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मणिपुर हमले में जम्मू के छह जवान शहीद, देखिए तस्वीरें

Fri, 05 Jun 2015 11:09 PM IST
Updated Fri, 05 Jun 2015 11:09 PM IST
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मणिपुर हमले में जम्मू के छह जवान शहीद, देखिए तस्वीरें

six jawans from jammu martyrs in manipur ambush

मणिपुर के चंदेल जिले में बृहस्पतिवार को घात लगाकर किए गए उग्रवादियों के हमले में सेना के 20 जवान शहीद हो गए, जबकि 11 घायल हुए हैं। तीन जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मणिपुर हमले में जम्मू के छह जवान शहीद, देखिए तस्वीरें

six jawans from jammu martyrs in manipur ambush

राम सिंह के शहीद होने पर पिता को फक्र

सेना में तैनात छह डोगरा के नायब सूबेदार राम सिंह निवासी सबोरवा मोड़ मणिपुर विस्फोट में शहीद हो गया। जैसे ही राम सिंह के शहीद होने की खबर गांव तक पहुंची, गांव व घर में शोक की लहर दौड़  गई। उसकी पत्नी को अभी तक यकीन ही नहीं है कि उसके  पति की मौत हो गई। शव पहुंचने पर ही उसे विश्वास होगा।शहीद के पिता बाबू राम ने बताया कि करीब दस साल पहले राम सिंह सिंह की शादी हुई थी। एक लड़का व एक लड़की है। पहले हम पूरा परिवार नंदपुर (रामगढ़ )में रहते थे। लेकिन कुछ समय से हम लोग सबोरवा मोड़ में कोठी बनाई है। मुझे फक्र है कि राम सिंह ने देश की खातिर अपने प्राणों की बाजी लगा दी। उधर दिनभर नंदपुर गांव में भी मातम का माहौल बना रहा व लोग शनिवार सुबह शहीद के शव के आने का इंतजार कर रहे थे।

मणिपुर हमले में जम्मू के छह जवान शहीद, देखिए तस्वीरें

six jawans from jammu martyrs in manipur ambush

शहीद सतपाल की बेटी को पापा का इंतजार

मणिपुर में आतंकी हमलों में सेना की 6 डोगरा रेजिमेंट के जवानों में जम्मू और राजोरी जिले के जवान भी शहीद हुए हैं। इनमें दो जवान रायपुर दोमाना विधानसभा क्षेत्र के मुट्ठी और बरन के हैं, जिसके चलते मुट्ठी और बरन में शोक की लहर है। मुट्ठी निवासी शहीद हवलदार सतपाल के परिवार में अभी तक उसके दोनों भाइयों के अलावा किसी को भी इस बात की खबर नहीं है कि उनके घर का चिराग हवलदार सतपाल शहीद हो गया है। सतपाल की साढ़े तीन वर्षीय एलकेजी में पढ़ने वाली बेटी हरुषी अपने पापा के आने का इंतजार कर रही है। पापा ने उसे आठ जून को घर आने की बात कही थी। सतपाल के बड़े भाई जो कि कृषि विभाग में एएईओ के पद पर तैनात हैं, ने बताया कि उनके घर की हालत पहले से ही खराब चल रही है। उनके पिता बिशन दास जो कि पूर्व फौजी हैं, का हाल ही में दिल का आपरेशन हुआ है। पिता को इस हादसे के बारे में बताने की हिम्मत उनमें नहीं है। हालांकि उन लोगाें को वीरवार देर शाम को ही सूचना मिल गई थी, लेकिन अभी तक घर में किसी को नहीं बताया गया है। छोटे भाई सुरेश ने बताया कि घर में वह क्या कहें। कुछ समझ में नहीं आ रहा। शहीद का बेटा आयूष जिसे घर में सभी प्यार से वंश कहते हैं, आर्मी स्कूल दोमाना में चौथी कक्षा में पढ़ता है। परिवार वालों ने बताया कि जनवरी महीने में छुट्टी काट कर यूनिट में गए सतपाल आठ जून को छुट्टी पर घर आ रहे थे। गौरतलब है कि हवलदार सतपाल और उनके अन्य साथियों को लेकर आ रही तीन गाड़ियों को आतंकियों ने पहले लैंड माइन से उड़ाया और उसके बाद किए हमल में गाड़ियों में बैठे बीस जवानों में से अठारह शहीद हो गए।

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six jawans from jammu martyrs in manipur ambush

लांस नायक कुलदीप पर था परिवार का दारोमदार

परिवार में इकलौते कमाने वाले लांस नायक कुलदीप का परिवार ही उसकी शहादत से टूट गया है। उसके घर का सारा खर्च उसकी आमदनी से चलता था। बरन के रहने वाला लांस नायक कुलदीप मणिपुर में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर मिलते ही शुक्रवार सुबह से ही उनके घर में आने-जाने वालों को तांता लग गया। सरपंच दलबीर सिंह जो कि खुद भी रिटायर फौजी हैं, ने बताया कि कुलदीप राज गरीब परिवार से था। उसके दो बड़े भाई मजदूरी करते हैं, जबकि एक विधवा बहन भी कुलदीप के सहारे ही थी। सेरी पंडिता हायर सेकेंडरी स्कूल से दसवीं कक्षा पास करने के बाद वर्ष 2000 में कुलदीप सेना की डोगरा रजिमेंट में भर्ती हो गए। ग्यारह महीने पहले ही उनके पिता काकू राम की मौत हो गई थी। जुलाई में पिता की बरसी है, बरसी को लेकर ही कुलदीप राज छुट्टी पर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि कुलदीप शुरू से ही होनहार थे। गरीबी और तंगहाली में पढ़ते हुए उन्होंने दसवीं कक्षा पास की और फौज में भर्ती हो गए। घर में मां शांति देवी के अलावा कुलदीप के दो बड़े भाई पुरुषोत्तम और दलीप कुमार हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी गायत्री देवी, अढ़ाई वर्षीय बेटी शगुन और विधवा बहन भी है। बेटी शगुन घर में आने जाने वालों को अचंभित होकर देख रही थी। इस घटना को लेकर सारा गांव गम में डूब गया है।

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six jawans from jammu martyrs in manipur ambush

सुनील के मणिपुर में शहीद होने की खबर से शोक की लहर

पूर्वोत्तर  के राज्य मणिपुर वीरवार  को उग्रवादी हमले के दौरान शहीद हुए सेना के बीस जवानों में से सुंदरबनी उपजिला सुंदरबनी के गंाव फ ाल के रिटायर्ड सूबेदार रमेश चंद्र के बड़े बेटे  हवलदार सुनील कुमार के शहीद होने का समाचार जैसे ही मिला तो पूरे गांव के साथ-साथ पूरी तहसील में शोक की लहर दौड़ गई।

वीरवार  दोपहर  सुनील कुमार के शहीद हाने का संदेश तो उसके रिश्तेदारों को मिल गया था लेकिन देर शाम तक किसी ने भी उसके परिजनों को बताने से हिम्मत नहीं की, लेकिन देर शाम जैसे ही उसकी युनिट से घर में फोन आया कि उनका लाडला मणिपुर में एक उग्रवादी हमले में शहीद हो गया है तो परिजनों के होश उड़ गए । उनको इस घटना पर यकीन नहीं हो रहा था कि सुनील कुमार शहीद हो गया है । परिजनों को जैसे ही पता चला तो काफी संख्या में लोगों ने  उन्हें घर पहुंचकर सांत्वना  देने के लिए पहुंचना शुरू हो गए और शुक्रवार को दिनभर लोगों का उनके घर आना जाना रहा।

सुनील तीन भाइयों में से सबसे बड़ा था
सुनील कुमार तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। उसके दो छोटे भाई मंजीत शर्मां तथा अजय शर्मां सुंदरबनी में ही दुकानें करते हैं ।सुनील के पिता रिटायर्ड सूबेेदार रमेश चंद्र नें भी छह डोगरा रेजीमेंट में 28 वर्ष तक नौकरी करने के बाद 1997 में रिटायर्ड हुए थे जबकि शहीद हवलदार सुनील कुमार 1996 में डोगरा सेंटर फैजाबाद में भर्ती होकर 1997 में छह डोगरा रेजीमेंट में पहुंचे थे। सुनील कुमार अपने पीछे अपनी पत्नी रीतू देवी तथा दो बेटे 12 वर्षीय अमित जो छठी कक्षा में पढ़ता है और छह वर्षीय सुमित जो पहली कक्षा में पढ़ता है, उनका सारा बोझ माता विमला देवी तथा पिता रमेश के कंधों पर आ गया है । जिन्होंने बेटे के शहीद होने का खबर सुनते ही अपनी सुध खो दी है कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है । वही सुनील की पत्नी का भी रो-रो हालत खराब हो चुकी है।

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