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स्ट्रॉबेरी की खेती से इस युवक ने बनाई अलग पहचान, सोशल मीडिया को ऐसे बनाया हथियार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 19 Mar 2021 05:52 PM IST
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स्ट्रॉबेरी की खेती
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू संभाग में बसोहली क्षेत्र के बेरोजगार युवा अब रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों का रुख करने की बजाय अपने क्षेत्र में ही व्यावसायिक खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका उन्हें लाभ मिल रहा है। साथ ही अन्य भी प्रेरित हो रहे हैं। बसोहली के पलाही क्षेत्र स्थित वार्ड 10 के युवा चंदन सिंह उन्हीं में से एक हैं, जो स्ट्रॉबेरी की खेती कर उससे मुनाफा कमा रहे हैं। शीतलनगर, महानपुर में भी स्ट्रॉबेरी की खेती की जाने लगी है। इसमें बागवानी विभाग भी मदद कर रहा है और पौधों के साथ-साथ सब्सिडी उपलब्ध करवा रहा है।
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स्ट्रॉबेरी की खेती
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स्नातक कर चुके चंदन सिंह ने कहा कि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार की तलाश में कहीं बाहर जाने की जगह स्थानीय स्तर पर व्यावसायिक खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्ट्रॉबेरी व अन्य व्यावसायिक खेती फायदेमंद हैं। बशर्ते इसके बारे में पर्याप्त जानकारी समय से ली जाए।
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स्ट्रॉबेरी की खेती
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चंदन सिंह ने कहा कि उन्होंने बागवानी विभाग से जानकारी ली थी कि स्ट्रॉबेरी लगाने से पूर्व क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। मसलन भूमि कैसी होनी चाहिए। किस तरह के खाद आदि की जरूरत होती है। इसके बाद स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए बागवानी विभाग ने स्ट्रॉबेरी के पौधे उपलब्ध करवाए। स्ट्रॉबेरी इसलिए भी बेहतर है, क्योंकि इसकी बाजार में अच्छी मांग है। बेरोजगार युवाओं को इसकी खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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स्ट्रॉबेरी की खेती
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चंदन ने बताया कि उन्होंने सितंबर से अक्तूबर में पौधों को लगाया था। फरवरी माह में फल पकना शुरू हो गया। इसके बाद स्ट्रॉबेरी को मार्केट तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। सोशल मीडिया पर फोटो डालने के बाद स्ट्रॉबेरी के ऑर्डर मिलने शुरू हो गए। प्रेरित होकर अन्य युवा भी इसकी खेती को लेकर संपर्क कर रहे हैं।
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हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट ऑफिसर संजीव सिंह अंडोत्रा ने बताया कि प्रत्येक कनाल पर 13 हजार की सब्सिडी दी जाती है। एक कनाल भूमि पर तीन हजार स्टॉबरी के पौधे लगते हैं। वर्तमान में पूरे जोन में 10 कनाल भूमि पर स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है। हॉर्टिकल्चर विभाग के तहत बसोहली जोन में चार ब्लॉक आते हैं।
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