Ganesh chaturthi 2026 bhog: गणेश चतुर्थी आते ही घरों में बप्पा की स्थापना, फूलों की सजावट और पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन इन तैयारियों के बीच एक चीज ऐसी है, जो गणपति उत्सव की मिठास को पूरा करती है और वह है मोदक। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के दौरान मोदक केवल मिठाई नहीं, बल्कि गणपति को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख भोगों में शामिल माना जाता है। खासतौर पर नारियल और गुड़ से भरे उकड़ीचे मोदक की अपनी अलग पहचान है। महाराष्ट्र की पाक परंपरा में मोदक को भाप में पकाने के साथ-साथ तलकर भी बनाया जाता है।
गणेश चतुर्थी भोग: उकड़ीचे से लेकर तले मोदक तक, गणेश उत्सव में क्यों खास है ये मिठाई?
Why ganesha loves modak? अगर आप पारंपरिक स्वाद चाहते हैं तो उकड़ीचे मोदक सबसे बेहतर विकल्प है। कुरकुरा स्वाद पसंद है तो तले हुए मोदक आजमा सकते हैं। वहीं बच्चों के लिए चॉकलेट मोदक और मेहमानों के लिए केसर या ड्राई फ्रूट मोदक एक आधुनिक विकल्प हो सकता है
मोदक और भगवान गणेश का क्या संबंध है?
मोदक का गणपति से संबंध बहुत पुराना और लोकप्रिय धार्मिक-लोक परंपरा का हिस्सा है। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ शुरुआत का देवता माना जाता है और मोदक को भी कई परंपराओं में ज्ञान और आनंद का प्रतीक माना जाता है।
गणेश जी की प्रतिमाओं में उनके हाथ में मोदक दिखाई देना इसी लोकप्रिय परंपरा से जुड़ा है। गणेश उत्सव के दौरान भक्त उन्हें मोदक का भोग लगाते हैं और प्रसाद के रूप में परिवार के लोगों में बांटते हैं। महाराष्ट्र की पारंपरिक रसोई में भी गणेशोत्सव और मोदक का संबंध बेहद मजबूत है।
मोदक से जुड़ी लोकप्रिय कथा क्या है?
मोदक से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोककथा भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय से संबंधित है। कथा के अनुसार एक दिव्य मोदक को लेकर यह तय करना था कि उसे कौन प्राप्त करेगा। गणेश और कार्तिकेय के सामने पूरी दुनिया की परिक्रमा करने की चुनौती रखी गई।
कार्तिकेय अपने वाहन पर निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने अपने माता-पिता शिव और पार्वती की परिक्रमा की और कहा कि उनके लिए माता-पिता ही पूरी सृष्टि के समान हैं। उनकी बुद्धि और विवेक से प्रसन्न होकर उन्हें मोदक दिया गया। यह कथा अलग-अलग रूपों में कही जाती है और इसे मुख्यतः लोकप्रिय धार्मिक कथा के रूप में देखा जाता है।
इसी तरह मोदक को केवल स्वाद से नहीं, बल्कि बुद्धि, ज्ञान और आनंद से जोड़कर भी देखा जाता है।
उकड़ीचे मोदक
अगर महाराष्ट्र के पारंपरिक मोदक की बात हो तो सबसे पहले नाम आता है उकड़ीचे मोदक का। 'उकड़ीचे' का अर्थ भाप में पकाया हुआ होता है। इसमें चावल के आटे से मुलायम बाहरी परत तैयार की जाती है और अंदर नारियल तथा गुड़ की मीठी भरावन रखी जाती है।
इसे हाथ से छोटी-छोटी सिलवटें बनाकर शंकु जैसा आकार दिया जाता है और फिर भाप में पकाया जाता है। तैयार मोदक को गर्मागर्म घी के साथ भी परोसा जाता है। यह महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का सबसे पहचानने योग्य पारंपरिक मोदक माना जाता है।
तळणीचे या तले हुए मोदक
उकड़ीचे मोदक जहां मुलायम और भाप में पके होते हैं, वहीं तळणीचे मोदक कुरकुरे होते हैं। इनके बाहरी आवरण को आटे या अन्य पारंपरिक मिश्रण से तैयार करके अंदर मीठी भरावन भरी जाती है और फिर इन्हें तेल में तला जाता है।
नारियल, गुड़, इलायची और सूखे मेवों वाली भरावन इनका स्वाद बढ़ाती है। महाराष्ट्र में उकड़ीचे और तले हुए मोदक दोनों गणेशोत्सव के दौरान लोकप्रिय हैं। 2026 में पुणे में भी दोनों तरह के मोदकों की मांग बढ़ने की खबर सामने आई है।
मावा मोदक
मावा मोदक पारंपरिक नारियल-गुड़ वाले मोदक से अलग स्वाद देता है। इसमें खोया या मावा मुख्य सामग्री होता है और चीनी, इलायची तथा मेवे से इसे स्वाद दिया जाता है।
इसकी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए चावल के आटे की बाहरी परत तैयार करने की जरूरत नहीं होती। मिश्रण को पकाकर मोदक के सांचे में दबाया जाता है, जिससे यह देखने में बिल्कुल पारंपरिक मोदक जैसा दिखाई देता है।