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न करें बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़, कीमती है इनकी जिंदगी, देखें- लापरवाही बयां करतीं कुछ तस्वीरें

Tue, 16 Jul 2019 04:50 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 16 Jul 2019 04:50 PM IST
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carelessness of van drivers, rickshaw pullers and parents
असुरक्षित स्कूल जाते और लौटते मासूम - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ के गोमतीनगर थानाक्षेत्र में समतामूलक चौराहे पर सोमवार सुबह उल्टी दिशा से आ रही महाराजा अग्रसेन स्कूल की वैन में गाजीपुर डिपो की बस ने भीषण टक्कर मार दी। इससे पलटी वैन घिसटते हुए काफी दूर तक चली गई। भीतर बैठे भाई-बहन समेत चार विद्यार्थी दहशत के मारे रोने-चीखने लगे। इस हादसे से बच्चे इतना डर गए कि कहने लगे पापा अब वैन से स्कूल कभी नहीं जाएंगे। अक्सर ही  इस तरह की दुर्घटनाएं होती रहती हैं। फिर भी न वैन वाले चेतते हैं और न ही बच्चों के अभिभावक। देखिए आगे की स्लाइड्स में कुछ तस्वीरें जो इस तरह की लापरवाही को बयां कर रही हैं.....

carelessness of van drivers, rickshaw pullers and parents
असुरक्षित स्कूल जाते और लौटते मासूम - फोटो : अमर उजाला
बच्चे आपके हैं...इसलिए फिक्र आपको भी करनी होगी
 सिर्फ लोहिया पथ ही नहीं रॉन्ग साइड से चलने वाले हर जगह मिल जाएंगे। सोमवार को क्राइस्ट चर्च स्कूल में छुट्टी हुई तो ये रिक्शा चालक बच्चों को लेकर गलत दिशा से निकलने लगा।
carelessness of van drivers, rickshaw pullers and parents
असुरक्षित स्कूल जाते और लौटते मासूम - फोटो : अमर उजाला

यह लोहिया पथ है, जहां वाहनों की स्पीड ज्यादा होती है। अब जरा इस रिक्शा चालक को देखिए, कालिदास मार्ग चौराहे से जियामऊ के लिए गलत दिशा से जा रहा है। पैदल चलने वालों का रास्ता कब्जा किए हुए। कई तो मुख्य सड़क से ही गलत दिशा से निकलते हैं। ऐसे में थोड़ी सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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असुरक्षित स्कूल जाते और लौटते मासूम - फोटो : अमर उजाला

ऐसी है स्कूली वाहनों की फिटनेस!
स्कूली वाहनों की फिटनेस जांचने को लेकर अभियान चलते रहते हैं। रस्मी तौर पर कुछ दिनों तक जांच-पड़ताल और फिर सब बंद हो जाता है। अगर नियमित जांच होती तो क्या ऐसे वाहन स्कूली बच्चों को ढो रहे होते?

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carelessness of van drivers, rickshaw pullers and parents
असुरक्षित स्कूल जाते और लौटते मासूम - फोटो : अमर उजाला

अगर कोई और जुगाड़ होता तो...?
देखिए, कैसे इस ई-रिक्शा में बच्चों को ठूंसा गया है। अगर कोई और जुगाड़ होता तो चालक नि:संदेह बच्चों को छत पर बैठाने से भी नहीं चूकता। अब सोचिए, उसे आपके बच्चे की फिक्र है या सिर्फ अपनी कमाई की।

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