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कोरोना का कहर: कई मौतों के बाद भी कहीं ग्रामीण नहीं कर रहे सहयोग तो कहीं जांच में ही लापरवाही

Thu, 20 May 2021 12:43 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 20 May 2021 12:43 AM IST
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A report of corona effected villages of lucknow.
- फोटो : amar ujala

राजधानी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण अब भी चिंता बढ़ा रहा है। कहीं कोरोना संक्रमित लोग मिल रहे हैं तो कहीं खांसी, जुकाम, बुखार से पीड़ित लोग। स्वास्थ्य विभाग की टीमों और आशा बहुओं के जरिये कई इलाकों में दवा पहुंचाई जा रही है, लेकिन लोग परेशान हैं। कोई चेकअप से लेकर सैनिटाइजेशन तक की व्यवस्था से असंतुष्ट है तो किसी को अधिकारियों की अनदेखी की पीड़ा है। इस बीच ऐसे गांव भी सामने आ रहे हैं, जहां लोग जांच में सहयोग नहीं कर रहे। अमर उजाला ने ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण व बीमारी की स्थिति के साथ ही रोकथाम के लिए चलाए जा रहे सरकारी अभियानों का भी सच जानने के लिए अलग-अलग विकासखंड में गांवों की पड़ताल की। इसी दौरान अलग-अलग स्थिति सामने आई। पेश है रिपोर्ट।



मलिहाबाद : कई मौतों के बाद भी जांच में असहयोग
मलिहाबाद क्षेत्र के नई बस्ती धनेवा गांव में भी पंचायत चुनाव के बाद कई लोगों की मौत हो चुकी है। समाजसेवी लल्ला मौर्या ने बताया कि गांव के विश्राम शर्मा, उस्मान, राजाराम रावत, मोनू रावत व जानकी मौर्य ने बीते दिनों अचानक आई बीमारी की लहर में जान गंवा दी। इनमें कुछ लोगों की मौत कोविड से हुई तो कुछ की जांच ही नहीं हुई। मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में चिन्हित लोगों की जांच की और पॉजीटिव मिले लोगों को होम आइसलेट भी किया।

A report of corona effected villages of lucknow.
corona - फोटो : amar ujala

स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार कहते हैं कि अब गांव में तीन पॉजिटिव केस हैं। उनकी भी हालत ठीक है। हालांकि कुछ ग्रामीणों को आशंका है कि अगर पूरे गांव की जांच की जाए तो एक्टिव केसों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि गांव के बहुत से लोग मेडिकल कॉलेज में काम करते हैं और लोग रोजाना गांव भी आते-जाते हैं। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के अनुसार ग्रामीणों की आशंका पर पूरे गांव की जांच कराने की योजना तैयार कर टीमें भी भेजी गईं, मगर अधिकांश लोग जांच कराने के लिए तैयार नहीं हुए। एसडीएम अजय रॉय ने भी ग्रामीणों से जांच कराने की अपील की। इसके बावजूद भी लोग जांच के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। आरोप है कि निगरानी समिति भी निष्क्रिय है।

A report of corona effected villages of lucknow.
- फोटो : amar ujala

सरोजनीनगर : दवा तो बंट रही मगर सुनवाई नहीं
सरोजनीनगर की अमावा ग्राम पंचायत में एक महीने में प्रमोद कुमार, श्याम सुंदरी, प्रेम शंकर श्रीवास्तव उनकी पत्नी सावित्री व पुत्र निलेश, राम प्रकाश साहू, सियाराम, कीर्ति पटेल, तेजनरायन, दयाराम, ओमेंद्र, राजवती, गरीबन, भोली, वक्तावर व प्रेम नारायण सिंह जग्गा की मौत हो चुकी है। इनमें तीन लोग तो एक ही परिवार के थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद गांव में तहसील प्रशासन का कोई अधिकारी आज तक नहीं आया। सैनिटाइजेशन तक नहीं हुआ। इससे गांव के लोग काफी आक्रोशित हैं।

गांव में आज भी कई लोग बुखार, खांसी, जुकाम से पीड़ित हैं। इन्हें गांव की आशा बहु लवलेश दवा की किट दे रही हैं। पूर्व ग्राम प्रधान शिव शंकर सिंह ने आरोप लगाया कि गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम आज तक नहीं आई। ग्राम प्रधान ने गांव में कैंप लगाकर जांच की मांग की है। राजेंद्र सिंह ने बताया कि चुनाव के समय गांव में कुछ बाहरी लोग आ गए थे। इससे भी वायरस फैलने की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकासखंड अधिकारी निशांत राय को सैनिटाइजेशन के लिए फोन भी किया गया, लेकिन कोई उचित जवाब नहीं मिला। वहीं सीएचसी प्रभारी अंशुमान सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अमावा गांव में घर-घर जाकर खांसी, बुखार, जुखाम से पीड़ित मरीजों को दवा वितरण की है। गांव में कोई दिक्कत है तो हमारी टीम दोबारा गांव जाकर मरीजों को चेक करेगी। 

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A report of corona effected villages of lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

मोहनलालगंज : पुरसेनी में बीते माह हुईं नौ मौतें
मोहनलालगंज का पुरसेनी गांव भी इन दिनों बीमारी के चपेट में है। यहां बीते माह में अचानक नौ लोगों की मौत हो चुकी हैं। इधर, रविवार को भी एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत हो गई। यही नहीं गांव के करीब पच्चीस लोग सर्दी, जुकाम से पीड़ित हैं। सोमवार को सीएचसी मोहनलालगंज की ओर से गांव में कैंप लगाकर लोगों की कोरोना जांच करने के साथ ही दवा वितरण किया गया। लोगों ने आरोप लगाया कि यहां सफाई व्यवस्था तो गड़बड़ है ही, इस महामारी के दौरान सैनिटाइजेशन भी नहीं किया गया है।

अधिवक्ता नरेन्द्र ने बताया कि रिटायर्ड अनुभाग अधिकारी उनके चाचा श्रीओम सिंह कोरोना से संक्रमित हो गए थे। रविवार को उनकी मौत हो गई। इसके पहले इनकी चाची व अखिलेश की माता की भी कोरोना से मिलते-जुलते लक्षणों के बाद मौत हो गई थी। राजेश सिंह भंडारी ने आरोप लगाया कि जबसे उनकी पंचायत नगर निगम में शामिल हुई, तबसे गांव में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं। नालियां गंदी हैं, जगह-जगह कूडे़ के ढेर लगे हैं। वहीं सीएचसी अधीक्षक ज्योति कांबले ने बताया कि गांव में सोमवार को सीएचसी की ओर से कैम्प लगाकर 37 लोगों का एंटीजन टेस्ट किया गया जो कोरोना निगेटिव पाए गए हैं। वहीं सर्दी-जुकाम से पीड़ित 25 लोगों को दवा दी गई है।

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A report of corona effected villages of lucknow.
- फोटो : amar ujala

काकोरी: एक माह में कई मौतों से दहशत का माहौल
विकासखंड काकोरी क्षेत्र की फतेहगंज ग्राम पंचायत में नंदकिशोर, अंगना, रामवली, गया की पत्नी, राकेश की पत्नी, शीला, सावित्री, मुलहे राजपूत, लल्लन राजपूत समेत कई लोगों की मौत एक माह के भीतर हो चुकी है। इन्हीं में एक कमर जहां पत्नी उस्मान को भी सांस लेने में तकलीफ थी। समय से ऑक्सीजन नहीं मिल पाने से कुछ दिन पहले उनकी मौत हो गई।

गांव में लगातार हो रही मौतों के बाद भी आरोप है कि कई पीड़ितों की जांच नहीं हो सकी है। इसको लेकर ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वेद प्रकाश ने बताया कि उन्होंने अपने निजी खर्च से पूरे गांव में सैनिटाइजेशन कार्य कराया है।

नोडल अफसर काकोरी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि आशा बहू, एनएम सहित कोविड-19 की टीम लगातार गांव में भ्रमण कर लोगों की जांच कर रही है। यदि ऐसा है तो मंगलवार को टीम भेज कर जांच करवा कर लोगों को दवाई मुहैया कराई जाएगी।

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