अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में 21 अगस्त को हुई पहली मुठभेड़ की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। 2005 के बाद पहली बार ओल्ड बारामुला में दहशतगर्दों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की। घनी आबादी के कारण विस्फोट से मकान को उड़ा न पाने की विवशता के चलते छत के रास्ते उतरकर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सीआरपीएफ तथा एसओजी के दो-दो जवानों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की सिफारिश की गई है।
2 of 5
मुठभेड़ खत्म होने के बाद जश्न के मूड में जवान
- फोटो : अमर उजाला, फाइल
ऑपरेशन में 53 बटालियन सीआरपीएफ, बारामुला एसओजी तथा सेना शामिल थी। ऑपरेशन में शामिल सुरक्षा बलों के सूत्रों ने बताया कि दहशतगर्द जहां छिपे थे वह काफी घनी आबादी वाला इलाका था। मकान बिल्कुल सटकर बने हुए हैं। मुठभेड़ के दौरान आईईडी लगाकर मकान को उड़ाया जाता तो काफी जान माल का नुकसान होता। जिस मकान में दहशतगर्द छिपे थे उससे सटकर 10 और मकान थे।
3 of 5
चार मंजिला मकान में बने हुए थे 16 कमरे
- फोटो : अमर उजाला, फाइल
चार मंजिला इस मकान में 16 कमरे बने हुए थे। इसके कुछ कमरों में बाहरी राज्यों के मजदूर भी किराए पर रह रहे थे। इसे देखते हुए सुरक्षा बलों ने रणनीति बनाई। इसके तहत छत के रास्ते जाकर दहशतगर्दों को ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई। इसमें सीआरपीएफ तथा एसओजी के दो-दो जवानों की टीम बनाकर उन्हें छत पर भेजा गया। वे छत काटकर मकान में दाखिल हुए।
4 of 5
बारामूला एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला, फाइल
इस दौरान सुरक्षा बल के जवान उन्हें लगातार कवर फायर देते रहे। एक-एक मंजिल को क्लियर करते हुए उन्होंने मकान में फंसे लोगों को बाहर निकाला। साथ ही फायरिंग में उलझाकर दहशतगर्द को ढेर किया।
5 of 5
आतंकी को जवानों ने किया ढेर
- फोटो : अमर उजाला, फाइल
मुठभेड़ में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के दहशतगर्द मोमिन गोजरी को मार गिराया गया था। ऑपरेशन में एसपीओ बिलाल अहमद शहीद और एसआई अमरदीप परिहार घायल हुए थे।