कोरोना से लॉकडाउन के दौरान कोई भी भूखा न सोए इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को नगर निगम के इंजीनियर बखूबी निभा रहे हैं। निर्माण कार्य की जगह अब ये कम्युनिटी किचन चलाने में लगे हैं। 16 से 18 घंटे तक मेहनत कर रहे हैं, ताकि जरूरतमंदों तक ताजा व स्वादिष्ट खाना पहुंच सके। शहर में आठ जगहों पर अधिकारियों, कर्मचारियों व जन सहयोग से चल रहे कम्युनिटी किचन में ये इंजीनियर घर के मुखिया की तरह काम कर रहे हैं। यही वजह है कि सीएम, डिप्टी सीएम से लेकर कई मंत्री तक इनकी सराहना कर चुके हैं।
भूखों का पेट भरने के लिए किचन संभाल रहे इंजीनियर, 16 से 18 घंटे देकर कर रहे मानवता की सेवा, तस्वीरें
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दुआएं मिटा देती हैं थकान
कम्युनिटी किचन चौक के प्रभारी एसएफए जैदी का कहना है कि कोरोना से सीख मिली है कि कैसे हम आपात स्थिति में हिम्मत से काम कर सफल हो सकते हैं। कम्युनिटी किचन के जरिये जरूरतमंदों को खाना पहुंचा कर जो सुकून मिलता है उसे बयां नहीं किया जा सकता। खाना पाने वालों की दुआएं हर थकान मिटा देती हैं।
यही कोशिश कि कोई भूखा न रह जाए
कम्युनिटी किचन महानगर के प्रभारी मनीष अवस्थी का कहना है कि कम्युनिटी किचन में चावल से लेकर नमक तक हर जरूरत के सामान का हिसाब रखना पड़ता है। किस एरिया में खाना पहुंचा, जहां से मांग आई थी वहां खाना गया कि नहीं, एक परिवार के मुखिया की तरह इसे देखना पड़ता है। यही कोशिश रहती है कि संकट की इस घड़ी में कोई जरूरतमंद भूखा न रह जाए।
कम्युनिटी किचन जियामऊ के प्रभारी किशोरी लाल का कहना है कि गरीबी को बहुत करीब से देखा है। ऐसे में यही कोशिश रहती है कि जब जरूरतमंदों तक खाना पहुंचे तो उन्हें लगे कि वह अपने घर का ही खाना खा रहे हैं। ऊपर वाले ने ही इस लायक बनाया है कि किसी की सेवा कर सकूं, तो बस यही कमना कामना करता हूं कि सेवा में कोई कसर न रह जाए।
कम्युनिटी किचन राजाजीपुरम के सह प्रभारी विकास सिंह कहते हैं कि कई बार घर के आसपास के छोटे बच्चे और परिवार वाले खाना लेने कम्युनिटी किचन पर पहुंच जाते हैं। खाना पाकर उनके चेहरे पर दिखने वाली खुशी बड़ा सुकून देती है। काम में मेहनत तो जरूर है, लेकिन यह फर्ज है जिसे जिम्मेदारी से निभाना है।
सफाई व पूरी सजगता से काम
कम्युनिटी किचन के प्रभारी किचन की सफाई, खाना बनाने में विशेष सावधानी रखते हैं। इंजीनियर विकास सिंह बताते हैं कि जो भी कर्मचारी, अधिकारी या खाना बनाने वाला जब सुबह कम्युनिटी किचन में आता है तो अंदर जाने से पहले ही उसकी थर्मल जांच की जाती है। बिना मास्क और ग्लब्स के किसी को काम करने की इजाजत नहीं है। खाना बनाने से पैकिंग तक सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा जाता है।