई महिला ने बताया कि बूढ़े मां-बाप की सेवा में उम्र बीत गई। पिता ने कुछ संपत्ति उनके नाम की तो भाइयों ने दूरी बना ली। कुछ माह पहले गंभीर बीमारी हुई लेकिन हाल पूछने वाला कोई नहीं था। अस्पताल में अकेलेपन ने उन्हें साथी की जरूरत का एहसास कराया। बताया कि दूसरे प्रदेशों में हुए सम्मेलन में जा चुकी हैं पर तलाश पूरी नहीं हुई।
बर्दाश्त नहीं होती अपनों की अनदेखी
उन्नाव के 67 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी को 42 हजार रुपये पेंशन मिलती है। बेटियों की शादी हो चुकी है। घर-जमीन और लखनऊ में मकान भी है लेकिन परिवार की उपेक्षा से अकेलापन भारी पड़ रहा है।
समाज की बंदिशें रोक रहीं महिलाओं का रास्ता
महिलाओं की कम संख्या पर संस्था पदाधिकारियों ने कहा कि सामाजिक सोच और बंदिशें उन्हें इस उम्र में दोबारा रिश्ता बनाने से रोकती हैं। अध्यक्ष नटूभाई पटेल, सचिव किन्नारी लखानी और अरिहंत राय जैन ने बताया कि लखनऊ में संस्था का यह पहला सम्मेलन था। इसके साथ ही संस्था के आयोजनों की संख्या 100 हो गई।