फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जम्मू-कश्मीर: घाटी में तैनात सेना के जवानों के लिए लाइफलाइन है यह अस्पताल, जानिए किस तरह होता है यहां जवानों का उपचार

Fri, 16 Apr 2021 11:23 AM IST
करिश्मा चिब अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर
अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर Published by: करिश्मा चिब Updated Fri, 16 Apr 2021 11:23 AM IST
विज्ञापन
This hospital is a lifeline for army personnel posted in the valley, know how the treatment of soldiers is done
92 बेस अस्पताल श्रीनगर - फोटो : अमर उजाला
घाटी में आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ने वाले सेना के जवानों के लिए लाइफलाइन की भूमिका निभाता है सेना का 92 बेस अस्पताल। वर्ष 1942 से एक ही मोटो (टचिंग हार्ट्स सेविंग लाइफ) के लिए यह अस्पताल सेवाएं प्रदान कर रहा है। श्रीनगर के बादामीबाग कैंटोनमेंट इलाके में स्थित सेना की 15वीं कोर के मुख्यालय में स्थित सेना का 92 बेस अस्पताल 598 बेड्स पर आधारित एक मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल है। अस्पताल में सभी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ ईएनटी, डर्मेटोलॉजी, साइकेट्री, पीडियाट्रिक्स, कैराकोलॉजी आदि के मरीजों का विशेष इलाज होता है।

 
This hospital is a lifeline for army personnel posted in the valley, know how the treatment of soldiers is done
92 बेस अस्पताल श्रीनगर - फोटो : अमर उजाला
घाटी में तैनात 15 कोर के तहत आने वाले सभी जवानों का यहां इलाज होता है। इस कोर जोन के तहत आने वाले गंभीर रूप से घायल हुए क्रिटिकल जवानों का इलाज भी इसी अस्पताल में होता है।
This hospital is a lifeline for army personnel posted in the valley, know how the treatment of soldiers is done
92 बेस अस्पताल श्रीनगर - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल की कमान संभालने वाले ब्रिगेडियर संजय मौर्या ने बताया कि यहां का ट्रॉमा सिस्टम पिछले कई वर्षों से जवानों की सेवा में लगा हुआ है। यहां का सक्सेस रेट काफी ज्यादा है। इस अस्पताल में एक समय पर 30 से 40 घायलों का इलाज किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर बाकी के वार्ड्स को भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
This hospital is a lifeline for army personnel posted in the valley, know how the treatment of soldiers is done
92 बेस अस्पताल श्रीनगर - फोटो : अमर उजाला
ब्रिगेडियर मौर्या ने बताया कि इस अस्पताल में करीब 4 से 5 सर्जिकल टीमें उपलब्ध रहती हैं। वहीं इमरजेंसी के समय या घायल जवानों के अस्पताल में पहुंचने से पहले किस तरह से अस्पताल तैयार होता है। 
विज्ञापन
This hospital is a lifeline for army personnel posted in the valley, know how the treatment of soldiers is done
92 बेस अस्पताल श्रीनगर - फोटो : अमर उजाला
उसके बारे में जानकारी देते हुए अस्पताल के इंचार्ज ओआईसी कमल कुमार दुबे ने बताया कि जैसे ही कहीं पर कोई मुठभेड़ होती है और उसमें जवान घायल होते हैं तो यहां शिफ्ट करने से पहले अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की हेल्पलाइन पर कॉल रिसीव होती और जानकारी दी जाती है कि कितने समय में और कितनी गिनती में घायल जवान अस्पताल पहुंचेंगे।
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed