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निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह को जिस मुठभेड़ के लिए मिला अवार्ड, उसी पर उठे सवाल, एनआईए करेगी जांच
Wed, 15 Jan 2020 12:30 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 15 Jan 2020 12:30 PM IST
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निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर नवीद बाबू के साथ गिरफ्तार निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह के मामले की जांच नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) करेगी। इस बीच मामले की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियों ने मंगलवार को डीएसपी के बैंक खाते और अन्य संपत्तियों की जांच की। उसकी संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है। पूछताछ में जुटी एजेंसियों ने इससे जुड़े दस्तावेज भी खंगाले हैं। आईबी, रॉ और मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) दविंदर से सघन पूछताछ कर आतंकियों के साथ उसके कनेक्शन की भी छानबीन में जुटी हुई है। माना जा रहा है कि आतंकियों के साथ गठजोड़ के कई राज सामने आ सकते हैं।
जांच में जुटी एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में यह पता चला कि पिछले साल भी डीएसपी ने आतंकी नवीद को जम्मू पहुंचाया था। यहां ठहरने तथा इलाज के बाद उसे शोपियां तक सुरक्षित पहुंचाया था। माना जा रहा है कि वह इस बार नवीद को चंडीगढ़ ले जा रहा था। वहां कुछ महीने तक रहने के लिए उसने किराये के रूप में 12 लाख रुपये लिए थे। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि वह श्रीनगर में आलीशान बंगला बनवा रहा है। डीएसपी के बयानों में काफी विरोधाभास है। इसे पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ के आधार पर मिलान किया जाएगा। दक्षिणी कश्मीर में चल रही पूछताछ के दौरान आतंकियों को अलग-अलग कमरे में रखा गया है।
जिस मुठभेड़ के लिए मिला था पुरस्कार वही अब जांच के घेरे में
दविंदर सिंह से अब तक की पूछताछ में कई साजिशों का खुलासा हो रहा है। जिस आतंकी मुठभेड़ के लिए उसे राज्य सरकार की ओर से बहादुरी पुरस्कार मिला था, वही अब जांच के घेरे में आ गई है। संदेह है कि मुठभेड़ में देविंदर ने आतंकियों के भागने में भी मदद की थी। सूत्रों के मुताबिक, 25-26 अगस्त, 2017 को पुलवामा में पुलिस लाइन पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला किया था। इसमें सीआरपीएफ के चार जवान शहीद हुए थे, जबकि दो आतंकी भी मारे गए थे। उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया, इस मुठभेड़ के बाद दविंदर सिंह को 2018 के गणतंत्र दिवस पर राज्य सरकार की तरफ से वीरता पदक मिला था। हालांकि जांच एजेंसियों को संदेह है कि दविंदर ने बाकी आतंकियों के भागने का रास्ता भी साफ किया। इस हमले में कितने आतंकी शामिल थे, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। हमेशा से यह शक था कि मारे गए दो आतंकियों के अलावा कम से कम छह और आतंकी थे, जिनका पता नहीं चला। पूछताछ में दविंदर ने कुछ ऐसी जानकारी दी है, जिससे यह शक पुख्ता हो रहा है।
दविंदर सिंह से अब तक की पूछताछ में कई साजिशों का खुलासा हो रहा है। जिस आतंकी मुठभेड़ के लिए उसे राज्य सरकार की ओर से बहादुरी पुरस्कार मिला था, वही अब जांच के घेरे में आ गई है। संदेह है कि मुठभेड़ में देविंदर ने आतंकियों के भागने में भी मदद की थी। सूत्रों के मुताबिक, 25-26 अगस्त, 2017 को पुलवामा में पुलिस लाइन पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला किया था। इसमें सीआरपीएफ के चार जवान शहीद हुए थे, जबकि दो आतंकी भी मारे गए थे। उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया, इस मुठभेड़ के बाद दविंदर सिंह को 2018 के गणतंत्र दिवस पर राज्य सरकार की तरफ से वीरता पदक मिला था। हालांकि जांच एजेंसियों को संदेह है कि दविंदर ने बाकी आतंकियों के भागने का रास्ता भी साफ किया। इस हमले में कितने आतंकी शामिल थे, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। हमेशा से यह शक था कि मारे गए दो आतंकियों के अलावा कम से कम छह और आतंकी थे, जिनका पता नहीं चला। पूछताछ में दविंदर ने कुछ ऐसी जानकारी दी है, जिससे यह शक पुख्ता हो रहा है।
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वीरता नहीं बल्कि बहादुरी पदक मिला था
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को कहा कि ऐसी खबरें सही नहीं हैं कि हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों के साथ गिरफ्तार निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वीरता पदक से नवाजा गया था। पुलिस ने कहा कि उन्हीं के नाम के एक अन्य अधिकारी को पदक मिला था। पुलिस ने ट्वीट किया कि यह स्पष्ट किया जाता है कि डीएसपी दविंदर सिंह को गृह मंत्रालय से कोई बहादुरी पदक नहीं दिया गया था। उन्हें केवल 2018 के स्वतंत्रता दिवस पर पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य द्वारा उनकी सेवा के लिए बहादुरी पदक दिया गया था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को कहा कि ऐसी खबरें सही नहीं हैं कि हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों के साथ गिरफ्तार निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वीरता पदक से नवाजा गया था। पुलिस ने कहा कि उन्हीं के नाम के एक अन्य अधिकारी को पदक मिला था। पुलिस ने ट्वीट किया कि यह स्पष्ट किया जाता है कि डीएसपी दविंदर सिंह को गृह मंत्रालय से कोई बहादुरी पदक नहीं दिया गया था। उन्हें केवल 2018 के स्वतंत्रता दिवस पर पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य द्वारा उनकी सेवा के लिए बहादुरी पदक दिया गया था।
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पहले भी कई मामलों में रहा है चर्चित
डीएसपी पहले भी कई मामलों में चर्चित रहा है। 1990 में उपनिरीक्षक के तौर पर भर्ती हुए सिंह एवं एक अन्य प्रोबेशनरी अधिकारी पर अंदरूनी जांच हुई थी, जिसमें एक ट्रक से मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। इसे सिंह और एक अन्य उपनिरीक्षक ने बेच दिया था। उसे सेवा से बर्खास्त करने का कदम उठाया गया था लेकिन महानिरीक्षक स्तर के एक अधिकारी ने मानवीय आधार पर उसे रोक दिया था और दोनों को विशेष एसओजी में भेज दिया गया था। 1997 में बडगाम में तैनाती के दौरान फिरौती मांगे जाने की शिकायत पर उसे पुलिस लाइन में भेज दिया गया था। 2015 में तत्कालीन डीजीपी के राजेंद्रा ने उसकी तैनाती शोपियां तथा पुलवामा जिला मुख्यालय में की। पुलवामा में गड़बड़ी की शिकायत पर तत्कालीन डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने अगस्त, 2018 में उसे एंटी हाइजैकिंग विंग में भेज दिया। इसकी जांच भी हुई थी।
डीएसपी पहले भी कई मामलों में चर्चित रहा है। 1990 में उपनिरीक्षक के तौर पर भर्ती हुए सिंह एवं एक अन्य प्रोबेशनरी अधिकारी पर अंदरूनी जांच हुई थी, जिसमें एक ट्रक से मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। इसे सिंह और एक अन्य उपनिरीक्षक ने बेच दिया था। उसे सेवा से बर्खास्त करने का कदम उठाया गया था लेकिन महानिरीक्षक स्तर के एक अधिकारी ने मानवीय आधार पर उसे रोक दिया था और दोनों को विशेष एसओजी में भेज दिया गया था। 1997 में बडगाम में तैनाती के दौरान फिरौती मांगे जाने की शिकायत पर उसे पुलिस लाइन में भेज दिया गया था। 2015 में तत्कालीन डीजीपी के राजेंद्रा ने उसकी तैनाती शोपियां तथा पुलवामा जिला मुख्यालय में की। पुलवामा में गड़बड़ी की शिकायत पर तत्कालीन डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने अगस्त, 2018 में उसे एंटी हाइजैकिंग विंग में भेज दिया। इसकी जांच भी हुई थी।