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Jammu Kashmir: कश्मीर में इस वर्ष केसर की पैदावार 30 प्रतिशत बढ़ी, जीआई टैगिंग से मिल रहे अच्छे दाम

Wed, 02 Nov 2022 06:01 PM IST
विमल शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 02 Nov 2022 06:01 PM IST
सार

कश्मीर घाटी में केसर की खेती में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके पीछे केसर उत्पादक प्रकृति को एक वरदान मान रहे हैं। उनके अनुसार इस वर्ष समय पर बारिश के साथ-साथ मौसम केसर की बागवानी के लिए अनुकूल रहा। 

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Saffron production increased by 30 percent in Kashmir this year
कश्मीरी केसर - फोटो : बासित जरगर

कश्मीरी केसर विश्व भर में अपनी गुणवत्ता के लिए माना जाता है। कश्मीर घाटी में इस वर्ष केसर की खेती में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी देखी जा रही है। केसर की सबसे ज्यादा पैदावार दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के पाम्पोर इलाके में होती है जहां दूर दूर तक खेतों में केसर के जामुनी फूल खिले हुए दिखाई देते हैं। पिछले कुछ वर्षों से लगातार सरकार के संबंधित विभागों के प्रयासों के चलते केसर को एक अलग मुकाम तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसमें एक बड़ा कदम है करीब तीन वर्ष पहले केसर को मिला जीआई (ग्रोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग जिसके चलते न केवल केसर की शुद्धता की गारंटी मिलती है बल्कि किसानों को भी अच्छे दाम मिल रहे हैं।

Saffron production increased by 30 percent in Kashmir this year
कश्मीरी केसर - फोटो : बासित जरगर

इसके कारण कश्मीरी केसर का उत्पादक काफी खुश है। वहीं सरकार द्वारा केसर की खेती से पर्यटकों को रूबरू कराने के लिए एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने के भी प्रयास कि ए जा रहे हैं। इस वर्ष कश्मीर घाटी में केसर की खेती में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके पीछे केसर उत्पादक प्रकृति को एक वरदान मान रहे हैं। उनके अनुसार इस वर्ष समय पर बारिश के साथ-साथ मौसम केसर की बागवानी के लिए अनुकूल रहा। इब्राहिम नबी (23) नामी एक स्थानीय केसर उत्पादक ने कहा कि कश्मीरी केसर दुनिया भर में प्रसिद्ध है और यहां का केसर सबसे महंगा बिकने वाला मसाला है।

Saffron production increased by 30 percent in Kashmir this year
कश्मीरी केसर - फोटो : बासित जरगर

उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष अच्छी पैदावार देखने को मिल रही है। इसके पीछे एक कारण यह रहा कि समय पर बारिश हुई और मौसम बागवानी के अनुकूल रहा। इससे हमारी उम्मीदें जाग रही हैं और सरकार को भी किसानों की देखभाल के लिए अच्छे से प्रयास करने चाहिएं। केसर उत्पादक जहां इस वर्ष बंपर पैदावार से खुश हैं वहीं बाजार में जीआई टैग के कारण मिल रहे अच्छे दामों से उनकी खुशी दोगुनी हो गई है। किसानों के अनुसार जीआई टैग से असल और नकल के बीच फरक होती हैं और असल केसर ही देश के विभिन्न बाजारों में पहुंचता है जिससे अब उनको केसर के दामों में बढ़ोतरी मिल रही हैं। सैफरन ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल मजीद वानी ने कहा इस वर्ष अच्छे से समय पर बारिशों के कारण इस बार अच्छी पैदावार हुई है। उन्होंने कहा कि इस बार करीब 30 प्रतिशत पैदावार में बढ़ोतरी हुई है। 

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Saffron production increased by 30 percent in Kashmir this year
कश्मीरी केसर - फोटो : बासित जरगर

पिछले साल 60-70 किलो केसर निकला था

मजीद वानी ने कहा कि सैफरन पार्क के बनने से यहां डुप्लीकेसी ख़त्म हो गई है। मजीद ने कहा कि कश्मीरी केसर को जीआई टैग से एक अलग पहचान मिल चुकी है। इससे हमें दोगुना फायदा हुआ है। पिछले साल हमने करीब 60-70 किलो केसर जमा किया था और उसके अच्छे दाम मिले। करीब 200 रुपए प्रति ग्राम रेट मिला और इस साल उससे अच्छे दाम मिल रहे हैं। मजीद ने कहा कि टाटा ग्रुप ने इस साल करीब 4000 रुपए प्रति किलो फूल ही खरीदे जो करीब 250 रुपए प्रति ग्राम रेट हुआ। उन्होंने कहा कि यह जीआई टैग किसानों के लिए फायदेमंद है। 

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कश्मीरी केसर - फोटो : बासित जरगर

एग्रो टूरिज्म को भी बढ़ावा दे रही सरकार

सरकार द्वारा केसर की खेती से पर्यटकों को रूबरू कराने के लिए एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देने के भी प्रयास किये जा रहे हैं। इसके चलते पाम्पोर में मंगलवार को सैफरन फेस्टिवल का भी आयोजन किया गया था। कृषि विभाग कश्मीर के निदेशक चौधरी मोहम्मद इक़बाल ने कहा, यह कार्यक्रम पाम्पोर के खेतों में पर्यटन विभाग और कृषि विभाग द्वारा केसर के खेतों में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि इससे एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा मिल पाएगा और आगे भी ऐसे प्रयास किए जाने चाहिएं। इस बीच निदेशक ने यह भी कहा कि विभाग केसर के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। चौधरी ने कहा कि 2010 में 1 हेक्टेयर से 1.8 क्विंटल केसर निकलता था और पिछले साल यही पैदावार 4.92 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पहुंची है और इस साल और बढ़ने की उम्मीद है।

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