बदहाली की रुदाली सुनना है तो कभी गोमती रिवर फ्रंट पर चले जाइए। वही रिवरफ्रंट जिसका नाम ही कभी आकर्षण का केंद्र हुआ करता। दावा किया जाता कि ये शहर की नई झांकी पेश करेगा। 2000 करोड़ रुपये इस प्रोजेक्ट पर खर्च भी हुए। फिर भी करीब 8.5 किमी. में रिवरफ्रंट का अधूरा ही विकास हुआ। पर, पिछले छह साल में रिवरफ्रंट का रखरखाव सीबीआई जांच और प्रोजेक्टों के सिंचाई विभाग को हैंडओवर नहीं होने के पेंच में ऐसा फंसा कि जो विकास हुआ भी था वह बदहाल हो गया। गोमती बैराज के पास टूटी पड़ी बेंच, जलकुंभी व कूड़े से अटी जेट्टी (नाव पर चढ़ने के लिए तैरता हुआ प्लेटफॉर्म) और टूटी रेलिंग, ये सब अब बदहाली की रुदाली ही गा रहे हैं।
गोमती रिवरफ्रंट पर बदहाली की रुदाली: हर तरफ गंदगी, सीवर की आती है बदबू, दो करोड़ की वाटर बोट गायब, तस्वीरें
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जहां सबसे अधिक पर्यटक, वहीं बदहाली
गोमती बैराज के पास चटोरी गली के नीचे की तरफ बाएं तट पर बने रिवरफ्रंट पार्क में सबसे अधिक पर्यटक व दर्शक पहुंचते हैं। यहां पहले शाम के वक्त लाइट म्यूजिक के साथ देर रात तक रोशनी बनी रहती थी। अब यहां म्यूजिक बंद हो चुका है। नदी से आती सीवर की बदबू से उबकाई आने लगती है। यही वजह है कि अब यहां आकर सेल्फी लेने और घूमने वालों की संख्या भी कम हो गई है।
एलडीए को मिला तो संवरे पार्क
2017 के अंत में रिवरफ्रंट को आम लोगों के उपयोग के लिए खोलने के लिए यहां पार्क विकसित करने का फैसला शासन ने लिया। एलडीए को यह काम दिया गया। करीब 60 फीसदी क्षेत्र में दोनों तट पर यह काम एलडीए ने कराया भी है। इससे कुछ जगहों पर बेहतर पार्क बन पाए हैं। लेकिन, मनकामेश्वर मंदिर, हार्डिंग ब्रिज, हनुमान सेतु और इसके आसपास अभी भी रिवरफ्रंट के पार्कों का विकास अधूरा है। इसकी वजह यहां तक पहुंच मार्ग ही नहीं तैयार हो पाना है।
वाटर बस कहां गई, पता नहीं
2016 में करीब 2.25 करोड़ रुपये खर्च कर एक एसी वाटर बस सिंचाई विभाग ने गोमती नदी में चलने के लिए मंगाई थी। इस वाटर बस में चढ़ने-उतरने केलिए लामार्ट बंधा के पास और गोमती बैराज के पास जेट्टी भी बनी। दोनों ही जेट्टी जलकुंभी और कूडे़ से अटी पड़ी हैं। करीब पांच साल में इनका कोई उपयोग नहीं हुआ। वाटर बस को भी कुंभ के समय प्रयागराज भेजा गया था। इसे वापस लाया भी गया। इसके बाद यह कहां गई, इसकी जानकारी खुद सिंचाई विभाग के इंजीनियरों के पास भी नहीं है। अब यह गोमती नदी में चलते हुए भी नहीं दिखती है।
सीबीआई जांच का बहाना
प्रोजेक्ट से जुड़े सिंचाई विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि सीबीआई जांच चालू है। ऐसे में जिन प्रोजेक्टों पर काम पूरा कराया जाना है या रखरखाव के लिए नए प्रस्ताव बनने हैं, उन पर किसी तरह से काम करने के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने ही अनौपचारिक रोक लगाई हुई है। इसी वजह से पूरे पांच साल कोई काम नहीं हुआ। आलम यह है कि कुड़ियाघाट पर बने अस्थायी बंधे तक को हटाकर नदी के प्रवाह को नहीं खोलने दिया गया है।