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तीन दशक पुराना मामला फिर सुर्खियों में: शब्बीर शाह की बेल याचिका खारिज, 1996 की हिंसा का हिसाब अभी बाकी

Wed, 07 Oct 2026 05:35 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Wed, 07 Oct 2026 05:35 PM IST
सार

जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने 1996 की हिंसा के मामले में अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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Special NIA court rejects bail plea of separatist leader Shabir Shah in 1996 violence case Jammu
एनआईए

विस्तार

जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामला वर्ष 1996 में श्रीनगर में एक आतंकी के अंतिम संस्कार के दौरान हुई हिंसा, पथराव और पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी से जुड़ा है।

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विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर याचिका पर विचार करने का आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि शब्बीर शाह को रिहा किए जाने पर ऐसी गतिविधियां दोबारा जारी रखने की आशंका है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अप्रैल में एनआईए ने किया था गिरफ्तार
73 वर्षीय शब्बीर शाह को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अप्रैल में इस करीब तीन दशक पुराने मामले में गिरफ्तार किया था। मामला श्रीनगर के नाज क्रॉसिंग पर एक आतंकी के अंतिम संस्कार के दौरान हुई भीड़ की हिंसा और पुलिस पर गोलीबारी से संबंधित है।

शाह की गिरफ्तारी उस समय हुई थी, जब वह अन्य एनआईए मामलों में करीब सात साल जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए थे। इनमें एक मामला कथित आतंकी फंडिंग से भी जुड़ा था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में चार लोगों को संरक्षित गवाह बनाया जा चुका है और आरोपियों के खिलाफ अभी आरोप तय नहीं हुए हैं।

गवाहों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
अदालत ने अपने 23 पन्नों के आदेश में कहा कि इस स्तर पर शाह को जमानत देने से मुकदमे की निष्पक्ष कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही संरक्षित गवाहों पर दबाव या उन्हें प्रभावित किए जाने का खतरा भी हो सकता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर शाह को जमानत नहीं दी जा सकती कि मामले के कुछ अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने कहा कि उन आरोपियों को जांच पूरी होने और जांच अधिकारी द्वारा हिरासत की जरूरत नहीं रहने के बाद जमानत दी गई थी।

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एनआईए ने बताया था जुलूस का प्रमुख नेता
एनआईए ने जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि शब्बीर शाह जुलूस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। जांच एजेंसी के अनुसार उन पर भड़काऊ नारे लगाने और हिंसा भड़कने से पहले कथित रूप से उत्तेजक भाषण देने का आरोप है। एजेंसी ने संरक्षित गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका भी जताई।

गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने अप्रैल में इस पुराने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इसके बाद एजेंसी ने 10 जुलाई को जम्मू की विशेष एनआईए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

कई अलगाववादी नेताओं के नाम आरोपपत्र में
आरोपपत्र में शब्बीर शाह के अलावा अलगाववादी नेताओं शकील अहमद बख्शी और जावेद अहमद मीर को भी आरोपी बनाया गया है। वहीं सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील को भी मामले में आरोपी बनाया गया था लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई।

शब्बीर शाह के वकील ने दलील दी कि पहले जमानत याचिका को समय से पहले बताते हुए खारिज किया गया था लेकिन अब एनआईए आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और उनके संबंध में जांच पूरी हो गई है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शाह पर किसी हथियार को रखने या गोली चलाने का आरोप नहीं है और गोलीबारी अज्ञात हथियारबंद लोगों द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।

बचाव पक्ष ने शाह की लंबी हिरासत, उम्र और एक अन्य एनआईए मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत का हवाला देते हुए कहा कि लगातार हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के अधिकार को प्रभावित करता है। अदालत ने इन दलीलों के बावजूद जमानत देने से इनकार कर दिया।

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