फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

ग्राउंड रिपोर्ट: मुश्किल में जिंदगी, किसी ने पत्नी का मंगलसूत्र बेचा तो कोई बच्चों के साथ धूप में पैदल चला

Thu, 21 May 2020 06:44 PM IST
ishwar ashish नीरज 'अम्बुज'/अमर उजाला, लखनऊ
नीरज 'अम्बुज'/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 21 May 2020 06:44 PM IST
विज्ञापन
conditions of people coming back from rajasthan, bihar and delhi
लोगों ने बताई अपनी कहानियां। - फोटो : amar ujala
जिंदगी मुश्किल में है और कामगार सफर पर...। जितने चेहरे उतनी कहानियां...। घर लौटने के लिए किसी को बीवी का मंगलसूत्र बेच टैक्सी करनी पड़ी तो किसी को अपनी करधनी गिरवी रखनी पड़ी। कोई मीलों से पैदल चला आ रहा है। बच्चों को धूप से बचाने के लिए सीने से चिपकाए हुए। प्यास से हलक सूख रही तो भूख से आंतें ऐंठी जा रही...। पर वे बढ़ते जा रहे हैं अपनी मंजिल की ओर। पेश है नीरज 'अम्बुज' की रिपोर्ट...


 
conditions of people coming back from rajasthan, bihar and delhi
गामा सिंह, सासाराम, बिहार - फोटो : amar ujala

बीच रास्ते में छोड़कर भाग गया ड्राइवर 
पिता जी ने नाराज होकर घर से भगा दिया तो राजस्थान चला गया। वहां खेलकूद का सामान बनाने वाली फैक्टरी में काम करने लगा। लेकिन लॉकडाउन में सब खत्म हो गया। इसलिए घर लौटना था। पैसा था नहीं तो मां से मिली सोने की करधनी बेच दी। इससे 4000 हजार रुपये मिले। इसके बाद पैदल ही घर चल पड़ा। करीब सौ किमी पैदल चलने व दो सौ किमी डाला से सफर के बाद एक तवेरा गाड़ी में बैठा। ड्राइवर ने घर तक पहुंचाने के लिए पूरे 4000 रुपये वसूल लिए। जब गाड़ी लखनऊ के लिए मुड़ी तो खाने के लाले पड़ गए। पीने को पानी तक नहीं मिला। आज सुबह आगरा एक्सप्रेस वे के टोल प्लाजा से पहले ड्राइवर ने कमानी में गड़बड़ी की बात कह गाड़ी रोक दी और हमें नीचे उतार कर बोला कि कमानी बनवाकर आता हूं। उसके इंतजार में दोपहर हो गई, लेकिन वह लौटा नहीं।

conditions of people coming back from rajasthan, bihar and delhi
सुशीला, बेटा शौर्य, बेटी साक्षी, दिल्ली से उन्नाव का सफर - फोटो : amar ujala

धूप से बचाने को आंचल में समेटे रही
सुशीला ने बताया कि पति दिल्ली में नौकरी करते थे। हाल ही में हमें साथ रहने बुलाया था। कोरोना से पति की नौकरी चली गई। एक दिन पैदल ही बच्चों को लेकर निकल पड़ीं। धूप से बचाने के लिए उन्हें गोद में लिए करीब 30 किमी की यात्रा भी कर ली। लेकिन फिर बस मिल गई। वहां से जैसे-तैसे लखनऊ पहुंची। अब यहां से उन्नाव के लिए बस का इंतजार है।

विज्ञापन
विज्ञापन
conditions of people coming back from rajasthan, bihar and delhi
विजय, राजस्थान से मुजफ्फरपुर। - फोटो : amar ujala

पत्नी का मंगलसूत्र बेच चुकाया टैक्सी का किराया
आठ साल पहले मुजफ्फरपुर से काम की तलाश में राजस्थान गया था। पिता बुजुर्ग थे और भाइयों ने किनारा कर लिया था। एक बहन की शादी व परिवार के खर्च का जिम्मा मुझ पर आ गया। मेरी बीवी व एक बेटी है। जयपुर में एक निजी कंपनी में 7000 रुपये की नौकरी मिल गई। धीरे-धीरे सब ठीक हो रहा था। सैलरी भी बढ़कर 13000 हो गई थी। लेकिन 46 दिन के लॉकडाउन में सारी जमापूंजी खत्म हो गई। वापसी के लिए रुपये तक नहीं बचे। बीवी को फोन बताया तो उसने मंगलसूत्र बेचकर 17,000 रुपये खाते में डलवाए। इसके बाद दोस्तों के साथ टैक्सी बुक की और घर निकल पड़ा।

 

विज्ञापन
conditions of people coming back from rajasthan, bihar and delhi
राजकुमार, दतिया। - फोटो : amar ujala

दो दिन बाद मिलीं पूड़ियां, तब आया सुकून
राजकुमार ने बताया कि बाराबंकी में मजदूरी करता था। वहां से पैदल ही परिवार के साथ लखनऊ तक आ गया। रास्ते में खाने को कहीं मिला ही नहीं। दो दिन हो गए थे। लखनऊ में खाने के पैकट मिले। अब झांसी के आगे दतिया जाना है। बस के इंतजार में बैठा हूं। कुछ लोगों ने बताया शकुंतला मिश्रा विवि चले जाओ तो यहां चला आया। अब अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं। कहते हैं, बस चलाएंगे, जब संख्या हो जाएगी। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed