Akshaya Tritiya 2023: अक्षय तृतीया का पर्व 22 अप्रैल 2023 को मनाया जा रहा है। इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाने की परंपरा है। इस तिथि से शुभ कार्यों का प्रारंभ हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो भी पुण्य अर्जित होते हैं, उनका कभी क्षय नहीं होता है। हर तरह के शुभ कार्यों को इस दिन संपन्न कर सकते हैं। अक्षय तृतीया का पर्व पूरे देश में ही मनाया जाता है, हालांकि इसे मनाने के लिए अलग अलग परंपराएं हैं। उत्तर भारत से लेकर बंगाल और पंजाब से लेकर उड़ीसा तक अक्षय तृतीया को मनाने का अलग रिवाज और परंपरा है। इस अक्षय तृतीया पर जानें कि पूरे देश में इस पर्व को कहां-कहां और कैसे मना सकते हैं।
Akshaya Tritiya 2023: बंगाल-उड़ीसा या पंजाब, जानें देशभर में अक्षय तृतीया का पर्व मनाने का खास अंदाज
पंजाब में अक्षय तृतीया का पर्व
पंजाब खेती के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में अक्षय तृतीया का पर्व पंजाब में खेती से जोड़कर मनाते हैं। इस तिथि को लोग सुबह जल्दी उठकर खेत जाते हैं और धरती मां से अच्छी फसल की प्रार्थना करते हैं। खेती के लिए जाते समय दिखने वाले पक्षी को भगवान के रूप में माना जाता है और उनके सामने भी नतमस्तक होते हैं।
पश्चिम बंगाल में अक्षय तृतीया
पश्चिम बंगाल में भी अक्षय तृतीया के पर्व को महत्वपूर्ण मानते हैं। स्थानीय भाषा में अक्षय तृतीया को 'हलखता' कहते हैं। इस दिन को व्यापार और निवेश से जोड़ा जाता है। बंगाल में अक्षय तृतीया पर माता लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा का विधान है। साथ ही व्यापारी इस दिन से नई ऑडिट बुक रखते हैं।
उत्तर भारत में अक्षय तृतीया
उत्तर भारत के राज्यों और शहरों में अक्षय तृतीया का पर्व खास तरीके से मनाते हैं। वृंदावन में श्री बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी के चरणों के दर्शन सिर्फ अक्षय तृतीया के दिन ही कराए जाते हैं। चंदन की लेप से ठाकुर जी के वस्त्र तैयार किए जाते हैं। गंगा स्नान करके भगवान के दर्शन और पूजा अर्चना के बाद भोग लगाते हैं।
ओडिशा में अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया के पर्व को ओडिशा में धूमधाम से मनाया जाता है। लोग सोने-चांदी के आभूषण खरीदते हैं। किसान इस दिन जुताई और बुआई करते हैं। साथ ही जगन्नाथ पुरी मंदिर के दर्शन के लिए इस दिन काफी भीड़ लगती है।