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सेना दिवस: 2 भारतीय सैनिकों के खौफ से अपने टैंक खुद जलाकर भागे थे पाक के सैनिक
Sun, 15 Jan 2017 10:32 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 15 Jan 2017 10:32 PM IST
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story of 1965 war
- फोटो : File Photo
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भारतीय सेना के शौर्य की कई कहानियां मशहूर है। इन कहानियों में न सिर्फ विजय के किस्से मौजूद है बल्कि देश के उन जांबाजों की बातें भी हैं जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने अदम्य साहस का परिचय दिया है। ऐसी ही एक कहानी है 1965 के युद्ध की जब भारतीय सेना के अदम्य साहस और पराक्रम के बल पर पाक की पूरी सेना को ऐसा खौफ हुआ कि वो अपने ही टैंकों में आग लगाकर भागने लगे। पढ़े पूरी कहानी, तस्वीरें।
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story of 1965 war
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1965 की लड़ाई में भले ही पाकिस्तान के पास विशेष तकनीक से लैस पैटन टैंक थे लेकिन भारत के महज दो सैनिकों के खौफ से पाकिस्तान के सैनिको को अपने टैंकरों को खुद आग लगाकर भागना पड़ गया । बात 10 सितंबर 1965 की है जब अपने ताबड़तोड़ हमलों से पाकिस्तान के टैंको को ध्वस्त करने वाले भारत के शूरवीर अब्दुल हमीद युद्ध क्षेत्र में शहीद हो गये । हमीद की शहादत के बाद भारतीय सेना में निराशा फैल गयी ।
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story of 1965 war
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भारत सेना की ओर से गोलीबारी जारी थी लेकिन पाक के सैनिक हमीद की शहादत से बेहद रोमांचित थे । पाक सैनिकों को लगा कि हमीद की शहादत के बाद अब अमृतसर को कूच के लिये उनका रास्ता बिल्कुल साफ है सो वो शाम के अंधेरे में गोला बारूद से लैस होकर अमृतसर की तरफ बढ़ने लगे । सैनिकों के इस दल के काफिले में सबसे आगे 2 जीप चल रही थीं ।
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भारत पाक युद्ध 1965
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अमृतसर की तरफ बढ़ रही पाक की सेना को रोकने के लिये भारत के दो सैनिक आघात लगाकर बैठे थे । मोहम्मद शफीक और मोहम्मद नौशाद नाम के ये दो सैनिक सेना की 4 ग्रेनेडियर्स विंग के जवान थे । शफीक और नौशाद दोनों ने एक साथ सेना ज्वाइन की थी और दोनों जिगरी दोस्त थे ।
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भारत पाक युद्ध 1965
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जिस जगह से अब्दुल हमीद की पोजिशन थी उससे कुछ ही दूरी पर भारतीय सेना के अधिकारियों ने शफीक और नौशाद को मोर्चे पर लगा रखा था । इसी मोर्चे के रास्ते पाक की सेना अमृतसर की तरफ बढ़ रही थी । शफीक और नौशाद ने तय किया कि वे पाक सेना के उनकी रेंज में आ जाने पर उनपर हमला करेंगे ।
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