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Lucknow News: हिंदी के रास्ते भारत की संस्कृति तक पहुंच रहे विदेशी छात्र

Mon, 14 Sep 2026 02:50 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 02:50 AM IST
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Foreign students are connecting with Indian culture through Hindi.
लखनऊ विश्वविद्यालय
अभिषेक सहज
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लखनऊ। हिंदी अब सिर्फ भारत की भाषा नहीं रह गई है। विदेशों के विद्यार्थी भी इसके जरिये भारतीय समाज, संस्कृति और साहित्य को समझ रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में श्रीलंका, जर्मनी और पोलैंड समेत कई देशों के विद्यार्थी हिंदी पढ़ रहे हैं। कोई प्रेमचंद की कहानियों में भारतीय समाज तलाश रहा है तो कोई जयशंकर प्रसाद के साहित्य से इतिहास और संस्कृति को समझ रहा है। कई विद्यार्थी हिंदी में शोध भी कर रहे हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय में 171 विदेशी विद्यार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे हैं।
हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में श्रीलंका के कई विद्यार्थी पीएचडी कर रहे हैं। श्रीलंका के आनंद अबेसुंदर हिंदी और सिंहली साहित्य की प्रमुख लेखिकाओं के उपन्यासों में स्त्री चेतना पर शोध कर रहे हैं। वे श्रीलंका में हिंदी के प्राध्यापक भी हैं। उनके लिए हिंदी भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक सेतु है।
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श्रीलंका की ही कांचना दी अल्विस हिंदी साहित्य पर बौद्ध संस्कृति के प्रभाव और मानव मुक्ति की परिकल्पना पर शोध कर रही हैं। उनका कहना है कि लखनऊ में तीन साल के दौरान साहित्य के साथ तहजीब वखानपान को भी जाना। प्रेमचंद की ‘पूस की रात’, धर्मवीर भारती की ‘गुनाहों का देवता’ व जयशंकर प्रसाद की रचनाओं ने भारतीय समाज को समझने में मदद की।
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श्रीलंका की कलणि विहंगा पनागोड भी हिंदी में पीएचडी कर रही हैं। हिंदी सिनेमा व बॉलीवुड के गीतों से प्रभावित होकर हिंदी सीखने वाली कलणि करीब चार साल भारत में रह चुकी हैं। वह हिंदी को दोनों देशों के बीच अपनत्व की डोर मानती हैं। पोलैंड की अन्ना हिंदी में एमए कर रही हैं। वह हिंदी के साथ मराठी, उर्दू और तमिल भी सीख रही हैं। उनका मानना है कि किसी संस्कृति और समाज की मानसिकता समझने के लिए उसकी भाषा जानना जरूरी है। अंजना मुतुमाली कहपलआरच्ची श्रीलंका में हिंदी की अध्यापिका हैं और लविवि से पीएचडी कर कर रही हैं। बताया कि श्रीलंका में 88 विद्यालयों और करीब पांच विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। हिंदी में भारत में ही नहीं पूरे विश्व में कॅरिअर के बहुत अवसर हैं।
जर्मनी के ओदमार बुएन भाषाविज्ञान, संस्कृत और दर्शनशास्त्र के साथ हिंदी सीख रहे हैं। उनके अनुसार हिंदी ने भारतीय संस्कृति और साहित्य की नई दुनिया खोल दी। लविवि में बीए के छात्र पोलैंड के ईवो भी फर्राटेदार हिंदी बोलते हैं। वह कहते हैं कि एक माह पहले लखनऊ आए लेकिन इतने कम समय में ही हिंदी और शहर से प्रेम हो गया।


कुलपति प्रो. जेपी सैनी के अनुसार विदेशी विद्यार्थियों के हिंदी प्रेम में साहित्य की बड़ी भूमिका है। प्रेमचंद, निराला, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, धर्मवीर भारती, हरिवंश राय बच्चन, दुष्यंत कुमार और हरिशंकर परसाई की रचनाएं उन्हें भारतीय समाज और संवेदना को समझने का अवसर दे रही हैं। लखनऊ की तहजीब और हिंदी का संस्कारित रूप इस आकर्षण को और गहरा कर रहा है।
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