क्या आपको भी कुछ दिनों से हर छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आने लगा है, अक्सर बेचैनी रहती है और काम में ध्यान नहीं लगता? आमतौर पर इस तरह की दिक्कतों को स्ट्रेस-एंग्जाइटी का कारण माना जाता है। ये दिक्कत वैसे तो अपने आप ठीक भी हो जाती हैं, पर अगर आपको लगातार ये समस्या बनी रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
सेहत की बात: हर समय रहता है चिड़चिड़पन और स्ट्रेस? इसका कारण दिमाग नहीं, शरीर में भी हो सकता है छिपा
लगातार चिंता, चिड़चिड़ापन और बेचैनी हमेशा केवल स्ट्रेस का परिणाम नहीं होता। विटामिन बी-12 या फोलेट की कमी, एनीमिया और नींद की गड़बड़ी भी थकान, ध्यान में कमी और मानसिक बदलाव को बढ़ावा दे सकती है।
स्ट्रेस और चिड़चिड़ापन क्यों बढ़ रहा है?
अध्ययनों से पता चलता है कि शरीर में विटामिन बी12 या फोलेट की कमी के कारण भी थकान-कमजोरी, याददाश्त में कमी के साथ मानसिक दिक्कतें हो सकती हैं। विशेषतौर पर बी12 की कमी से कुछ लोगों में चिंता-अवसाद, भ्रम के अलावा दूसरी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी बढ़ा सकती हैं।
- आपकी रोज रात में नींद पूरी नहीं होती या कई बार पेट की दिक्कतें भी चिड़चिड़ापन और अनायास गुस्से का कारण बन सकती है।
विटामिन बी12 की कमी
विटामिन-बी12 शरीर के तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम और खून की कोशिकाओं के लिए जरूरी है। इसकी कमी से थकान, कमजोरी, याददाश्त और समझने की क्षमता में परेशानी हो सकती है। नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों में बी12 की कमी चिंता-अवसाद, भ्रम और अन्य मानसिक बदलावों का कारण बन हो सकती है।
- इसकी कमी से हाथ-पैर में झनझनाहट और संतुलन की समस्या भी हो सकती है।
- विटामिन बी12 की कमी के कारण होने वाली चिंता-अवसाद, भ्रम की स्थिति कई लोगों में चिड़चिड़पन और गुस्सा भी बढ़ा देती है।
एनीमिया की समस्या में भी दिक्कत
फोलेट यानी विटामिन बी9 की कमी से एनीमिया होने का खतरा होता है। एनीमिया का मतलब है शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन न होना। इससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
- एनीमिया की स्थिति थकान, कमजोरी और मानसिक कार्यक्षमता में बदलाव की समस्याओं को बढ़ा देती है। इस तरह की समस्याएं कई लोगों में चिड़चिड़पन को भी बढ़ा देती हैं।
नींद की कमी तो नहीं
नींद खराब होने पर दिनभर थकान-चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी बढ़ सकती है। एनएचएस के अनुसार स्ट्रेस के कारण भी नींद की समस्या, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है। इसलिए लगातार चिंता और नींद में गड़बड़ी का एक-दूसरे पर असर हो सकत है। अगर यह समस्या रोजमर्रा के काम और रिश्तों को प्रभावित कर रही है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, चिंता और चिड़चिड़ापन के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर इसका पता नहीं लगाया जा सकता । अगर इसके साथ आपको लगातार थकान-कमजोरी, हाथ-पैर में झनझनाहट या दूसरे शारीरिक लक्षण हैं तो समय रहते डॉक्टर से सलाह ले लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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