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संकट के सिपाही: हाथ की मेहंदी भी नहीं छूटी...दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटीं
Fri, 10 Apr 2020 09:50 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 10 Apr 2020 09:50 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना के खतरों के बीच दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटे योद्धाओं की ‘तपस्या’ मिसाल है। कुछ ऐसी मांएं हैं जो अपने रोते मासूम बच्चे को वीडियो कॉलिंग कर चुप करा रही हैं तो कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनी सेवा तो दे ही रहे हैं, साथ ही मास्क जैसी वस्तुएं भी जुटा रहे हैं ताकि गरीबों की मदद हो सके। एक नर्स तो शादी के 15 दिन बाद ही कोरोना से जंग में उतर गई थीं तो देहरादून के एक अस्पताल के अधिकारी न सिर्फ सेवा में लगे हैं , बल्कि अस्पताल में ही रक्तदान कर अपना जन्मदिन भी मनाया। साथ ही साथियों को भी स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया ताकि संकट के इस दौर में रक्त की कमी न होने पाए।
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शादी के 15 दिन बाद ही करने लगीं आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी
इस युद्ध में एक सैनिक की तरह लड़ रहीं नर्स सोनम गुप्ता की कहानी कुछ अलग है। उनकी 16 जनवरी को ही शादी हुई है। ससुराल सौ किलोमीटर दूर कानपुर में है। शादी के बाद ससुराल में 15 दिन ही बीते थे कि सोनम ने दो फरवरी को ड्यूटी ज्वॉइन कर ली। कोरोना संकट आते ही फरवरी के अंत में उनकी ड्यूटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फफूंद से दिबियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में लगाने का फरमान आया। उन्होंने अपने सास-ससुर और पिता हिमांशु को इस बारे में बताया। उन्हें समझाया कि 14 दिन की ड्यूटी के बाद 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड है। लगभग एक माह की दूरी। साथ ही खतरा भी।
इस युद्ध में एक सैनिक की तरह लड़ रहीं नर्स सोनम गुप्ता की कहानी कुछ अलग है। उनकी 16 जनवरी को ही शादी हुई है। ससुराल सौ किलोमीटर दूर कानपुर में है। शादी के बाद ससुराल में 15 दिन ही बीते थे कि सोनम ने दो फरवरी को ड्यूटी ज्वॉइन कर ली। कोरोना संकट आते ही फरवरी के अंत में उनकी ड्यूटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फफूंद से दिबियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में लगाने का फरमान आया। उन्होंने अपने सास-ससुर और पिता हिमांशु को इस बारे में बताया। उन्हें समझाया कि 14 दिन की ड्यूटी के बाद 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड है। लगभग एक माह की दूरी। साथ ही खतरा भी।
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सोनम के जज्बातों में कोरोना के इस युद्ध में सिपाही की जिम्मेदारी भी झलक रही थी। ससुराल वालों ने उन्हें रजामंदी दे दी। दो अप्रैल से वह आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। यहां कस्बे में मिले चार कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज भी हुआ है। सोनम कहती हैं कि हमने उनके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब सभी मरीजों को कानपुर भेज दिया गया है। खास बात यह है कि सोनम का मायका अस्पताल से 500 मीटर की दूरी पर ही है। वह वहां भी नहीं जा सकती हैं। न ही कोई उनसे मिलने जा सकता है। वह अपने पति से वीडियो कॉलिंग से बात कर मन को तसल्ली दे देती हैं।
सोनम गुप्ता, नर्स, दिबियापुर सीएचसी, औरैया
सोनम गुप्ता, नर्स, दिबियापुर सीएचसी, औरैया
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चारों संक्रमितों की रिपोर्ट निगेटिव आई तो ली चैन की सांस
क्वारंटीन सेंटर से अस्पताल और अस्पताल से क्वारंटीन सेंटर। डॉ.गोपाल सारस्वत और उनकी टीम का फिलहाल यही रुटीन है। अब जब चारों रोगियों की दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई है तो सभी उत्साहित हैं। जब से इस सीएचसी को कोविड-1 अस्पताल में तब्दील कर दिया गया और सासनी में मिले चारों संक्रमित रोगी इस अस्पताल में दाखिल कराए गए तो जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई। उनके साथ-साथ 25 सदस्यीय टीम इस अस्पताल में ड्यूटी कर रही है। डॉ.गोपाल कहते हैं: चार मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, इस बात की बेहद खुशी है।
डॉ. गोपाल सारस्वत, सीएचसी मुरसान, हाथरस
क्वारंटीन सेंटर से अस्पताल और अस्पताल से क्वारंटीन सेंटर। डॉ.गोपाल सारस्वत और उनकी टीम का फिलहाल यही रुटीन है। अब जब चारों रोगियों की दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई है तो सभी उत्साहित हैं। जब से इस सीएचसी को कोविड-1 अस्पताल में तब्दील कर दिया गया और सासनी में मिले चारों संक्रमित रोगी इस अस्पताल में दाखिल कराए गए तो जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई। उनके साथ-साथ 25 सदस्यीय टीम इस अस्पताल में ड्यूटी कर रही है। डॉ.गोपाल कहते हैं: चार मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, इस बात की बेहद खुशी है।
डॉ. गोपाल सारस्वत, सीएचसी मुरसान, हाथरस
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कभी डांस कर तो कभी मिमिक्री कर बढ़ाया टीम का हौसला
कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने का संदेशा जब डॉ. दर्शन बजाज को मिला तो मां के बीमार होने के बाद भी खुद को रोक नहीं पाए। पत्नी डॉक्टर मोना बजाज की भी ड्यूटी क्वीन मैरी अस्पताल में लगी है। डॉ. बजाज ने मां को दवाई देने के बाद डेढ़ साल की बेटी को उनके पास छोड़ कोरोना वार्ड आ गए। 7 दिन वार्ड की ड्यूटी करने के बाद अब क्वारंटीन में है। डॉ. दर्शन बजाज बताते हैं कि वार्ड में कई बार साथी कर्मचारी नर्वस नजर आए तो उन्हें डांस कर प्रोत्साहित किया। विभिन्न फिल्मों के डायलॉग बोलकर उनका हौसला बढ़ाया। नर्सिंग कर्मियों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ सफाई कर्मियों का भी मनोरंजन कर उत्साह बढ़ाते हैं।
डॉ. दर्शन बजाज, एसोसिएट प्रोफेसर, केजीएमयू
कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने का संदेशा जब डॉ. दर्शन बजाज को मिला तो मां के बीमार होने के बाद भी खुद को रोक नहीं पाए। पत्नी डॉक्टर मोना बजाज की भी ड्यूटी क्वीन मैरी अस्पताल में लगी है। डॉ. बजाज ने मां को दवाई देने के बाद डेढ़ साल की बेटी को उनके पास छोड़ कोरोना वार्ड आ गए। 7 दिन वार्ड की ड्यूटी करने के बाद अब क्वारंटीन में है। डॉ. दर्शन बजाज बताते हैं कि वार्ड में कई बार साथी कर्मचारी नर्वस नजर आए तो उन्हें डांस कर प्रोत्साहित किया। विभिन्न फिल्मों के डायलॉग बोलकर उनका हौसला बढ़ाया। नर्सिंग कर्मियों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ सफाई कर्मियों का भी मनोरंजन कर उत्साह बढ़ाते हैं।
डॉ. दर्शन बजाज, एसोसिएट प्रोफेसर, केजीएमयू