कोरोना व कोरोना जैसे लक्षण वाली बीमारी से ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत है। कई गांवों में अचानक कई लोगों ने दम तोड़ दिया। कई लोग खांसी, बुखार जैसे लक्षण वाली बीमारी की चपेट में आ गए। जांच में कुछ लोग कोरोना पॉजिटिव निकले तो कुछ की रिपोर्ट निगेटिव आई। यही नहीं कुछ जगह लोगों ने जांच ही नहीं कराई। स्वास्थ्य विभाग की टीमों के पहुंचने या लोगों से संपर्क करने की बात लोगों ने कही, लेकिन कुछ जगह लापरवाही के आरोप भी लग रहे हैं। अमर उजाला ने विभिन्न विकासखंडों के अलग-अलग गांवों की पड़ताल की। पता चला सभी जगह मौतें हुई हैं। कुछ जगह स्थिति अब संभली है, तो कुछ जगह लोगों में अभी दहशत के साथ मदद के इंतजाम दुरुस्त न होने से रोष है।
कोरोना संक्रमण के दौर में गांवों का हाल: लगातार हो रही मौतों से दहशत बरकरार, इंतजाम न होने से लोग परेशान
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मलिहाबाद के मनकौटी में पांच-छह लोगों की मौत के बाद अब संभली स्थिति
मलिहाबाद के मनकौटी गांव में पंचायत चुनाव के बाद तेजी से फैले कोरोना संक्रमण के कारण छह लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों की टेस्टिंग की और उन्हें दवाएं वितरित की। प्रधान प्रतिनिधि मीनू वर्मा ने बताया कि चुनाव के बाद गांव में काफी संख्या में लोग सर्दी जुकाम, बुखार की चपेट में आ गए थे। इस दौरान गांव की बिटाना, बाबूलाल, हसीम की पत्नी व शकील की कोविड से मौत हो गई थी। चैता तथा चन्दोबाबा की मौत भी इसी दौरान हो गयी थी। मौतें कैसे हुईं, यह कहना तो मुश्किल है, क्योंकि ये दोनों बीमार नहीं थे। बाद में गांव के दो सौ लोगों की जांच में 24 ग्रामीणों की रिपोर्ट पॉजीटिव आयी थी, जिन्हें होम आईसोलेशन में रखा गया था। जांच के बाद पूरे गांव का सैनिटाइजेशन हुआ। सीएचसी अधीक्षक अवधेश कुमार ने बताया कि मनकौटी गांव की स्थिति सामान्य हो चुकी है। वहां पर सिर्फ एक पॉजीटिव केस है वह भी ठीक है।
गोसाईंगंज के महुरा कला में 15 मौतों के बाद भी जिम्मेदार लापरवाह
गोसाईगंज के महुरा कला में भी बीते कुछ दिनों में कई लोगों की मौत हो गई है। गांव वालों की मानें तो 19 अप्रैल के बाद से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण थे। चूंकि मरने वालों की कोविड जांच नहीं हुई थी, इस कारण उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। पूर्व प्रधान राम सिंह वर्मा कहते हैं कि इतनी मौतों व कई लोगों के संक्रमित होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने गांव को संक्रमण से बचाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए। गांव के ही दीपक कुमार का आरोप है कि 30 अप्रैल को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया था। कंट्रोल रूम से फोन पर घर पर दवा भेजने के साथ ही संपर्क में आए लोगों की कॉन्टेक्ट टेस्टिंग कराने के लिए टीम भेजने का आश्वासन दिया गया।
सीएचसी गोसाईंगंज से फोन पर घर में शौचालय व कमरों की जानकारी तो ली गई, लेकिन कोई हाल जानने नहीं आया। कांटेक्ट टेस्टिंग कराना तो दूर आइसोलेशन के समय दवा भी नहीं दी गई। फिलहाल गांव की आशा बहु पुष्पा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रीती घर-घर जाकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. हेमंत के अनुसार संक्रमितों को दवा पहुंचाने के साथ ही उसके संपर्क में आए लोगों की जांच कराई जा रही है। मोबाइल बंद होने या नंबर न मिलने पर मरीज से संपर्क न होने की दशा में ही उन तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता।
19 अप्रैल से 14 मई तक इनकी हुई मौत : भारत सिंह (70), हरिशंकर (50), राम नारायण (62), सितई (80), रामस्वरूप (60), विद्यावती (62) व विनीत (32) की बुखार से, सरवन रावत की पत्नी (45), मनोहर लाल (66), रामसेवक की पत्नी (78) की अचानक तबियत बिगड़ने से, जय प्रकाश की पत्नी (65), परशुराम की पत्नी (75) की पेट दर्द से और मीना (22) व बाबादीन (75) की बुखार व ऑक्सीजन की कमी से व ब्रम्हादीन (85) की भी मौत हो गई।
मोहनलालगंज के सिसेंडी में 14 की मौत के बाद अब बंट रही दवाई
मोहनलालगंज के सिसेंडी में पूर्व प्रधान राजेश जायसवाल ने बताया कि अप्रैल में सिसेंडी में चौदह लोगों की मौत हो गई थी। इनमें राजेश, इकबाल, निर्मला व श्रीकेशन की पत्नी को खांसी, बुखार व सांस लेने में परेशानी थी। अन्य मरने वालों में भी अधिकांश लोगों को सांस की दिक्कत बताई गई।
पूर्व प्रधान का आरोप है कि उस समय सैनिटाइजेशन भी नहीं कराया गया। गांव में अब भी कुछ लोग खांसी-बुखार से पीड़ित हैं, लेकिन लोग जांच कराने से बच रहे हैं। इसके चलते सही बात सामने नहीं आ पा रही है। हालांकि कुछ लोगों ने कोरोना टेस्ट कराया था, जिनमें से पांच लोग संक्रमित पाए गए थे, लेकिन लोग अपना नाम खोलना उचित नहीं समझते हैं। अब गांव में निगरानी समिति के सक्रिय होने के बाद सर्दी, जुकाम से पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिली दवा को वितरित किया जा रहा है। अब तक करीब 38 लोगों को दवा दी गई है।
वहीं सीएचसी अधीक्षक ज्योति कांबले ने बताया कि मौतों के कारण की पड़ताल की जाएगी। गांव में निगरानी समिति के अलावा सीएचसी की टीम कमजोरी व सर्दी-जुकाम से पीड़ित लोगों को दवा वितरण कर रहीं हैं। सूचना मिलने पर सात लोगों का कोरोना टेस्ट शनिवार को किया गया, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव हैं।
ना जांच ना इलाज खतरे में पांच हजार से अधिक आबादी
विकासखंड काकोरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत मुजफ्फरनगर पलिया की 6 हजार से अधिक आबादी दहशत में है। यहां ग्राम पंचायत में सात लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से किसी को बुखार तो किसी को सांस लेने में दिक्कत थी। इसके बाद भी ना तो स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और ना ही लोगों की जांच के साथ इलाज हो सका। साफ सफाई कराने की कौन कहे गांव का सैनिटाइजेशन तक नहीं कराया गया। मुजफ्फरनगर गांव के मृतक प्रताप यादव के बेटे अखिलेश यादव बताते हैं कमल किशोर यादव सहित कई अन्य लोगों की मौत होने पर पूरा परिवार गमगीन है।
अखिलेश कहते हैं कि पिता को बुखार आ रहा था। 10 दिन तक इलाज चला, लेकिन उनकी मौत हो गई। अब हम अपने और परिवार के सदस्यों की जांच का इंतजार कर रहे हैं। होरीलाल रावत भी जिंदगी की जंग हार गए। उनके बेटे सुरेश रावत कहते हैं कि उनके पिता को बुखार और सांस की दिक्कत थी। इलाज के लिए लखनऊ के कई अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन इलाज ना मिलने के कारण पिता की मौत हो गई। ग्राम पंचायत मुजफ्फरनगर पलिया के नवनियुक्त प्रधान आनंद यादव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किसी प्रकार की 20 दिनों से अभी तक कोई टीम नहीं आई है। जबकि ग्राम पंचायत मुजफ्फरनगर पलिया, बढ़ौना में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। अब भी कई लोग बीमार हैं।