जम्मू-कश्मीर में मौसम की बेरुखी थम नहीं रही है। कश्मीर संभाग के कई जिलों में बारिश हो रही है। सोपोर और इससे जुड़े हुए इलाकों में ओलावृष्टि ने जमकर तबाही मचाई है। बारिश के साथ ओलावृष्टि ने बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। घाटी में तीस फीसदी जबकि जम्मू संभाग में दस फीसदी फसलों के नुकसान का अनुमान है।
उधर, विभागीय टीमें बीते दिनों बारिश सेे हुए नुकसान का आकलन कर रही हैं। मौजूदा समय में सेब, आड़ू, खुबानी, लीची, संतरा, नींबू, आम, चेरी समेत अन्य फलदार फसलें तैयार हो रही हैं। पौधों में फल आ गए हैं। कई जगह फसल लगभग तैयार होने की कगार पर है। बारिश के साथ तेज हवाओं से बागवानों को भारी नुकसान हुआ है। घाटी में ओलावृष्टि ने तो सेब की फसल को तहस-नहस कर दिया है। बागवानों का कहना है कि मौसम की मार से सेब की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
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जम्मू-कश्मीर का मौसम
- फोटो : अमर उजाला
इन दिनों कश्मीर में सेब की फसल तैयार हो रही है। वहीं, चेरी की फसल तैयार हो चुकी है। इसका तुड़ान चल रहा है। बागवानों की आय का मुख्य स्रोत फल हैं। समय पर तुड़ान और मंडियों में आवक पर आय निर्भर करती है।
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वहीं, जम्मू संभाग में आम और अखरोट की फसल को नुकसान हुआ है। यहां से आम और अखरोट प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं। अच्छी गुणवत्ता युक्त अखरोट को विदेशाें में भी भेजा जाता है।
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विभाग की सलाह, पौधों पर लगाएं जाली
विभाग ने बागवानाें को सलाह दी है कि आंधी और ओलावृष्टि से बचाने के लिए पौधों को जाली से ढकना चाहिए। दवाइयों का इस्तेमाल भी समय-समय पर करते रहें। ऐसा करने से नुकसान से बचा जा सकता है।
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बारिश और आंधी से नुकसान हुआ है। प्राकृतिक आपदा से बचाव करना मुश्किल रहता है। बागवानों को बचाव के बारे में जानकारी दी जा रही है। -राम सेवक, निदेशक, बागवानी विभाग